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खबरों के खिलाड़ी: क्या एजेंसियों की कार्रवाई लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगी, विपक्षी एकता पर कैसा होगा असर

Sat, 06 Jan 2024 04:09 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 06 Jan 2024 04:09 PM IST
सार

Khabron Ke Khiladi: केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई, केंद्रीय एजेंसियों के काम करने का तरीका और केंद्रीय एजेंसियों पर हमले... इस हफ्ते ये सब सुर्खियों में रहे। इस तरह की कार्रवाई का देश की सियासत और खासकर लोकसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, आइए इसे विशेषज्ञों से जानते हैं।
 

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Khabron Ke Khiladi: Will the action of central agencies become big issue in upcoming Lok Sabha elections?
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक और समन आने के बाद भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश नहीं हुए। झारखंड में ईडी की कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें लगती रहीं। वहीं, पश्चिम बंगाल में कार्रवाई करने गई ईडी की टीम पर हमला हो गया। क्या चुनावी साल में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई बड़ा मुद्दा बनेगी? विपक्षी गठबंधन पर इन कार्रवाइयों का क्या असर होगा? बंगाल में जिस तरह कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ दल तृणमल कांग्रेस पर हमलावर है, उसके बाद ममता क्या करेंगी? इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इन्हीं सवालों पर चर्चा हुई। चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी, विनोद अग्निहोत्री और बिलाल सब्जवारी मौजूद रहे। 

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विनोद अग्निहोत्री: शुभेंदु अधिकारी के बयान से केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठते हैं। बंगाल में ईडी के अधिकारियों के साथ जो कुछ हुआ, वह निंदनीय ही नहीं दंडनीय भी है। इसलिए इस मामले में सबसे पहले ममता बनर्जी को कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, भाजपा को अपने नेताओं से कहना चाहिए कि वो एजेंसियों की कार्रवाई पर इस तरह की बयानबाजी से बचें। एजेंसियां कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करती हैं। एजेंसियों पर उंगली तब उठती है, जब कुछ आदेशों पर तो आप तत्परता से कार्रवाई कर देते हैं। वहीं, कुछ ठंडे बस्ते में पड़े रह जाते हैं। वॉशिंग मशीन की जो बातें होती हैं, वो पहले भी काम करती थी, लेकिन अब जो वॉशिंग मशीन है, वह कुछ ज्यादा तेजी से काम कर रही है। जिस मंत्री के बेटे की कार से किसान मरे, वो आज भी उसी विभाग के मंत्री बने हुए हैं। राजस्थान में जिसने इंजीनियर का हाथ तोड़ा, उसे आपने अपने दल में शामिल करके टिकट दे दिया। इन सभी बातों के बाद भी पश्चिम बंगाल की घटना को जायज नहीं ठहराया जा सकता है। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: बंगाल में जो हुआ है, उसकी हर तरह से निंदा की जानी चाहिए। ममता बनर्जी को तत्काल इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही मैं यह भी जोड़ना चाहूंगी कि कार्रवाई से पहले बयान आ जाते हैं, तो सवाल उठता है। इसके साथ ही यह भी सही है कि ईडी की कार्रवाई और चुनाव एक दूसरे से काफी कनेक्टेड दिखाई देते हैं। बेशक उसके बाद मिलने वाली करोड़ों की रकम भी चिंता का विषय है। इसके बाद भी एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। बीते कई सालों से ईडी की कार्रवाई एकतरफ नजर आती है। भ्रष्टाचार को जायज नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन एकतरफा कार्रवाई पर सवाल जरूर उठते हैं। 
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बिलाल सब्जवारी: किसी भी केंद्रीय अधिकारी पर हमला निंदनीय है, लेकिन यह पहली बार नहीं हुआ है। पश्चिम बंगाल में यह पहले भी होता रहा है। इसी तरह दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेताओं की बात हो या झारखंड में हेमंत सोरेन की बात हो या फिर बंगाल की बात हो, इन सभी पर कार्रवाई के साथ यह दिखाई देता है कि यह सभी इंडिया गठबंधन के बड़े पार्टनर हैं। दूसरी ओर केसीआर की बेटी पर होने वाली कार्रवाई हो या जगन मोहन हों, यहां ईडी की कार्रवाई उस तरह से नहीं होती, जैसी इंडिया गठबंधन के नेताओं पर हो रही है। उत्तर प्रदेश में एक पार्टी जो खुद को निष्पक्ष बताकर चुनाव लड़ने की बात करती है, उस पर उस तरह कार्रवाई होती नहीं दिखती, जबकि भ्रष्टाचार के आरोप उनकी नेता पर भी लगे थे। 


अवधेश कुमार: ईडी ने 22 दिसंबर 2023 को एक डेटा जारी किया है। जिसमें 2.8 फीसदी मामले ही विधायक-सांसद या राजनेताओं पर चल रहे हैं। इससे कई गुना ज्यादा मामले नौकरशाहों पर चल रहे हैं। इन सबके साथ ही यह भी देखना होगा कि जिन नेताओं पर आरोप लग रहे हैं क्या उनके बारे में कहा जा सकता है कि वे पूरी तरह पाक-साफ हैं। अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। इससे पता चलता है कि वहां क्या हालात हैं। राजनीतिक दलों को पता है कि भ्रष्टाचार में कौन कितना लिप्त है। विपक्षी गठबंधन के साथ आने के पीछे यह सोच रही है कि अगर यह सरकार रह गई तो सभी को जेल जाना होगा। ईडी ने जो केस किए हैं, वे साक्ष्यों पर आधारित है। मैं यह मानता हूं कि किसी भी एजेंसी को इतने अधिकार नहीं हैं, हमारे यहां अंतत: अदालतें हैं। जो ईडी पर आरोप लगा रहे हैं, क्या उनमें से कोई अदालत गया है।

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