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घुप्प अंधेरे में अंधाधुंध फायरिंग, चीनी ग्रेनेड से हमला, जानिए अमरनाथ यात्रा पर हमले का पूरा सच

Wed, 12 Jul 2017 08:44 AM IST
amarujala.com- Written by: ऋतुराज त्रिपाठी
amarujala.com- Written by: ऋतुराज त्रिपाठी Updated Wed, 12 Jul 2017 08:44 AM IST
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Know all about Amarnath Pilgrims attacks and its developments
terror attack

17 साल पुरानी बात है। साल 2000 में पहलगाम बेस कैंप पर अातंकियों ने हमला किया था जिसमें 30 लोगों की मौत हुई थी और 60 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

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उस समय केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार थी। अभी पुराने जख्म भरे भी नहीं थे कि आतंकियों ने फिर से नए जख्म दे दिए। सोमवार रात गुजरात से आई एक बस को निशाना बनाकर आतंकियों ने फायरिंग की जिसमें 6 महिलाओं समेत 7 लोगों की मौत हो गई और 32 लोग घायल हो गए।

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10 जुलाई की रात आतंकी क्यों हो गए थे आउट ऑफ कंट्रोल!  

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बस

सोमवार 10 जुलाई, रात करीब 8 बजकर 20 मिनट पर गुजरात से जम्मू जा रही बस पर अनंतनाग में आतंकियों ने हमला कर दिया था। इस भीषण आतंकी हमले में 6 महिलाओं समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक आतंकियों ने चीन के बने ग्रेनेड्स से हमला किया था।

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक आतंकियों ने पहले बोटेंगू में पुलिस के बुलेटप्रूफ बंकर पर हमला किया जिसमे कोई हताहत नहीं हुआ। इसके बाद आतंकियों ने खानबल के पास पुलिस टुकड़ी पर गोलियां चलाईं। लेकिन पुलिस की जवाबी कार्रवाई से डरकर आतंकी भाग गए और बौखलाकर बस में निहत्थे अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर दिया। 

आतंकी हमले का आंखों देखा पूरा हाल

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BUS DRIVER

आतंकी हमले के समय दुर्घटनाग्रस्त बस में मौजूद रहे टूर ऑपरेटर योगेश प्रजापति ने मीडिया को बताया कि टायर पंचर होने की वजह से उनके वाहन में देरी हुई थी। योगेश ने बताया कि उन्होंने दो घंटे से ज्यादा इंतजार किया था। योगेश ने यह भी बताया कि आतंकियों ने बस के सामने से गोलियां दागीं।

जबकि 60 अमरनाथ यात्री बस के अंदर बैठे थे। दुर्घटनाग्रस्त बस की सुरक्षा के लिए वहां कोई भी मौजूद नहीं था। बस पर गुजरात का नंबर प्लेट लगी थी। 

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किसने किया अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला

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अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का नाम सामने आया है। हमले के बाद जहां एक ओर सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं तो वहीं घाटी में सुरक्षाबलों को और मुस्तैद कर दिया गया है। इस बीच जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अस्पताल में आतंकी हमले में घायल लोगों से मिलने पहुंचीं।

कश्मीर के आईजी मुनीर खान ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि इस हमले के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा  का हाथ है। उन्होंने ये भी बताया कि इस हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तानी आतंकी इस्माइल है।

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी मूल के लश्कर कमांडर इस्माइल ने अपने एक पाकिस्तानी साथी तथा दो स्थानीय आतंकियों के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया। हालांकि, लश्कर ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इससे पहले हमले में हिजबुल का नाम सामने आ रहा था। 

आतंकी हमले पर किसने क्या कहा?

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पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

पीएम मोदी ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की खबर से बहुत दुख हुआ है। भारत इस तरह के कायर हमलों के सामने कभी नहीं झुकेगा। वहीं जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षा का भरोसा देते हुए कहा कि अमरनाथ यात्रा नहीं रोकी जाएगी, अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी हमले की निंदा की और फोन पर सीएम महबूबा और राज्यपाल एनएन वोहरा से बात की। आतंकियों पर निशाना साधते हुए यूपी सीएम योगी ने कहा कि हम लोग इस घटना की पुरजोर निंदा करते हैं, हमारे पीएम मोदी इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में हम सबको अपना योगदान देकर इसे सफल बनाना चाह‌िए। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बड़े अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें आईबी डायरेक्टर, एनएसए अजीत डोभाल, रॉ चीफ और गृहमंत्रालय के कई बड़े अफसर उनसे मिलने पहुंचे।

आरएसएस के एमजी वैद्या ने कहा कि 'जब कश्मीर में कश्मीरी पंडित नहीं रह सकते तो वहां हिंदुओं का जीवन खतरे में रहना कोई आश्चर्य की बात नहीं। केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि यह हमला मानवता के खिलाफ है, इसकी कड़ी निंदा करता हूं, जम्मू-कश्मीर सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

वहीं कांग्रेस के आर एस सुरजेवाला ने कहा कि 'इस हमले के बाद पता चलता है कि यह मामला सुरक्षा से जुड़ा है। यह सुरक्षा बलों और सरकार के बीच तालमेल की कमी को दर्शाता है। अगर अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले का अलर्ट जारी कर दिया गया था तो पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

गुजरात के पीड़ित परिवारों को मुआवजा

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विजय रुपानी

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले में मारे गए गुजरात के पीड़ित परिवारों के लिए राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने मुआवजे की घोषणा की है। विजय रूपानी ने घायलों से मिलकर उनका हाल चाल जाना। और बस ड्राइवर के लिए वीरता पुरस्कार की सिफारिश करने की बात कही। 

सरकार ने हमले में मारे गए लोगों के लिए 10 लाख रुपए और घायलों को 2 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। हमले में घायल हुए या‌त्रियों और मारे गए श्रद्धालुओं के शवों को वायुसेना के विशेष विमान से सूरत पहुंचाया गया है।

बस ड्राइवर ने बचाई यात्रियों की जान

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BUS DRIVER

आतंकी हमले के बीच बस ड्राइवर सलीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर बस को तेज गति से भगाया और सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।सलीम ने  बताया कि उसने लेटकर बस चलाई जिससे वह आतंकियों की गोली से बच जाये और यात्रियों की जान बचा सके। बस ड्राइवर के भाई जावेद ने बताया कि सलीम ने उन्हें सुबह 9.30 बजे फोन करके फायरिंग के बारे में बताया। सलीम ने अपने भाई से कहा कि जब आतंकी फायरिंग कर रहे थे तब उसने गाड़ी को तेज दौड़ाया जिससे बाकी के यात्रियों की जान बच सके। बस ड्राइवर के भाई जावेद ने यह भी कहा कि सलीम 7 लोगों की जान बचाने में असफल रहा लेकिन उसने 50 से ज्यादा जिंदगियों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। उसे अपने भाई पर गर्व है। 

17 साल पहले बाजपेयी सरकार में भी हुआ था हमला

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अटल बिहारी वाजपेयी

2 अगस्त, 2000 को चरमपंथियों ने पहलगाम के बेस कैंप में पर हमला किया था।  बेस कैंप में 32 लोग मारे गए थे। जिसमें 21 अमरनाथ यात्री थे। इसके बाद अगले साल 20 जुलाई, 2001 को अमरनाथ गुफा के रास्ते की सबसे ऊंचाई पर स्थित पड़ाव शेषनाग पर हमला हुआ। जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। जिनमें तीन महिलाएं और दो पुलिस अधिकारी शामिल थे।

इन हमलों को देखते हुए 2002 में अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल के 15 हज़ार जवानों को तैनात किया गया। बावजूद इसके, 6 अगस्त, 2002 को चरमपंथियों ने पहलगाम में हमला किया जिसमें नौ लोगों की मौत हुई थी। और 30 अन्य लोग घायल हो गए थे।2 अगस्त, 2000 को चरमपंथियों ने पहलगाम के बेस कैंप में पर हमला किया था।  बेस कैंप में 32 लोग मारे गए थे। जिसमें 21 अमरनाथ यात्री थे। इसके बाद अगले साल 20 जुलाई, 2001 को अमरनाथ गुफा के रास्ते की सबसे ऊंचाई पर स्थित पड़ाव शेषनाग पर हमला हुआ। जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। जिनमें तीन महिलाएं और दो पुलिस अधिकारी शामिल थे। 

​इन हमलों को देखते हुए 2002 में अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल के 15 हज़ार जवानों को तैनात किया गया। बावजूद इसके, 6 अगस्त, 2002 को चरमपंथियों ने पहलगाम में हमला किया जिसमें नौ लोगों की मौत हुई थी। और 30 अन्य लोग घायल हो गए थे।

आतंकी हमलों के बावजूद आतंक पर भारी आस्‍था

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amarnath yatra - फोटो : file photo

कश्मीर के अनंतनाग में सोमवार को हुए दो आतंकी हमलों के बाद अमरनाथ यात्रा के लिए मंगलवार को तीर्थयात्रियों का एक और जत्था बाबा श्री अमरनाथ के दर्शन के लिए रवाना हुआ है।श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।अमरनाथ यात्रा दरअसल हिंदुओं के लिए पवित्र अमरनाथ गुफा तक की यात्रा है। यह गुफा समुद्र तल से 3,888 मीटर यानी 12,756 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है।

यहां तक केवल पैदल या खच्चर के ज़रिए ही पहुंचा जा सकता है। दक्षिण कश्मीर के पहलगाम से ये दूरी क़रीब 46 किलोमीटर की है। जिसे पैदल पूरा करना होता है. इसमें अमूमन पांच दिन तक का वक्त लगता है। एक दूसरा रास्ता सोनमर्ग के बालटाल से है।जिससे अमरनाथ गुफा की दूरी महज 16 किलोमीटर है। लेकिन मुश्किल चढ़ाई होने के ये रास्ता बेहद कठिन माना जाता है।

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