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कोविड-19: वायरस के नए वैरिएंट को लेकर क्यों चिंतित हैं दुनियाभर के वैज्ञानिक? जानें डेल्टा प्लस से जुड़ी जरूरी बातें

Tue, 15 Jun 2021 12:08 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Tue, 15 Jun 2021 12:08 PM IST
सार

हाल ही में कोरोना वायरस का एक नया वैरिएंट डेल्टा प्लस कई देशों में पाया गया है। डेल्टा प्लस को डेल्टा वैरिएंट से भी ज्यादा घातक और खतरनाक बताया जा रहा है।

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Know the necessary details about the new deadly variant of coronavirus Delta Plus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

कोरोना के सटीक इलाज में सबसे बड़ी समस्या इस वायरस के बदलते स्वरूप को लेकर है। क्षेत्र और समय के अनुसार इस वायरस के वैरिएंट लगातार बदल रहे हैं। हाल ही में डेल्टा प्लस नामक एक नया वैरिएंट पाया गया है, जिसे लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक चिंतित हैं। इस डेल्टा प्लस वैरिएंट को डेल्टा वैरिएंट से ज्यादा घातक और खतरनाक बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल ही में भारत में इस नए वैरिएंट के खिलाफ उपचार के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल को मान्यता दी गई है। यह दवा इस नए वैरिएंट के खिलाफ कारगर मानी जा रही है।

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डेल्टा प्लस वैरिएंट से जुड़ी सभी जरूरी बातें
भारत में वैज्ञानिकों ने कहा है कि कोविड-19 के डेल्टा वैरिएंट में काफी परिवर्तन के बाद डेल्टा प्लस वैरिएंट का निर्माण हुआ है। हालांकि, भारत में इससे चिंतित होने का कोई विशेष कारण नहीं है क्योंकि देश में इस वैरिएंट के मामले अभी भी कम हैं। बता दें, डेल्टा वैरिएंट के ही कारण देशभर में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप बढ़ा था। इसी वैरिएंट के फैलने से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 21 जून से देश को खोलने की योजना में सफल नहीं हो सके। डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण में तेजी होने के कारण ब्रिटेन में भी इसके नए मामले सामने आ रहे हैं। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट से जुड़ी सभी जरूरी बातें-

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  • वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना वायरस का डेल्टा (B.1.617.2.1) वैरिएंट, K417N वैरिएंट में म्यूटेशन के कारण बना है। यह बदलाव Sars-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन में होता है, जो वायरस को मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने और संक्रमित करने में मदद करता है।
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  • नए शोध से पता चला है कि K417N के दो समूह हैं। उनमें से एक समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है और दूसरा संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ग्लोबल साइंस इनिशिएटिव  (GISAID) पर अपलोड किए गए जीनोम अनुक्रमों में पाया गया है।
  • 7 जून तक कनाडा, जर्मनी, रूस, नेपाल, स्विटजरलैंड, भारत, पोलैंड, पुर्तगाल, जापान और अमेरिका से 'डेल्टा प्लस' वैरिएंट के 63 जीनोम की पहचान की गई है। ब्रिटेन में नए वैरिएंट के 36 मामले सामने आए हैं और यह अमेरिका में सभी मामलों का 6 प्रतिशत है। जानकारी के अनुसार इस जीनोम को सबसे पहले इसी साल मार्च के अंत में यूरोप में पाया गया था।
  • इम्यूनोलॉजिस्ट विनीता बल ने सोमवार (14 जून) को कहा कि नए संस्करण के कारण वाणिज्यिक तौर पर एंटीबॉडी कॉकटेल के उपयोग में कुछ समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन थेरेपी का प्रतिरोध उच्च विषाणु या बीमारी की गंभीरता का संकेत नहीं है।
  • द्विपीय देश हवाई ने सोमवार को बताया कि पिछले महीने नेवादा की यात्रा करने वाले एक ओहू निवासी में कोविड-19 का डेल्टा वैरिएंट पाया गया।
  • पिछले शुक्रवार तक अपडेट किए गए कोरोना वायरस वैरिएंट्स पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट में स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट 7 जून तक भारत के छह जीनोम में मौजूद था। 
  • महाराष्ट्र सरकार ने विभिन्न जिलों से जीनोम अनुक्रमण के लिए पर्याप्त संख्या में नमूने भेजे हैं ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि Sars-CoV-2 वायरस में कोई नया बदलाव हुआ है या नहीं ? इसकी रिपोर्ट मंगलवार (15 जून) तक आने की उम्मीद है।
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