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पिछले दो दशक से हो रही समयपूर्व मौतों के पीछे की वजह आई सामने, स्टडी में पता चली ये बात

Wed, 23 May 2018 09:48 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Wed, 23 May 2018 09:48 AM IST
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know the real reason behind the premature deaths in UP, Bihar and Jharkhand

देश में पिछले दो दशक के दौरान समय से पहले होने वाली मौतों का प्रमुख कारण वायु प्रदूषण है। यह बात आईआईटी-दिल्ली के एक अध्ययन में सामने आई है। ‘नो वाट यू ब्रीथ’ शीर्षक वाले इस अध्ययन को सेंटर फॉर इन्वायरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीईईडी) के साथ मिलकर किया गया। अध्ययन में सामने आया कि वायु प्रदूषण के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के शहरी क्षेत्रों में प्रति एक लाख लोगों में हर साल 150 से 300 लोगों की मौत हो रही है। 

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झारखंड की राजधानी को छोड़कर इन जगहों पर पीएम2.5 का स्तर राष्ट्रीय औसत मानक से दोगुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वीकार्य स्तर से आठ गुना अधिक है। शोधकर्ताओं ने पिछले 17 साल के उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उत्तर भारत के 11 शहरों में पीएम2.5 की सघनता का अध्ययन किया।
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इन 11 शहरों में से आठ शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु गुणवत्ता आकलन रिपोर्ट में भी शामिल थे। सीईईडी के कार्यक्रम निदेशक अभिषेक प्रताप ने कहा कि हमारे शहरों में वायु प्रदूषण के कारण सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार को इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत है।

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यूपी के शहरों में स्थिति चिंताजनक

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रिपोर्ट में कहा गया है कि वाराणसी में पिछले 17 साल में पीएम2.5 के स्तर में 28.5 माइक्रोग्राम/एम3 की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मेरठ, आगरा, लखनऊ, गोरखपुर और पटना में स्थिति चिंताजनक है। दूसरी तरफ कानपुर, इलाहाबाद और गया में पीएम2.5 का स्तर मध्यम है। बिहार में मुजफ्फरपुर और झारखंड के रांची में वायु प्रदूषण की स्थिति संतोषजनक है।

मृत्यु दर में 20 फीसदी हो सकती है कमी

आईआईटी दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर सागनिक डे का कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर की वायु गुणवत्ता के दिशा निर्देशों को पूरा कर लिया जाए तो आगरा, कानपुर, लखनऊ और मेरठ जैसे शहरों में समय पूर्व होने वाली मौतों में 20 फीसदी तक की कमी आ सकती है। वहीं इलाहाबाद, गया, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर, पटना और वाराणसी में भी 10-20 फीसदी की कमी आ सकती है।

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