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जानें, कौन हैं योगी का किला गिराने वाले 29 साल के प्रवीण

Thu, 15 Mar 2018 12:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 15 Mar 2018 12:21 PM IST
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know about 29 year old praveen nishad who dropped yogi's fort in gorakhpur elections

बसपा और सपा गठबंधन की जीत के नायक रहे 29 साल के प्रवीण निषाद ने पहली बार सपा के टिकट से चुनाव लड़ा। प्रवीण ने गोरखपुर सीट से पिछले 29 साल से जारी भाजपा के वर्चस्व को तोड़ा। प्रवीण ने एनएनआईटी ग्रेटर नोएडा से बीटेक (मैकेनिकल ब्रांच) की है। नौकरी के दौरान ही उन्होंने सिक्किम मनीपाल यूनिवर्सिटी से पत्राचार के माध्यम से एमबीए किया। प्रवीण को राजनीति विरासत में मिली है। इनके पिता डॉ. संजय निषाद राष्ट्रीय निषाद पार्टी के संस्थापक थे।

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सपा प्रत्याशी की मां और भाई ने खराब किए 5677 वोट

सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद के जीत का अंतर और बढ़ सकता था अगर उनकी मां मालती देवी और छोटे भाई श्रवण कुमार निषाद प्रत्याशी नहीं होते। मालती देवी को 2424 और श्रवण निषाद को 3253 वोट मिले हैं। दोनों का कुल योग 5677 रहा। सपा के कुछ नेताओं ने दबी जुबान यह स्वीकार किया कि निषाद होने की वजह से यह वोट उन्हें मिल गए। अगर दोनों प्रत्याशी मैदान में नहीं होते तो ये वोट भी प्रवीण को ही जाते। 
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जातीय लामबंदी ने तैयार की जीत की नींव

गोरखपुर में निषाद के अलावा दलित, यादव और मुस्लिम मतों की तादाद सबसे ज्यादा है। इनके साथ ही कुछ अन्य पिछड़ी जातियों का बड़ा हिस्सा सपा प्रत्याशी के पक्ष में लामबंद होता दिखाई दे रहा था। इसी तरह फूलपुर में पटेल के बाद मुस्लिम, यादव, दलित व अन्य पिछड़े वोटों की अच्छी संख्या है। सपा ने इन्हें जोड़ने पर पूरा ध्यान दिया। सपा का पूरा चुनाव अभियान भी दलितों, पिछड़ों के इर्द-गिर्द सिमटा रहा। 
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अखिलेश ने खुद कहा, उनके (भाजपा के) जातिवाद को सोशल इंजीनियरिंग कहा जाता था। अब हम भी पिछड़े हो गए हैं। हम प्रोगेसिव पिछड़े हैं। पहले वे सोशल इंजीनियरिंग करते थे, अब हम कर रहे हैं। चुनावी नतीजों ने उनकी सोशल इंजीनियरिंग पर मुहर लगा दी। सपा ने जाति के साथ ही उप जाति और लोकल पिछड़ा बनाम बाहरी पिछड़ा तक के सामाजिक अंतर्विरोधों को भुनाया। गौरतलब है कि फूलपुर में सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल स्थानीय और भाजपा के कौशलेन्द्र सिंह पटेल बाहरी उम्मीदवार थे। 

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