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वह महामारी जिसकी चपेट में अमेरिका के एचआईवी, हेपेटाइटिस और स्तन कैंसर के कुल मरीजों से ज्यादा लोग

Sat, 18 Apr 2020 07:28 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 18 Apr 2020 07:28 AM IST
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सार
पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के संकट से जूझ रही है। दिन ब दिन कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं साथ ही इसकी वजह से मरने वालों का आंकड़ा भी ऊपर जा रहा है। ऐसे वक्त में एक और बीमारी है जो अंदर ही अंदर पैर पसार रही है और इस बीमारी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण नहीं दिखते या दिखते भी हैं तो तब जब यह खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका होता है। यह बीमारी है 'लाइम डिजीज' या 'लाइम रोग'।
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know everything about Lyme disease caused by the bacteria Borrelia burgdorferi is spread by infected ticks and its situation in America
संक्रमित टिक्स के काटने से होती है लाइम डिजीज - फोटो : विकीपीडिया

विस्तार

हालांकि, भारत में इस बीमारी का प्रसार अभी बहुत ही कम है, कुछ रिसर्च जर्नल्स के मुताबिक भारत के पहाड़ी इलाकों में लाइम के मामले सामने आए हैं और पड़ोसी देश नेपाल में भी एक मामले की जानकारी मिलती है।अमेरिका में तो यह बीमारी बड़े पैमाने पर फैल चुकी है।



यह एक संक्रामक रोग है जो टिक्स (एक तरह का कीड़ा) के काटने से होता है। ये टिक्स एक बैक्टीरिया बोरेलिया बर्गडोरफेरी ( Borrelia Burgdorferi ) लेकर चलते हैं और इंसानों के संपर्क में आने पर जब ये टिक्स काटते हैं तो यह बैक्टीरिया इंसान के शरीर में पहुंच जाता है। शुरुआत में त्वचा पर लाल घेरा या चकत्ता हो जाता है।


अब इसमें किसी तरह की जलन, खुजली, सूजन या दर्द की दिक्कत नहीं होती है। शुरुआती दौर में इसे एंटीबायोटिक्स से ठीक किया जा सकता है लेकिन, आम तौर पर लोगों का इस पर कोई ध्यान नहीं जाता है और अगर जाता भी है तो लोग इसे सामान्य इंफेक्शन मानकर इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह बैक्टीरिया अंदर ही अंदर फैलता रहता है। 

लक्षण ही हैं सबसे बड़ी समस्या

जब इसके लक्षण सामने आते हैं तो वह भी सामान्य सर्दी-खांसी और बुखार होते हैं। लोगों को फ्लू, खांसी सिर और जोड़ों में दर्द की समस्या होती है। इसे भी मौसमी फ्लू की तरह मानकर लोग उसी तरह से इलाज कराते रहते हैं। गंभीर स्थिति में पहुंचने पर इसके असली लक्षण सामने आते हैं जिसमें शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं, जबड़े का खुलना या बंद होना, चेहरे के एक हिस्से का काम करना बंद हो सकता है।

चेहरे के भावों से लेकर आंखों के खुलना, पलक झपकना और होठों का हिलना-डुलना भी प्रभावित हो सकता है। जोड़ों का बहुत दर्द होता है। कमजोरी होती है, कई बार दिल और लिवर भी इसकी चपेट में आ जाते हैं

अमेरिका में इसकी स्थिति भयावह

अलजजीरा में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सारा काट्ज का परिवार इस बीमारी का शिकार रहा है। वह कहती हैं, लाइम डिजीज कोरोना वायरस की तरह एक वैश्विक महामारी बन चुका है। अमेरिका में यह सबसे सामान्य वेक्टर जनित बीमारी है। हर साल राज्य स्वास्थ्य विभागों की ओर से अमेरिका के डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन केंद्र में लगभग 30 हजार मामले रिपोर्ट किए जाते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि असल आंकड़े इससे 10 गुना ज्यादा हो सकते हैं। कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि लाइम डिजीज से ग्रसित अमेरिकी नागरिकों की संख्या स्तन कैंसर, एचआईवी और हेपेटाइटिस सी से ग्रसित नागरिकों को मिलाकर भी उनसे ज्यादा है।  

दिल-दिमाग को भी कर सकता है प्रभावित

निश्चित तौर पर कोरोना वायरस से इस बीमारी की तुलना नहीं की जा सकती । कोरोना वायरस एक बेहद संक्रामक और इंसान से इंसान में फैलने वाली बीमारी है जबकि लाइम संक्रमित टिक्स के काटने की वजह से ही होता है। वहीं, कोरोना वायरस के लक्षण सीमित हैं और लगभग सबमें समान हैं जबकि लाइम के लक्षण एक इंसान से दूसरे इंसान में अलग-अलग होते हैं। सबसे खतरनाक वस्तु यह है कि कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है जबकि लाइम अपनी अंतिम स्टेज में व्यक्ति के दिल या दिमाग को प्रभावित करता है। 

बचाव के तरीके

लाइम डिजीज से बचने का सबसे आसान तरीका है कि उन क्षेत्रों में जाने से बचें जहां यह एक आम बीमारी बन चुकी है या जहां इसे फैलाने वाले टिक्स पाए जाते हैं। अगर किसी कारणवश आपको ऐसी जगह पर जाना ही पड़े या आप रहते ही ऐसे क्षेत्र में हैं, जहां ये टिक्स पाई जाती हैं तो घने पेड़-पौधों वाली जगह में जाने से पहले पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और हमेशा सतर्क रहें। ऐसे स्प्रे का इस्तेमाल करें जिनसे ये टिक्स मारे जा सकते हों साथ ही अगर त्वता पर लाल घेरे दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लें और एंटीबायोटिक्स का सेवन करें।

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