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जीवन में 20 साल पहले हुई एक घटना ने डॉ. शमशाद को बना दिया शिवभक्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 07 Aug 2018 09:23 AM IST
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आज के समय में जब हिंदू मुस्लिम के नाम पर दंगे फसाद होते हैं। राजनीति भी अब इन दो धर्मों के इर्द गिर्द ही सिमटकर रह गई है। वहीं इलाहाबाद के रहने वाले डॉ. शमशाद लोगों के लिए एक मिसाल हैं। वह एक बहुत बड़े शिवभक्त हैं। पिछले 20 सालों से वह हर रोज सुबह के समय शिवतांडव स्त्रोत का पाठ करने के बाद ही अन्य काम करते हैं। लेकिन एक मुस्लिम होने के नाते वह पांच वक्त की नमाज भी पढ़ते हैं।
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शाकाहार का पालन करते हैं
शमशाद सावन के महीने में रुद्राभिषेक तो करते ही हैं साथ ही वह पूरी तरह से शाकाहार का भी पालन करते हैं। पेशे से वह होम्योपैथिक चिकित्सक हैं और एक सादगी वाला जीवन जीते हैं। वह धार्मिक की बजाय आध्यात्मिक बनने की प्रेरणा पर जोर देते हैं।
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20 साल पहले शुरू की थी भक्ति
इलाहाबाद के सैय्यदबाड़ा इलाके के रहने वाले डॉ. शमशाद के जीवन में 20 साल पहले बहुत सी परेशानियां थीं। तभी उनके दोस्त ने उन्हें भगवान शिव में विश्वास रखने की सलाह दी और कुछ साहित्य भी पढ़ने को दिए। शमशाद का मानना है कि उन साहित्यों को पढ़ने के बाद उनके जीवन का अंधेरा दूर होने लगा और वह धीरे धीरे शिव की भक्ति में डूब गए। कुछ समय बाद उनके जीवन की परेशानियां कम होने लगीं और शिव के प्रति उनकी भक्ति मजबूत होती गई।
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कुर्बानी से अच्छा किसी गरीब की मदद करना
शमशाद का मानना है कि कुर्बानी से ज्यादा सुकून किसी गरीब की मदद करने से मिलता है। उन्होंने अपने जीवन में भी कुर्बानी पूरी तरह से बंद कर दी है। उनका मानना है कि किसी की जान लेकर आखिर किस प्रकार सुकून मिल सकता है। वह बताते हैं कि शिव की पूजा और शिवतांडव का पाठ करने के बाद उन्होंने बगलामुखी और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुरू किया। उनका कहना है कि उन्हें इससे सुकून मिलता है। वह केवल जुम्मे की नमाज के लिए मस्जिद जाते हैं क्योंकि लोग उनके शिवभक्त होने पर ऐतराज जाते हैं।