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Kiren Rijiju : किरेन रिजिजू ने गिनाईं पहले प्रधानमंत्री नेहरू की पांच बड़ी गलतियां, कहा- पीएम मोदी ने सुधारीं

Fri, 28 Oct 2022 06:06 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 28 Oct 2022 06:06 AM IST
सार

भाजपा के कई नेताओं ने भी हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि अगर नेहरू यह गलतियां नहीं करते तो न केवल कश्मीर बल्कि भारत का इतिहास कुछ और होता। केंद्रीय शहरी मामलात व पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन गलतियों को हिमालय जितनी बड़ी करार दिया।

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Kiren Rijiju: counted Five big mistakes of first Prime Minister Jawaharlal Nehru, PM Narendra Modi corrected
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू - फोटो : ANI

विस्तार

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर भाजपा ने कश्मीर के भारत विलय में बाधा बनने और निजी एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा, कश्मीर के महाराजा हरि सिंह आजादी से पहले ही अपनी रियासत का भारत में विलय चाहते थे, लेकिन नेहरू ने ऐसा नहीं होने दिया।

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केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और पं. नेहरू पर यह ताजा हमला बोला। नेहरू की पांच गलतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, सात दशक तक देश इनकी वजह से जूझता रहा। रिजीजू ने कहा, इतिहास ने साल 2019 में नया मोड़ लिया, ‘भारत प्रथम’ यह देश को आगे बढ़ाने का एकमात्र सिद्धांत बना। 
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इसी के तहत पीएम मोदी ने नेहरू की इन गलतियों को सुधारते हुए अनुच्छेद 370 खत्म किया, भारत के सभी क्षेत्रों का एकीकरण पूर्ण हुआ। कश्मीर के भारत में विलय के लिए 27 अक्टूबर 1947 को हुए समझौते के 75 वर्ष पूर्ण होने पर रिजिजू ने कहा, “सात दशक से यह ऐतिहासिक झूठ फैलाया गया है कि कश्मीर उन रियासतों में था जिन्हें भारत से जुड़ने में समस्या थी। 
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560 के करीब रियासतों में केवल हैदराबाद और जूनागढ़ ने कुछ समस्या पैदा की थी। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय को लेकर टालमटोल भरा रवैया नहीं रखा। बल्कि जुलाई 1947 में खुद ही भारत में विलय के लिए देश के नेताओं से संपर्क किया था। 24 जुलाई 1952 को नेहरू ने लोकसभा में यह तथ्य स्वीकार किया है। जुलाई 47 में ही नेहरू ने हरि सिंह और नेशनल कॉन्फ्रेंस को सलाह भी दी कि कश्मीर “विशेष मामला” है इसलिए जल्दबाजी ठीक नहीं।

जब विलय हुआ तो इसे भी नेहरू ने अस्थाई घोषित करवा दिया

  • यूएनओ के पास अनुच्छेद 35 के बजाय अनुच्छेद 51 के तहत कश्मीरी मामला रखा। अनुच्छेद 35 विवादित जमीन के लिए बना था। जबकि अनुच्छेद 51 देश की जमीन पर गैर कानूनी विदेशी कब्जे को लेकर था। 
  • 27 अक्तूबर 1947 को विलय पत्र पर हरि सिंह हस्ताक्षर कर चुका था, नेहरू को कश्मीर का मामला अनुच्छेद 51 के तहत उठाना चाहिए था।

ये गलतियां भी बताईं
यह भ्रांति फैलने दी गई कि यूएन का जनमत संग्रह का आदेश भारत रोक रहा है। जबकि जनमत संग्रह की पहली शर्त युद्धविराम थी और दूसरी पाकिस्तानी सैनिकों की वापसी। इसके बाद जनमत संग्रह होना था। पाकिस्तान ने अपने सैनिक वापस ही नहीं लिए तो जनमत संग्रह संभव ही नहीं था। 

  • खुद यूएन के भारत-पाकिस्तान आयोग ने 5 जनवरी 1949 को यह बात मानी थी। फिर भी हमेशा कहा गया कि भारत जनमत संग्रह रोकता रहा है।
  • नेहरू ने अनुच्छेद 370 से अलगाववादी मानसिकता को संस्थानिक रूप प्रदान किया। तत्कालीन यूनाइटेड प्रोविंस के प्रतिनिधि मौलाना हसरत मोहानी तक ने 17 अक्तूबर 1949 को इस पर सवाल उठाया।
  • नेहरू और उनके अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं था। फिर भी नीति बनी और अलगाववादी मानसिकता भारत के गले में रस्सी की तरह डाल दी गई।

निजी एजेंडा बढ़ा रहे थे आगे... मित्र को दिलाना चाहते थे सत्ता
20 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान द्वारा कश्मीर पर हमले से भी नेहरू पर असर नहीं पड़ा। तब भी हरि सिंह ने नेहरू से विलय का फिर निवेदन किया। इस समय भी नेहरू निजी एजेंडा आगे बढ़ा रहे थे। अगले दिन यानी 21 अक्तूबर को नेहरू ने कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री एमसी महाजन से कहा “मौजूदा हालात में कश्मीर के भारतीय संघ में विलय की घोषणा करने की शायद जरूरत नहीं है।

कश्मीर में अस्थाई सरकार का गठन किया जाए, शेख अब्दुल्ला यहां काफी लोकप्रिय हैं, उन्हें सरकार बनाने को कहा जाए।” रिजिजू ने कहा कि शेख नेहरू के मित्र थे, कश्मीर के भारत में विलय से ज्यादा जरूरी उन्हें अपने मित्र को कश्मीर की सत्ता दिलाना लगा। अगर जुलाई 1947 में ही विलय हो जाता तो पाकिस्तान कश्मीर को लेकर सक्रिय नहीं होता, न हमला करता, न आज कश्मीर में जारी आतंकवाद से हमें जूझना पड़ता और न ही 1990 में कश्मीरी हिंदुओं को घाटी से निकाला जाता।

कई मंत्री हमलावर... कहा-देश का इतिहास कुछ और होता
भाजपा के कई नेताओं ने भी हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि अगर नेहरू यह गलतियां नहीं करते तो न केवल कश्मीर बल्कि भारत का इतिहास कुछ और होता। केंद्रीय शहरी मामलात व पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन गलतियों को हिमालय जितनी बड़ी करार दिया। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इनकी वजह से 7 दशकों तक हमने कई अवसर गंवाए। महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि नेहरू के ऐतिहासिक झूठ की कीमत भारत ने चुकाई।

असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि नेहरू की कश्मीर नीति गलतियों से भरी थी ऐसा वे हमेशा से जानते थे। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, इनसे पूरे क्षेत्र को कई दशकों तक नुकसान हुआ। केंद्रीय उपभोक्ता मामलात राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि इनसे देश की कई पीढ़ियों को नुकसान हुआ तो सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने नेहरू के रवैए को ही षड्यंत्रकारी करार दिया। केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, नेहरू की गलतियों को देश ने झेला।

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