अगस्ता वेस्टलैंड घूसकांड: 2 विदेशी कंपनी, 3 दलाल और गांधी परिवार, जानें क्या है पूरा मामला
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अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल को भारत ने यूएई से गिरफ्त में लिया है। उसे दिल्ली के कोर्ट में पेश करने के बाद पांच दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया। मिशेल मूल रूप से ब्रिटेन का रहने वाला है। यह मुद्दा साल 2012 के बाद से चर्चा में बना हुआ है और अब भारत में 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले दोबारा चर्चा में आ गया है। इस मुद्दे का इस्तेमाल चुनावों के दौरान भी खूब किया जाएगा। मामले से गांधी परिवार का भी नाम जोड़ा जा रहा है। जिससे पार्टी के वोट बैंक पर प्रभाव पड़ना लाजमी है। चलिए आपको बताते हैं इस पूरे मामले के बारे में-
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अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल को भारत ने यूएई से गिरफ्त में लिया है। उसे दिल्ली के कोर्ट में पेश करने के बाद पांच दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया। मिशेल मूल रूप से ब्रिटेन का रहने वाला है। यह मुद्दा साल 2012 के बाद से चर्चा में बना हुआ है और अब भारत में 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले दोबारा चर्चा में आ गया है। इस मुद्दे का इस्तेमाल चुनावों के दौरान भी खूब किया जाएगा। मामले से गांधी परिवार का भी नाम जोड़ा जा रहा है। जिससे पार्टी के वोट बैंक पर प्रभाव पड़ना लाजमी है। चलिए आपको बताते हैं इस पूरे मामले के बारे में-
साल 1999 में शुरू हुआ मामला
इस मामले की शुरुआत साल 1999 में हुई थी। उस वक्त देश में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। तब एमआई-8 हेलिकॉप्टर के पुराने हो जाने पर भारत की वायु सेना ने वीवीआई लोगों के लिए नए हेलिकॉप्टर की जरूरत महसूस की। हेलिकॉप्टर को खरीदने से पहले कुछ शर्तें भी रखी गईं कि हेलिकॉप्टर कैसा होना चाहिए। उसमें क्या खासियतें होनी चाहिए।
तब कहा गया कि हेलिकॉप्टर ऐसे होने चाहिए जो 6 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकें। लेकिन उस वक्त तत्कालीन एयर मार्शल चीफ ने यह डील आगे नहीं बढ़ने दी थी क्योंकि डील के लिए केवल एक ही कंपनी मौजूद थी। इस प्रस्ताव के बाद एक और प्रस्ताव रखा गया। प्रधानमंत्री को सुरक्षा देने वाली एजेंसी ने कहा कि हेलिकॉप्टर की सीलिंग इतनी ऊंची होनी चाहिए कि उसके अंदर कोई व्यक्ति खड़ा हो सके। इन शर्तों को देखते हुए तीन कंपनियां आगे आईं, जिनमें से एक अगस्ता वेस्टेलैंड भी थी।
साल 2010 में हुआ सौदा
साल 2012 में इटली में घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तारी
भारत को साल 2012 में तीन हेलिकॉप्टर मिल गए। अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी का हेडक्वार्टर ब्रिटेन में है जबकि उसकी पैरेंट कंपनी फिनमैकेनिका इटली की है। उसी दौरान इटली में जांच एजेंसियां ने आरोप लगाया कि इस सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। वहां की स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सौदे में से 10 फीसदी बिचौलियों के बीच बंटा है। कुछ ही महीनों बाद इटली की जांच एजेंसियों ने बिचौलिए गुइदो हाश्के को गिरफ्तार किया। उस पर आरोप लगाया गया कि उसने भारत से सौदा कराने के लिए 5.1 करोड़ यूरो यानी करीब 357 करोड़ रुपये लिए थे।
साल 2013 में एक और गिरफ्तारी
इटली की पुलिस ने साल 2013 में फिनमैकेनिका के पूर्व चेयरमैन ग्यूसेप ओरसी, अगस्ता वेस्टलैंड के सीईओ ब्रूनो स्पैग्नोलिन को गिरफ्तार किया। इसके अलावा हाश्के सहित कुछ अन्य बिचौलियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया। इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद भारत में भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया। जिसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए और सौदा रद्द करने के आदेश दिए। बता दें जनवरी 2018 में इटली के कोर्ट ने दोनों को आरोपों से बरी कर दिया है।
भारत में सीबीआई जांच के आदेश के करीब दो सप्ताह के बाद 11 लोगों की जांच शुरू हुई। इन लोगों में पूर्व एयर चीफ मार्शल शशींद्र पाल त्यागी का नाम भी सामने आया। त्यागी का नाम इटली की पुलिस एजेंसी और पुलिस ने कई बार भ्रष्टाचार के आरोपी लोगों से जोड़ा था।
अगस्ता वेस्टलैंड के लिए आसान किया था सौदा
साल 2004 में वाजपेयी सरकार के जाने के बाद सत्ता यूपीए सरकार के हाथों में आ गई। तब शशींद्र पाल त्यागी एयर चीफ मार्शल थे। मार्च 2005 में हेलिकॉप्टर के ऊंचा उड़ने की शर्त में भी बदलाव किया गया। पहले ये शर्त 6 हजार मीटर थी, जिसे बाद में 4500 मीटर कर दिया गया।
दो कंपनियां को शॉर्टलिस्ट किया गया
इस सौदे को कई कंपनियां करना चाहती थीं लेकिन आखिर में केवल दो कंपनियों को ही चुना गया। एक कंपनी तो अगस्ता वेस्टलैंड ही थी जबकि दूसरी अमेरिका की कंपनी साइकोरस्की थी। इन हेलिकॉप्टर का ट्रायल अमेरिका और ब्रिटेन में हुआ। जो कि नियमों के खिलाफ था। इनका परीक्षण भारत में ही किया जाना चाहिए था।
वहीं हेलिकॉप्टर की संख्या को 8 से 12 करने के पीछे भी त्यागी का ही हाथ था। उन्होंने कहा था कि 12 हेलिकॉप्टर की आवश्यकता है। बताया जाता है कि इन सभी शर्तों पर अमेरिकी कंपनी साइकोरस्की खरी उतरी थी लेकिन बावजूद इसके साल 2007 में त्यागी के रिटायर होने तक सौदा अगस्ता के साथ लगभग पक्का हो चुका था। इसके करीब तीन साल बाद यानी साल 2010 में अगस्ता से सौदा किया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अगस्ता ऐसे हेलिकॉप्टर बनाती है जो 4500 मीटर से ऊंचे नहीं उड़ सकते। इसी वजह से पहले की ऊंचाई वाली शर्त को बदलकर कम किया गया।
सीबीआई ने त्यागी पर लगाया घूस लेने का आरोप
सीबीआई के अनुसार त्यागी ने दलाल के जरिए कंपनी से घूस लेकर सौदे में बदलाव किए थे। साल 2014 में प्रवर्तन निदेशायल ने चंडीगढ़ में फर्जी कंपनी चला रहे वकील गौतम खेतान को गिरफ्तार किया। उसपर घूस के पैसे कंपनी के खातों में डालने के आरोप लगे। बाद में पता चला कि खेतान के तार त्यागी से भी जुड़े थे। त्यागी पर आरोप लगा कि उन्हें दलाल हाश्के ने कई लोगों के माध्यम से घूस दी। जिनमें खेतान भी शामिल है। सितंबर में सीबीआई ने चार्टशीट दाखिल की। जिसके बाद दिसंबर में त्यागी को गिरफ्तार किया गया लेकिन उन्हें बाद में जमानत मिल गई।
गांधी परिवार कैसे जुड़ा?
हालांकि मिशेल लगातार कह रहा है कि सीबीआई ने उस पर पूछताछ के दौरान सोनिया का नाम लेने का दबाव बनाया था। पूर्व एयर चीफ मार्शल त्यागी भी सीबीआई द्वारा निर्दोषों के नाम लेने के दबाव की बात कह रहे हैं।
सौदे में ये बिचौलिए शामिल
सौदे में शामिल पहला बिचौलिया गुइदो राल्फ हाश्के है। वह इटनी का नागरिक है जिसका जन्म अमेरिका में हुआ है। वह स्विट्जरलैंड में रह रहा है। कंपनी ने सौदे में हाश्के की मदद ली थी। साल 2012 में इटली पुलिस ने उसे स्विट्जरलैंड से गिरफ्तार किया। भारत में हाश्के उस वक्त चर्चा में आया जब उसने मिशेल को पत्र लिखा था जिसमें संकेतों को जरिए कई भारतीय राजनेताओं का नाम शामिल था।
दूसरा विचौलिया कार्लो गेरोसा है। अक्तूबर 2017 में भारत के इंटरपोल नोटिस को बाद उसे इटली की एक पुलिस ने गिरफ्तार किया। लेकिन बाद में छोड़ दिया गया और भारत को सौंपने से भी इनकार कर दिया गया। इसपर सौदे की शर्तों में हेरफेर का आरोप है।
तीसरा बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल है। जो ब्रिटिश नागरिक है। उसपर आरोप है कि उसने कंपनी के कहने पर भारत सरकार और वायु सेना अधिकारियों को सौदे के लिए मनाया है। इसके बदले में उसने 240 करोड़ और 225 करोड़ की घूंस बांटने के लिए दो करार किए हैं। वह सौदे के दौरान 25 बार भारत आया था। वह दुबई स्थित अपनी कंपनी की मदद से भारत पैसा भेजता था। फरवरी 2017 में इंटरपोल नोटिस भेजने के बाद उसे यूएई में हिरासत में लिया गया और सितंबर 2018 में दुबई की अदालत ने उसे भारत में प्रत्यर्पित करने की इजाजत दे दी।
ऑपरेशन यूनिकॉर्न
यूपीए सरकार ने उठाए कदम
यूपीए सरकार ने सीबीआई को जांच के आदेश देने के बाद ये सौदा रद्द कर दिया था। जो हेलिकप्टर मिले थे उन्हें जब्त कर लिया गया। अगस्ता को बैंक गारंटी के तौर पर 2062 करोड़ रुपये दिए गए थे, यह वापस ले लिए गए। ये पैसे 1620 करोड़ रुपये के भुगतान के बदले बैंक गारंटी के तौर पर दिए गए थे। इसके अलावा यूपीए सरकार के कार्यकाल में शर्तों का उल्लंघन करने के लिए 3 हजार करोड़ रुपये का दावा भी किया गया।
कई अफसर और उद्योगपतियों पर खतरा
मिशेल के भारत आने के बाद से बहुत से राजनेता और अफसर डरे हुए हैं। इस बात को ब्रिटेन में रह रहे भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या से भी जोड़ा जा रहा है। माल्या ने मिशेल के भारत आने के बाद अपना सारा ऋण चुकाने की बात कही है। मिशेल को सजा दिलाना मुश्किल हो सकता है। इसका कारण यह है कि अगर दलाली का पैसा विदेशी कंपनी का है तो उसपर भारत में अपराध साबित करना मुश्किल है।
हिरासत के बाद अगर उसे विदेश जाने की अनुमति मिल गई तो कोई गारंटी नहीं है कि वह वापस भारत आए। वहीं यूथ कांग्रेस के लीगल सेल से जुड़े अल्जो के. जोसेफ स्पेशल सीबीआई कोर्ट में मिशेल के वकील बनकर पेश हुए थे, जिसके बाद विवाद बढ़ने पर उन्हें कांग्रेस ने पार्टी से निकाल दिया। अब मिशेल को कानूनी मदद देने के लिए उसकी वकील रोजमैरी पातरेजी ने भारतीय वीजा के लिए आवेदन किया है। साथ ही ब्रिटेन के उच्चायोग ने भी भारत सरकार को लेटर लिखकर अपील की है कि उसे उनके राजनयिक से मिलने दिया जाए।
कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ेंगी
जहां कांग्रेस सरकार भाजपा को राफेल सौदे पर घेर रही है वहीं अब भाजपा सरकार कांग्रेस को अगस्ता वेस्टलैंड सौदा मामले में घेर सकती है। माना जा रहा है कि ये मामला 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों तक चलता रहेगा।