चाबहार बंदरगाह: जानिए भारत की ताकत से क्यों है पाकिस्तान और चीन को खतरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने रविवार को चाबहार बंदरगाह के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस बंदरगाह के उद्घाटन से ईरान, भारत और अफगानिस्तान के बीच बिना पाकिस्तान जाए नए रणनीतिक ट्रांजिट रूट की शुरुआत होगी। इससे भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच व्यापार में बढ़ोतरी होगी।
पढ़ें: पीएम मोदी ने शहजाद के बहाने राहुल को घेरा, पूनावला ने कहा-थैंक्स
सिस्तान-ब्लूचिस्तान स्थित यह बंदरगाह ऊर्जा से भरपूर राष्ट्र के दक्षिणी तट पर पारस की खाड़ी से बाहर स्थित है। भारत के पश्चिमी तट से यहां आसानी से पहुंचा जा सकेगा। इसे मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार के लिए ‘अवसरों का सुनहरा प्रवेश द्वार’ माना जा रहा है। चाबहार बंदरगाह परियोजना के पहले चरण को शाहिद बेहेस्ती बंदरगाह के नाम से जाना जाएगा।
पढ़ें: सुशील मोदी के बेटे की शादी में पहुंचे लालू, नीतीश से नहीं हुई बातचीत
इसका उद्घाटन राष्ट्रपति रूहानी ने इस क्षेत्र के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार उद्घाटन समारोह में भारत की तरफ से जहाजरानी राज्य मंत्री पी. राधाकृष्णन मौजूद थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार उद्घाटन समारोह में रूहानी ने कहा, ‘इस क्षेत्र के रूट को सड़क, समुद्री और वायु से जुड़ा होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि यह बंदरगाह क्षेत्र के देशों के बीच मेलजोल और एकता को बढ़ावा देगा।
भारत बंदरगाह के दो हिस्सों का करेगा संचालन
भारत इस चाबहार बंदरगाह के पहले चरण के दो हिस्सों का संचालन करेगा। इस संबंध में भारत और ईरान के बीच पिछले साल मई में समझौता हुआ था। 10 साल की लीज अवधि के दौरान भारत 852.1 करोड़ डॉलर के निवेश से बंदरगाह का संचालन करेगा। इसमें उपकरण व अन्य आवश्यक सामान शामिल होगा।
1- 34 करोड़ डॉलर वाली इस परियोजना का निर्माण सरकारी निर्माण परियोजना की कंपनी खातम अल-अनबिया ने किया है।
2- इसके एक्सटेंशन में पांच नए घाट शामिल हैं। इनमें से दो कंटेनर के लिए है। ये एक लाख टन की क्षमता वाले वैसल्स को डॉक तक पहुंचाने में मदद करेंगे।
3- चाबहार बंदरगाह से ईरान की हिंद महासागर से दूरी घट जाएगी। प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से करीब 80 किलोमीटर ही दूर है। पाकिस्तान ग्वादर बंदरगाह का निर्माण चीन के पैसे से करवा रहा है।
4- 06 मई 2015 में भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास हेतु द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।
5- इस बंदरगाह को बनाने में भारत लगभग 8.5 करोड़ डॉलर खर्च करेगा ।
6- विदेश में स्थित भारत का पहला बंदरगाह होगा जो भारत के मूंदड़ा पोर्ट से केवल 940 किमी की दूरी पर है इस यात्रा को पूरा करने में चार दिन लगेंगे ।
7- यह पोर्ट रेल तथा रोड के माध्यम से ईरान द्वारा बनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय उत्तर -दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से भी जुड़ जाएगा ।
8- इसके माध्यम से भारत अपना सामान मध्य एशिया तथा रूस तक पहुंचाने में सक्षम होगा ।
9- सभी देशों को व्यापार का एक नया अवसर प्राप्त होगा। ईरान चाबहार पोर्ट में फ्री ट्रेड इंडस्ट्रियल जोन भी बना रहा है।
10- चाबहार पोर्ट का सामरिक महत्व भी है जो कि आने वाले समय में दक्षिण-एशिया, मध्य -एशिया तथा पश्चिम-एशिया के दूसरे बड़े व्यापार केंद्रों को भी जोड़ने का काम करेगा ।
11- चाबहार पोर्ट भारत के माल को मध्य-एशिया ईरान की खाड़ी तथा पूर्वी-यूरोप तक एक तिहाई समय में पहुंचाने का काम करेगा और भाड़े में भी कटौती होगी ।