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पाकिस्तानी चौकी के सामने राजनाथ सिंह ने दो बार क्यों लगवाया 'बोले सो निहाल-सत श्री अकाल' जयकारा

Sun, 19 Jul 2020 06:29 PM IST
Rajeev Rai जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 19 Jul 2020 06:29 PM IST
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Know why Rajnath Singh raised Bole so Nihal Sat Sri Akal twice in front of Pakistani post with sikh regiment
सिख रेजिमेंट के साथ राजनाथ सिंह - फोटो : ANI

भारत-चीन पर चल रहे गतिरोध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख का दौरा किया। वे उत्तरी कश्मीर में केरन सेक्टर की उस चौकी तक पहुंचे, जहां पर पाकिस्तानी सेना अक्सर गोलीबारी करती रहती है। निकट ही आतंकियों का लांचिंग पैड भी बताया जाता है। वहां पर तैनात सिख रेजिमेंट के जवानों ने रक्षा मंत्री के स्वागत में 'बोले सो निहाल सत श्री अकाल-वाहे गुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह' का जयकारा लगाया। जवानों ने चूंकि दहाड़ते हुए यह नारा लगाया था, इसलिए राजनाथ सिंह ने उसे 'सत श्री अकाल' दोबारा से बोलने के लिए कहा।

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एक जवान ने जैसे ही सत श्री अकाल बोलना शुरु किया, राजनाथ सिंह ने उसे बीच में टोक दिया। बोले, ये नहीं वो पूरा। साथ खड़े अधिकारी समझ गए कि रक्षा मंत्री क्या चाहते हैं। उन्होंने सिख रेजिमेंट के जवानों से कहा, पूरा पूरा जयकारा लगाओ। उसके बाद जवानों ने दोबारा से दहाड़ते हुए जयकारा लगाया।
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बहुत सोच समझकर रखा गया केरन सेक्टर का दौरा
सिख जवानों ने जब जयकारा लगाया तो राजनाथ सिंह भी उनके साथ हाथ उठाकर जय बोल रहे थे। 'बोले सो निहाल सत श्री अकाल-वाहे गुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह' जयकारे के बाद जवानों ने 'भारत माता की जय' बोला। सेना ने राजनाथ सिंह का यह दौरा बहुत सोच समझकर तय किया था। केरन सेक्टर, वही जगह है, जहां पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ होती रहती है। उत्तरी कश्मीर में पाकिस्तान की आड़ लेकर चीन अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। इस इलाके में चीनी अधिकारियों की मौजूदगी देखी गई है। यहां पर पाकिस्तान की ओर से आए दिन फायरिंग होती है।

राजनाथ सिंह ने अपने दौरे में सिख रेजिमेंट से जयकारा लगवा कर कई संदेश दे दिए हैं। उनका स्पष्ट कहना था कि कोई भी विदेशी ताकत हमारी सीमा की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकती। भारत की एक इंच जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। उन्होंने केरन सेक्टर से न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन को भी कड़ा संदेश दे दिया है। साथ ही पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को भी यह चेतावनी दे डाली कि 'वाहे गुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह' के जयकारे को वे जितना जल्द समझ लेंगे, उतना ही अच्छा रहेगा। उत्तरी कश्मीर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जवानों के बीच में रहकर उनका हौसला बढ़ाया। 

‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल', गुरु गोबिंद सिंह ने दिया था ये जयकारा
कलगीधर, दशमेश और बाजांवाले जैसी कई उपाधियों से नवाजे गए सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी ने यह नारा दिया था। सत श्री अकाल का उपयोग सभी सिख एक-दूसरे का अभिवादन करने के लिए करते हैं। 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल', इसका मतलब होता है कि जो व्यक्ति यह कहेगा कि ईश्वर ही अन्तिम सत्य है उस पर चिरकालिक ईश्वर का आशीर्वाद रहेगा।

सिख रेजिमेंट की स्थापना आजादी से पहले हुई थी। ब्रिटिश शासन काल में एक अगस्त 1846 को अपनी स्थापना के बाद से लेकर अब तक सिख रेजिमेंट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सिख रेजिमेंट का भारतीय सेना में अहम स्थान है। इस रेजिमेंट को 72 लड़ाई ऑनर्स, 2 परमवीर चक्र, 14 महावीर चक्र, 5 कीर्ति चक्र, 67 वीर चक्र और 1596 अन्य वीरता पुरुस्कार मिल चुके हैं। सारागढ़ी लड़ाई पर लिखी गई बहुचर्चित किताब 'द आइकॉनिक बैटिल ऑफ सारागढ़ी' में सिख जवानों की बहादुरी को विस्तार से वर्णित किया गया है। किताब में लिखा है कि 36 सिख रेजिमेंट के जवानों के पास सिंगल शॉट 'मार्टिनी हेनरी 303 राइफलें थीं, जो 1 मिनट में 10 राउंड फायर कर सकती थी। हर सैनिक के पास 400 गोलियां थी, 100 उनकी जेबों में और 300 रिजर्व में रखी हुई थी। पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम सीमांत क्षेत्र के कोहाट जिले में स्थित इस किले के सामने लगभग दस हजार पठान थे। 21 सिख जवानों ने कई सौ पठानों को मारकर शहादत पाई थी।  

ब्रिटिश संसद ने खड़े होकर किया था 21 सिख सैनिकों का सम्मान
इस लड़ाई को दुनिया के सबसे बड़े 'लास्ट स्टैंड्स' में जगह दी गई। सिखों के बलिदान की खबर जब लंदन पहुंची तो उस वक्त ब्रिटिश संसद का सत्र चल रहा था। उसी दौरान संसद में यह सूचना दी गई। संसद के सभी सदस्यों ने अपनी सीटों पर खड़े हो कर इन 21 सैनिकों को 'स्टैंडिंग ओवेशन' दिया था। लंदन गजेट के 11 फरवरी 1898 के अंक 26937 की पृष्ठ संख्या 863 पर ब्रिटिश संसद की टिप्पणी छपी। उसमें लिखा गया है कि ब्रिटेन और भारत को 36 सिख रेजिमेंट के इन सैनिकों पर गर्व है। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि जिस सेना में सिख सिपाही लड़ रहे हों, उन्हें कोई नहीं हरा सकता। महारानी विक्टोरिया ने सभी 21 सैनिकों को इंडियन ऑर्डर ऑफ मैरिट देने का ऐलान किया। वीरता के क्षेत्र में भारतियों को मिलने वाला यह सबसे बड़ा पदक था। वह पदक उस वक्त के विक्टोरिया क्रॉस और आज के परमवीर चक्र के बराबर माना जाता है। मेजर जनरल यीटमैन बिग्स ने कहा, '21 सिख सैनिकों की बहादुरी और शहादत को ब्रिटिश सैनिक इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।'

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