पढ़िये आधार को चुनौती देने वाले पहले शख्स की कहानी...
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कर्नाटक हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश केएस पुत्तास्वामी सर्वोच्च न्यायालय में आधार को चुनौती देने वाले पहले याचिकाकर्ताओं में से एक थे। 92 वर्षीय पुत्तास्वामी ने यह याचिका 2012 में दायर की थी। उनका कहना था कि सरकारी सेवाओं को पाने के लिए आधार की अनिवार्यता उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।
8 फरवरी 1926 को मैसूर (तत्कालीन राज्य) के कोलार जिले में पुत्तास्वामी का जन्म हुआ था। मैसूर स्थित महाराजा कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की और बंगलूरू स्थित गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री ली। 1952 में उन्होंने वकालत शुरू की और 1977 में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की स्थापना और सितंबर 2010 में पहला आधार कार्ड जारी करने के बाद यूपीए सरकार इस बायोमीट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित थी। इसके बाद आधार का विस्तार करने के लिए लोगों से आधार कार्ड बनवाने और विभिन्न सेवाओं और योजनाओं में इसे जोड़ने के लिए कहा जाने लगा। लेकिन, आधार को नियंत्रित करने वाली यूआईडीएआई एक कार्यकारी आदेश द्वारा स्थापित की गई थी और इसमें विधायी बैकअप की कमी थी। इसने समाज के एक बौद्धिक वर्ग को इस चिंता में डाल दिया कि इस व्यवस्था से सरकार द्वारा आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन हो सकता है।
निजता का अधिकार जोड़ने में भी अहम भूमिका
ऐसे ही लोगों में से एक थे कर्नाटक हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश केएस पुत्तास्वामी। पुत्तास्वामी ने आधार की वैधता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। उस वक्त वह 86 वर्ष के थे। उनका तर्क था कि अधिकारों और सार्वजनिक सेवाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पुत्तास्वामी की याचिका अक्टूबर 2012 में आई और अगले महीने केंद्र सरकार से इस बारे में प्रतिक्रिया मांग गई। इसी बीच, सर्वोच्च न्यायालय में इससे संबंधित कुछ और याचिकाएं दायर की गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 से ज्यादा आधार से संबंधित केसों को भी इस मुख्य मामले से जोड़ दिया। अपने फैसले में न्यायालय ने कहा कि गोपनीयता का आधार भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मौलिक संवैधानिक अधिकार के रूप में संरक्षित है। याचिकाकर्ताओं में पुत्तास्वामी के अलावा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहली अध्यक्ष और मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता शांता सिन्हा, नारीवादी शोधकर्ता कल्याणी सेन मेनन, सोशल एक्टिविस्ट अरुणा रॉय, निखिल डे, नचिकेत उडुपा और सीपीआई नेता बिनॉय विल्सन आदि शामिल हैं।
बाद में पुत्तास्वामी ने बताया कि आधार की समवैधानिक वैधता को चुनौती देने का विचार तब आया जब वह अपने मित्रों के साथ चर्चा कर रहे थे। पुत्तास्वामी का मानना था कि आधार लागू करने की कार्यकारी कार्रवाई सही नहीं थी और एक आम नागरिक के तौर पर उनके अधिकार प्रभावित कर रही थी। छह साल के इस सफर में उनके नेतृत्व में हुई याचिकाओं के चलते सर्वोच्च न्यायालय ने आधार परियोजना के क्रियान्वयन और नागरिकों के बायोमीट्रिक डाटा के प्रयोग को लेकर कई चेतावनी जारी कीं।
इस केस के चलते ही सर्वोच्च न्यायालय ने निजता के अधिकार को संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों की सूची में जोड़ा। यही निजता का अधिकार आईपीसी की धारा 377 में बदलाव करने का प्रमुख कारण बना और समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर किया गया।
राजनीतिक संबंधों की भी रही चर्चा
आधार के खिलाफ पुत्तास्वामी की याचिका का एक दिलचस्प राजनीतिक संबंध भी था। 2012 में जब उन्होंने याचिका दायर की तब सत्ता में कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार थी और सरकार ने लोगों के लिए सरकारी सुविधाओं के विस्तार में आधार को एक प्रमुख साधन घोषित किया था। याचिका दायर करने से पहले पुत्तास्वामी ने अपने कुछ दोस्तों के साथ कई बार चर्चा की। इन्हीं मित्रों में से एक थे न्यायाधीश रामा जोइस, जो बिहार के पूर्व राज्यपाल थे और पंजाब और हरयाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके थे।
न्यायाधीश जोइस के भाजपा ने राज्यसभा के लिए 2008 में नामित किया था। कर्नाटक में जोइस एक वकील होने के साथ-साथ कार्यकर्ता भी थे और 1977 के आपातकाल में उन्हं जेल में डाल दिया गया था। बंगलूरू में वह उसी जेल में कैद थे जिसमें भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी कैद थे।
हालांकि, पुत्तास्वामी और उनके नजदीकी लोग इस बात से स्पष्ट इंकार करते हैं कि उनकी याचिका और न्यायाधीश जोइस के भाजपा से संबंध में कोई लेना-देना है। पुत्तास्वामी ने भाजपा के सत्ता में आने के बाद भी आधार को लेकर अपना रुख नहीं बदला।
खुद को अपडेट रखने के लिए 92 साल के जस्टिस केएस पुत्तास्वामी रोजाना अखबार पढ़ते हैं। यह उनकी आदतों में शुमार है। अखबार के मोटे अक्षरों को तो वह आराम से पढ़ लेते हैं, लेकिन बारीक अक्षरों को पढ़ने के लिए वह हाथ वाले लेंस का इस्तेमाल करते हैं।