दिल्ली के प्रदूषण से लोग परेशान, लेकिन इन्हें हो रहा है फायदा
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उत्तर भारत के तमाम शहरों में नवंबर के पहले हफ्ते में ही वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में भी बीते बुधवार हवा की गुणवत्ता नापने का सूचकांक 328 तक पहुंच गया जिसे 50 से ज्यादा नहीं होना चाहिए। पिछले साल इस सूचकांक के 386 के स्तर पर पहुंचने के बाद दिल्ली सरकार ने सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया था।
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उत्तर भारत के तमाम शहरों में नवंबर के पहले हफ्ते में ही वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में भी बीते बुधवार हवा की गुणवत्ता नापने का सूचकांक 328 तक पहुंच गया जिसे 50 से ज्यादा नहीं होना चाहिए। पिछले साल इस सूचकांक के 386 के स्तर पर पहुंचने के बाद दिल्ली सरकार ने सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया था।
इसके साथ ही डॉक्टरों ने लोगों को मास्क लगाकर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी थी। वायु प्रदूषण को लेकर लोगों में जागरूकता आने की वजह से भारत में एक नया बाजार शक्ल ले रहा है। इस बाजार के तहत एंटी-पल्यूशन मास्क, एयर-प्यूरीफाइंग मशीनें, हवा की गुणवत्ता नापने वाले डिजिटल मॉनिटर और कार एयर प्यूरीफायर जैसे उत्पाद शामिल हैं।
तेजी से बढ़ रहा है ये बाजार
ई-कॉमर्स वेबसाइट एमजॉन के मुताबिक, साल 2016 में लोगों ने 2015 के मुकाबले चार सौ प्रतिशत ज्यादा एयर प्यूरिफायर खरीदे थे। वहीं, 2017 में लोगों ने 2016 के मुकाबले 500 प्रतिशत ज्यादा एयर प्यूरिफायर खरीदे थे। यही नहीं, एमजॉन पर साल 2018 में होम/कार प्यूरिफायर्स की बिक्री में सितंबर महीने के मुकाबले अक्टूबर में 450 फीसदी ज्यादा बिक्री दर्ज की गई है।
एमजॉन के साथ-साथ फ्लिपकार्ट पर भी लोगों ने इस उत्पाद को लेकर रूचि दिखाई है। फ्लिपकार्ट के वरिष्ठ निदेशक संदीप करवा भी बताते हैं, 'साल 2018 में अक्तूबर 2017 के मुकाबले बिक्री में 400 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है और दिल्ली-मुंबई में इन उत्पादों को लेकर खासी रुचि देखी जा रही है।'
आखिर क्यों बढ़ रहा है ये बाजार?
ऐसे में सवाल उठता है कि साल के सिर्फ दो महीने इस्तेमाल किया जाने वाला ये उत्पाद भारत के मध्यवर्ग के घरों में अपनी जगह कैसे बना पा रहा है। इस सवाल का जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन की उस रिपोर्ट में मिलता है जिसमें ये बताया गया है कि साल 2016 में भारत में प्रदूषण की वजह से लगभग एक लाख दस हजार बच्चों की मौत हो गई थी।
रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर ये भी बताया गया है कि ये बच्चे प्रदूषण के बेहद बारीक कणों, जिन्हें पीएम कहा जाता है, के शिक़ार हुए थे। यही नहीं, बीते साल आए डस्ट स्टोर्म ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान नवंबर के महीने में तापमान भी बढ़ गया था।
क्या ये आत्मरक्षा जैसा है?
इस रिसर्च में सामने आया है कि भारत में साल 2017 में लगभग दो लाख एयर प्यूरीफाइंग मशीनों को खरीदा गया था। वहीं, इस प्रोडक्ट कैटिगरी में बीते साल कुल 116 करोड़ रुपए की बिक्री दर्ज की गई थी जो कि साल 2014 के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा थी। यही नहीं, यूरोमॉनिटर ने इस बात की संभावना भी जताई है कि साल 2022 तक ये बाजार 14.5 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ सकता है।
वहीं, दिल्ली के खान मार्केट स्थित निर्वानाबींग नाम की कंपनी के सीईओ जयधर गुप्ता मानते हैं कि लोगों के जागरूक होने की वजह से ये बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है। वे कहते हैं, 'विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट आने के बाद लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ी है। ये सिर्फ दिल्ली नहीं पूरे भारत में वायु प्रदूषण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। हमारे पास आंध्र प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश से ऑर्डर आ रहे हैं।'
निर्वाणाबींग ने इस साल के अक्टूबर महीने में ही उतना स्टॉक बेच दिया है जितना उन्होंने पिछले साल पूरे सीजन में बेचा था। बिक्री में इस बढ़त की वजह समझाते हुए गुप्ता कहते हैं, 'पिछली साल हमारे यहां बिक्री तब शुरू हुई थी जब दिल्ली बिल्कुल काली हो गई थी, हर जगह बस धुंआ ही धुंआ था। लेकिन इस बार तो सितंबर से ही ऑर्डर आ रहे हैं।'
'पिछले साल के अक्टूबर महीने के मुकाबले इस साल हमारी बिक्री 400 फीसदी ज्यादा है। यही नहीं, जागरूकता का स्तर ये है पिछले साल हमने जितना माल बेचा था उतना माल अक्तूबर में ही खप चुका है।'
महिलाएं ले रही हैं फैसले?
खास बात ये है कि इस बाजार को बढ़ाने में महिलाओं का अहम योगदान है। जयधर गुप्ता बताते हैं, 'हमारे यहां मास्क और एयर प्यूरीफायर खरीदने वालों में महिलाओं का प्रतिशत लगभग 60 से 65 प्रतिशत है क्योंकि इंडोर एयर प्यूरीफायर जैसे उत्पाद का सीधा फायदा महिलाओं और उनके बच्चों को ही होता है। ऐसे में ये लाजमी है कि महिलाएं एक अहम ग्राहक वर्ग बन जाती हैं।'
महिलाओं की अहमियत को देखते हुए वैश्विक कंपनियों भी महिला केंद्रित विज्ञापनों का सहारा ले रही है। नीदरलैंड की कंपनी फिलिप्स के विज्ञापन में बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर नजर आती हैं जो कि एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में रहने वाली मां का किरदार निभा रही हैं। असल जिंदगी में भी वह एक शादीशुदा महिला होने के साथ-साथ एक बच्चे की मां हैं।
विज्ञापन में करीना कपूर कहती हैं, 'मां हूं, इसलिए काफी प्रोटेक्टिव हूं। जब मुझे पता चला कि मेरे घर का प्रदूषण 500 का आंकड़ा छू जाता है जबकि डब्ल्यू एचओ के मुताबिक ये स्तर 25 तक होना चाहिए। अब तक मैं बाहर के प्रदूषण को लेकर ही चिंतित थी।' इन विज्ञापनों की सामग्री में विश्व स्वास्थ्य संगठन, भावनाओं और तर्कों के प्रयोग से वैश्विक ब्रैंड दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में रहने वाली महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं।
फ्लिपकार्ट के वरिष्ठ निदेशक संदीप करवा भी बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले 2018 में उत्तर भारत में 8 गुना ज्यादा प्यूरिफायर खरीदे गए हैं। इसके साथ एमआई, फिलिप्स, हनीवेल, टेफल, सैमसंग, लिवप्योर और ब्लूस्टार जैसी कंपनियों के प्यूरिफायर ज्यादा खरीदे जा रहे हैं जो कि मात्र साढ़े चार हजार रुपए से शुरू होते हैं।
घरों को स्वच्छ बनाने में काबिल हैं ये उत्पाद?
वहीं, जापानी कंपनी शार्प ने अपने उत्पाद को 23 हजार रुपये की कीमत पर उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराया है। डच कंपनी फिलिप्स के एयर प्यूरीफायर को आठ हजार से 37,995 रुपये की रेंज में खरीदा जा सकता है। लेकिन अमेजन और फ्लिपकार्ट के मुताबिक, एमआई, हनीवेल और फिलिप्स जैसी कंपनियों को उपभोक्ताओं की ओर से ज्यादा तरजीह मिल रही है।
वहीं, अगर दुकानों से खरीदे जाने वाले एयर प्यूरीफायर्स की बात करें तो स्थानीय कंपनियां वैश्विक कंपनियों को मात देती दिख रही हैं। दिल्ली के मालवीय नगर में छतवाल इलेक्ट्रॉनिक्स में काम करने वाले करम कहते हैं, 'साल 2018 में हमने इस उत्पाद को लेकर भारी मांग देखी है। लोगों ने गिफ्ट करने के उद्देश्य से थोक में 100 से 150 से एयर प्यूरीफायर खरीदे हैं।'
'लेकिन ऊंची कीमत की वजह से विदेशी कंपनियां पिछड़ती दिख रही हैं। क्योंकि लोग ये मानते हैं कि घरों में इसकी जरूरत कम और कुछ हफ्तों के लिए ही होती हैं जो कि भारतीय कंपनी के पांच हजार रुपये वाले एयर प्यूरीफायर से पूरी हो सकती है।' विदेशी कंपनियां भी इस चुनौती को लेकर सचेत नजर आती हैं। अमरीकी कंपनी हनीवेल के जनरल मैनेजर सुधीर पिल्लई भारतीय उपभोक्ताओं के मन में समाए इस मिथक पर चिंतित नजर आते हैं।
वे कहते हैं, 'हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि अभी लोगों में इस उत्पाद को लेकर एक जागरुकता और समझ विकसित नहीं हुई है। लोगों को घर के बाहर का प्रदूषण दिखता है लेकिन घर के अंदर का प्रदूषण लोगों को नजर नहीं आता है। इसके साथ ही अब भी इस उत्पाद को एक लग्जरी के रूप में देखा जाता है।'
वहीं, निर्वानाबींग के सीईओ जयधर गुप्ता सस्ते उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि लोगों को ये समझ नहीं आता है कि सस्ती कीमतों पर मिलने वाले उत्पादों की क्षमता इतनी नहीं होती है कि उनके घरों में समाए प्रदूषण से मुक्ति दिला सकें। लेकिन सुधीर पिल्लई हर साल 45 फीसदी की दर से बढ़ रहे भारतीय एयर प्यूरीफाइंग बाजार को लेकर काफी उत्साहित नजर आते हैं।