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किसान आंदोलन: कृषि कानून विवाद पर चर्चा के लिए अकाली दल ने कार्यस्थगन प्रस्ताव का दिया नोटिस
Mon, 19 Jul 2021 04:56 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 19 Jul 2021 04:56 AM IST
सार
- पूर्व केंद्रीय मंत्री और अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा सहित देश के कई हिस्सों के किसान महीनों से आंदोलनरत हैं। तीनों कानून किसानों के खिलाफ हैं। संसद तभी चलेगा जब इस विवाद का सकारात्मक हल निकलेगा।
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हरसिमरत कौर बादल
- फोटो : Facebook
विस्तार
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन तीन कृषि कानूनों पर हंगामा हो सकता है। अकाली दल ने लोकसभा में इस मामले में चर्चा कराने के लिए कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
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इन कानूनों के खिलाफ कई किसान संगठन महीनों से आंदोलनरत हैं। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके सहित कई दलों ने इस मुद्दे पर संसद में आक्रामक रुख अख्तियार करने के संकेत दिए हैं।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा सहित देश के कई हिस्सों के किसान महीनों से आंदोलनरत हैं। तीनों कानून किसानों के खिलाफ हैं। संसद तभी चलेगा जब इस विवाद का सकारात्मक हल निकलेगा।
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कौर ने कहा कि अकाली दल की ओर से सोमवार को कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे पर चर्चा कराने का नोटिस दिया गया है। हम चाहते हैं कि संसद में पहले इस मुद्दे पर चर्चा हो, पहले इसका समाधान हो, फिर कोई दूसरा काम हो।
सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी अकाली दल, कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके सहित कई दलों ने पहले किसान आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग की है। विपक्ष ने सरकार पर किसानों के प्रति अमानवीय रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया है।
बता दें कि संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा। सत्र के दौरान कोरोना की दूसरी लहर, महंगाई और चीन से जुड़े मामले में हंगामे की बारिश तय है। इसके अलावा दो अध्यादेशों पर सरकार और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच सकती है। विभिन्न मुद्दों पर जहां विपक्ष ने सरकार पर एकजुट हमला बोलने की रणनीति बनाई है, वहीं सरकार ने विपक्ष के वार के जवाब में पलटवार की रणनीति तैयार की है।
सत्र के दौरान सरकार की योजना 14 नए बिल पेश करने और तीन अध्यादेशों पर संसद की मंजूरी हासिल करने की है। इन तीन अध्यादेशों में से दो पर पहले से ही विवाद है। सरकार आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश के जरिए सेना के लिए हथियार, गोलाबारूद, वर्दी बनाने वाले आयुध कारखानों में हड़ताल को गैरकानूनी घोषित कर दिया है।
इसमें हड़ताल करने वालों के लिए दो साल की सजा का भी प्रावधान है। कई मजदूर संघों के साथ संघ का अनुषांगिक संगठन भारतीय मजदूर संघ ने भी इसका तीखा विरोध किया है। अब सरकार इस सत्र में इस अध्यादेश को कानूनी जामा पहनाने की तैयारी में है।