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जानिए क्या होती है वायुसेना की एयरोबैटिक्स टीम, जिसका हिस्सा हैं सूर्य किरण विमान
Tue, 19 Feb 2019 03:32 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 19 Feb 2019 03:32 PM IST
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सूर्य किरण एयरोबैटिक्स टीम का विमान
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बंगलूरू में 20 फरवरी से 24 फरवरी तक एयर शो का आयोजन होने वाला है। इससे एक दिन पहले मंगलवार को रिहर्सल के दौरान सूर्य किरण एयरोबैटिक्स टीम (स्कैट) के दो विमान आपस में टकरा गए। हालांकि इस घटना में दो पायलट बाल-बाल बच गए लेकिन एक की मौत हो गई। आज हम आपको बताते हैं कि सूर्य किरण क्या है और इसकी क्या खासियत है।
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सूर्य किरण भारतीय वायुसेना की एक एयरोबैटिक्स प्रदर्शन टीम है। साल 1996 में सूर्य किरण एयरोबैटिक्स टीम (स्कैट) की स्थापना हुई थी और यह वायुसेना की 52वें स्कवाड्रन का हिस्सा है। यह टीम कई बार 9 विमानों वाले फॉर्मेशन का प्रदर्शन कर चुकी है। स्क्वाड्रन 2011 तक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) एचजेटी-16 किरण एकमे 2 सैन्य ट्रेनर विमान से बनाया गया था और यह कर्नाटक के बिदार वायुसेना स्टेशन पर आधारित था।
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स्कैट को फरवरी 2011 में निलंबित कर दिया गया था और इसे 2017 में हॉक एमके 132 विमान के साथ दोबारा स्थापित किया गया। किरण एमके 2 की तैनाती बंदूक, 250 किलो बम और 68 मिमी रॉकेटों से लैस आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए भी की जा सकता है। एमके 2 कलर डाई ले जाने के लिए मॉडिफाई किया गया है। विमान में डीजल का इस्तेमाल सफेद धुएं के लिए और डीजल के साथ रंग मिलाकर उसका इस्तेमाल रंगीन धुएं के लिए किया जाता है।
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स्कैट टीम में 13 पायलट होते हैं। जिसमें से केवल 9 किसी भी समय उड़ान भरते हैं। टीम के लिए पायलटों का चुनाव साल में दो बार तीन सालों के लिए होता है। केवल लड़ाकू विमान उड़ाने योग्य पायलटों को इसके लिए चुना जाता है। टीम के सभी पायलट क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (योग्य उड़ान प्रशिक्षक) होते हैं, जिनके पास किरण एयरक्राफ्ट चलाने का 1,000 घंटे और लगभग 2,000 घंटे का लड़ाकू उड़ान अनुभव होता है।
स्कैट टीम का मुखिया कमांडर अधिकारी होता हो जो फॉर्मेशन का भी नेतृत्व करता है। कमांडिंग ऑफिसर के पास यह मौका होता है कि वह अपने भविष्य के टीम पायलटों को चुन सकता है। पायलटों के अलावा टीम में फ्लाइट कमांडर, एक प्रशासक और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर होते हैं। आमतौर पर यह टीम एक साल में 30 शो करती है। 9 विमान तीन-तीन के समूहों में उड़ान भरते हैं और और 150 से 650 किलोमीटर प्रति घंटे रफ्तार के बीच युद्धाभ्यास करते हैं।