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गुजरात चुनावों पर टिकी थी चीन की निगाहें, ले रहा पल-पल की खबर

Fri, 15 Dec 2017 02:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 15 Dec 2017 02:20 PM IST
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know, why China's close eye on gujarat election

जहां सारे देश की निगाहें गुजरात चुनावों पर टिकी हैं, वहीं कुछ देश भी ऐसे हैं जो गुजरात चुनावों पर नजदीकी से निगाह बनाए हुए हैं। उन्हीं देशों में से एक है भारत का पडोसी चाइना, जो लगातार गुजरात चुनावों पर निगाहें जमाए हुए है। जानकारों की मानें तो चाइना गुजरात चुनावों को भारतीय वोटरों के लिटमस टेस्ट के रूप में देख रहा है जिससे प्रधानमंत्री मोदी के प्रति जनता के रुख का अंदाजा लगाया जा सके। 

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार चाइनीज मीडिया में गुजरात चुनावों को लेकर लगातार खबरें चल रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये भी है कि गुजरात चुनावों में जनता का मूड़ जानने को लेकर चीन की इतनी उत्सुकता क्यों है। इसका जवाब मिलता है सरकार नियंत्रित मीडिया समूह ग्लोबल टाइम्स के हालिया लेख में। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, भारत एक उभरती हुई अर्थव्यवस्‍था है और उसके साथ बढ़ते आर्थिक संबंधों के कारण इससे चीन की गहरी चिंता जुड़ी रहती है। ऐसे में भारत में होने वाले कोई भी बड़े बदलाव चाइना पर भी असर डालते हैं।  
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भारत के आर्थिक सुधारों के प्रति दृष्टिकोण का असर भारत में काम कर रही चीनी कंपनियों जैसे शिओमी और ओप्पो पर भी पड़ता है। अगर भाजपा गुजरात में एकतरफा जीत हासिल करती है, तो आर्थिक सुधारों के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण और मजबूत होगा। जिसका नतीजा ये होगा कि चीन की कपंनियां भारत के मुकाबले इन बदलावों को ज्यादा महसूस कर सकेंगी। 

भारत चीन की अर्थव्य‍वस्‍था पर भी पड़ेगा गुजरात चुनावों का प्रभाव

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लेख के अनुसार अगर गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी की हार होती है तो ये चीन इसे सरकार द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों में बड़े झटके के तौर पर देखेगा। अखबार आगे लिखता है कि मोदी द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों का कुछ अर्थशास्त्रियों और राजनीतिज्ञों द्वारा विरोध किया जा रहा है। लेकिन 'गुजरात मॉडल' का मूल्यांकन करने वाले सबसे योग्य गुजरात के लोग हैं। ऐसे में विधानसभा चुनावों में जनता का रुझान मोदी के आर्थिक सुधारों के एजेंडे पर बड़ा असर डालेगा। 

अगर भाजपा यहां जीतती है लेकिन उसके वोट शेयर घटता है तो एक तरह से ये उसकी लाल झंडी की तरह होगा। लेख के अनुसार अगर भाजपा जीतती है लेकिन उसकी सीटें कम होती हैं और उसके बहुमत पर असर पड़ता है तो ये एक तरह से भारतीय अर्थव्यवस्‍था पर छाए बादल की तरह होगा।

गुजरात में बीजेपी के लिए संभावित असंतोष का बढ़ता बाजार भय भारत के आर्थिक सुधारों में एक कमी को भी दर्शाएगा। इसका मतलब ये होगा कि लोगों को इस बात का भय है कि संभावित बदलाव देश के छोटे उद्योगों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए पर्याप्त राहत भरे नहीं हैं।

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