{"_id":"6158b3c58ebc3e0de45dd443","slug":"kisan-andolan-300-days-of-protest-by-congress-mps-at-jantar-mantar-against-agricultural-laws-completed","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान आंदोलन: कांग्रेस सांसदों के जंतर-मंतर पर धरने के 300 दिन पूरे, बोले- असहमति की आवाज दबाती है भाजपा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
किसान आंदोलन: कांग्रेस सांसदों के जंतर-मंतर पर धरने के 300 दिन पूरे, बोले- असहमति की आवाज दबाती है भाजपा
Sun, 03 Oct 2021 01:02 AM IST
Kuldeep Singh
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 03 Oct 2021 01:02 AM IST
सार
राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने 300वें दिन विरोध करने वाले सांसदों से मुलाकात की और जसबीर सिंह गिल, रवनीत बिट्टू, गुरजीत औजला, कुलबीर सिंह, परमिंदर पिंकी के साथ विरोध स्थल पर मौजूद रहे। प्रदर्शनकारी सांसदों ने कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग दोहराई है।
विज्ञापन
farmers protest, kisan sansad, jantar mantar
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब के कांग्रेस सांसदों द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन ने शनिवार को 300 दिन पूरे कर लिए हैं। राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने 300वें दिन विरोध करने वाले सांसदों से मुलाकात की और जसबीर सिंह गिल, रवनीत बिट्टू, गुरजीत औजला, कुलबीर सिंह, परमिंदर पिंकी के साथ विरोध स्थल पर मिले। प्रदर्शनकारी सांसदों ने कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की।
विज्ञापन
एक बयान में, प्रदर्शनकारी सांसद जसबीर सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सबसे आत्मकेंद्रित पार्टी है जो वोट के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को डराने और असहमति की आवाज को दबाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी सांसदों ने कहा कि उनमें से कम से कम एक सांसद हमेशा धरना स्थल पर मौजूद रहता है।
विज्ञापन
इस साल की 22 जनवरी को, गतिरोध को तोड़ने और किसानों के विरोध को समाप्त करने के लिए सरकार और किसान संघों के बीच अब तक 11 दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा 26 जनवरी को एक ट्रैक्टर रैली के दौरान व्यापक हिंसा के बाद से बातचीत फिर से शुरू नहीं हुई है।
विज्ञापन
पिछले साल सितंबर में तीन कानूनों को संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसमें, किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, 2020 का किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता, और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 शामिल हैं।
किसान समूहों ने आरोप लगाया है कि ये कृषि कानून मंडी और एमएसपी सिस्टम को समाप्त कर देंगे और किसानों को बड़े कॉर्पोरेट्स की दया पर छोड़ देंगे, यहां तक कि सरकार ने इन आशंकाओं को गलत बताते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि इन कदमों से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।