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डर: किर्गिस्तान में फंसी छत्तीसगढ़ की शिरीन, परिवारवालों का बुरा हाल, कहा- नहीं हो पा रहा संपर्क

Fri, 24 May 2024 09:37 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला पेंड्रा मरवाही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 24 May 2024 09:37 AM IST
सार

आयशा शिरीन जैसे कई भारतीय छात्र किर्गिस्तान में बंकरों में रह रहे हैं, जो सरकार से मदद की आस लिए घर आने का इंतजार कर रहे हैं। छात्रों के साथ-साथ इनके परिवार वाले और पालक भी चिंतित हैं।

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Kin of Indian student stuck in Kyrgyzstan family members of Ayesha said their niece is scared
आयशा के परिवारवालों का बुरा हाल - फोटो : एएनआई

विस्तार

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में छात्रों के बीच में हुए संघर्ष में भारतीय बच्चे फंस गए हैं। ये भारतीय बच्चे वहां चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने गए हुए हैं, लेकिन संघर्ष के बाद अब वे अपने देश भारत लौटना चाहते हैं। वहां के हालात अच्छे नहीं होने के चलते वे सभी एक स्थान पर हैं। वहां की सरकार से उन्हें कोई भी मदद नहीं मिल पा रही है। ऐसे में ये सभी छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार और राज्य सरकारों से लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। किर्गिस्तान में फंसे भरतीय बच्चों में छत्तीसगढ़ की एक बच्ची आयशा शिरीन रॉय भी है। बच्ची के घरवालों का उसकी सुरक्षा को लेकर बुरा हाल है। वह भारत सरकार से लगातार उसे वतन वापस लाने का अनुरोध कर रहे हैं। 

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गौरेला पेंड्रा मरवाही के रहने वाले परिवार के सदस्यों का कहना है कि आयशा मौजूदा अशांति से डरी हुई है और अपने वतन लौटना चाहती है। परिवार ने यह भी बताया कि बच्ची से संपर्क नहीं हो पा रहा है। 
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बच्ची से नहीं हो रहा संपर्क
आयशा की बुआ सुजाना रॉय ने गुरुवार को एनआईए से बात करते हुए कहा, 'मेरी भतीजी किर्गिस्तान में रहती है। वह एमबीबीएस के चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही है। अचानक पिछले सप्ताह हुए विवाद के बाद वहां का माहौल बदला और स्थिति बिगड़ गई। कुछ समय तक हम उसके साथ फोन पर जुड़े हुए थे। हमने बुधवार रात को उससे बात की थी, लेकिन सुबह पांच बजे के बाद से कोई संपर्क नहीं हो पाया है।'
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प्लीज वापस बुला लो
उन्होंने आगे कहा, 'आयशा ने बताया था कि उसे नहीं पता बाहर क्या हो रहा है, क्योंकि उन लोगों को कड़ी सुरक्षा के बीच शेल्टर में रखा गया है। बच्ची ने कहा था कि प्लीज मुझे वापस बुला लो। मैं बहुत डरी हुई हूं क्योंकि हालत दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं। इसलिए कृपया संपर्क करके मुझे वापस बुला लो।'

बुआ ने कहा कि छात्रावास में रहने वाली उनकी भतीजी और अन्य छात्रों को एक बंकर में ले जाया गया है क्योंकि छात्रावास को सूचना मिली थी कि उन पर हमला हो सकता है। इसलिए, डीन ने सभी छात्रों को दूसरी जगह एक बंकर में भेज दिया जहां वे सुरक्षित रह सकते थे। वहां की मैडम छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं।

आयशा शिरीन रॉय के फूफा ने कहा कि उन्होंने बुधवार को उससे बात की थी, लेकिन अब संपर्क नहीं हो पा रहा है। हम लोग काफी परेशान हैं क्योंकि आज सुबह से उससे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नहीं कर पा रहे हैं।

सुरक्षा गार्ड कम और सड़कों पर दंगाई ज्यादा
यह पूछे जाने पर कि क्या वे बच्ची को मुहैया कराई गई सुरक्षा से संतुष्ट हैं, उन्होंने कहा, 'हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय ने उसे और अन्य बच्चों को सुरक्षा प्रदान की है। मौजूदा अशांति के बीच सुरक्षा गार्ड कम हैं और सड़कों पर दंगाई ज्यादा हैं। उन्हें दिन में केवल एक बार भोजन मिल रहा है। भोजन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उन्हें भोजन मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर उन्हें बाहर से खाना मिलता है, तो दंगाइयों को उनकी मौजूदगी का आभास हो सकता है और हमले हो सकते हैं।'

उन्होंने कहा, 'हमने यहां कलेक्टर मैडम से अपील की है। जब हम अपनी चिंताओं को सीएम के पास ले गए, तो उन्होंने वहां मेरी भतीजी से बात की और उसे आश्वासन दिया कि सरकार उसे जल्द से जल्द वापस लाने के लिए सब कुछ करेगी।'

बिश्केक में हालात शांत
बिश्केक में भारत के दूतावास ने शुक्रवार को कहा, 'बिश्केक में हालात शांत बने हुए हैं। दूतावास किर्गिज गणराज्य में चिकित्सा विश्वविद्यालयों के साथ काम कर रहा है ताकि उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए पास के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक उनके परिवहन की व्यवस्था की जा सके।'


कई बच्चियों बंकर में कैद
वहीं, आयशा शिरीन जैसी कई बच्चियों वहां एक बंकर में कैद हैं, जिन्हें रहने, खाने, लाइट जलाने तक की दिक्कत हो रही है। ऐसे में उनके परिवार वाले चिंतित हैं। आयशा शिरीन ने अपने परिवार वालों को एक वीडियो भी भेजा है, जिसमें मदद की गुहार की है। आयशा के परिजन ने जिला प्रशासन से भी जाकर मुलाकात की है और मदद की अपील की है। 

 

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