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खबरों के खिलाड़ी: कौन है इंडिगो संकट का असल गुनहगार, क्या किसी ने फायदे के लिए किया ये सब? विश्लेषकों ने बताया
Sat, 13 Dec 2025 05:21 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Sat, 13 Dec 2025 05:21 PM IST
सार
इंडिगो संकट पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई इसकी बात कर रहा है। सवाल ये उठ रहा है कि इसका जिम्मेदार कौन? क्या ऐसी परिस्थिति होने के बाद ही हम जागते हैं?
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खबरों के खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंडिगो संकट पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई इसकी बात कर रहा है। सवाल ये उठ रहा है कि इसका जिम्मेदार कौन? क्या ऐसी परिस्थिति होने के बाद ही हम जागते हैं? कुछ ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
समीर चौगांवकर: ये दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति तब बनी जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर थे। जब किसी एयरलाइन के पास देश के कुल ऑपरेशन का 65 से 70 फीसदी तक हिस्सेदारी रहेगी तो इस तरह की स्थिति आएगी ही। मुझे लगता है कि डीजीसीए को इसे देखना चाहिए था। आपने जो नियम बनाया क्या उसकी मॉनीटरिंग की गई थी। ये सवाल है। सबसे ज्यादा तो इंडिगो को ही देखना चाहिए था जिसकी इतनी बड़ी हिस्सेदारी है। मुझे लगता है कि इसमें केंद्र सरकार कि जिम्मेदार हो जो इस पूरे मामले को सही तरीके से हैंडल नहीं कर पाई। नागरिक उड्डयन मंत्रलाय की इसमें बड़ी विफलता रही है।
रामकृपाल सिंह: ये सारी चीजें सबको पता थीं। हमारे यहां होता क्या है कि जब तक दूध उबलकर गिरने लगता है तब तक कोई नहीं देखता है। जिसने भी ये किया है वो अक्षम्य है। मुझे लगता है कि सरकार और इंडिगो दोनों ही इसके जिम्मेदार हैं। इंडिगो की मोनोपॉली कैसी है वो सब सरकार को मालूम थी। कोई कानून बनाइये और उसमें कोई कमी दिखे तो उसे तुरंत सुधार करना चाहिए।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: जहां इतने लाख यात्री पांच-छह दिन तक परेशान रहे हैं। ऐसे में तो कहीं नक कहीं तो जिम्मेदारी तय करनी ही पड़ेगी। पायलट्स की भर्ती पिछले दो साल से इंडिगो में नहीं हो रही थी। पायलट्स पर डबल लोड डाला जा रहा था। ऐसे में पहली जिम्मेदारी तो इंडिगो की ही है। लेकिन असल में इसके जिम्मेदार डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय हैं। यहां तक कि क्राइसिस के पहले तीन दिन तक तो नागरिक उड्डयन मंत्रालय तो पूरी तरह से गायब था।
राकेश शुक्ल: जब आत्मनिर्भर भारत इंडिगो जैसी किसी कंपनी पर निर्भर हो जाएगा तो इसी तरह कर्म फल मिलेंगे। दो साल पहले डीजीसीए की ओर से नोट जारी किया गया। जनवरी 2024 में दूसरा नोट जारी होता है। और मई 2024 में इसका नोटिफिकेशन जारी हो जाता है। नवंबर तक नियम लागू करने को कहा जाता है। इसके बाद दो साल तक आंख मूंदकर बैठा रहता है। अचानक वह जागता है तो ये सब होता है। मेरा वक्तिगत तौर पर मानना है कि इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार डीजीसीए है।
विनोद अग्निहोत्री: ये सारी क्राइसेस क्रिएटेड है। देश के एक बड़े नेता का इंडिगो में पैसा लगा है और वो पाला बदलने में भी उस्ताद हैं। इसलिए इंडिगो की मोनोपॉली बढ़ती चली गई। वो चार-पांच लोग एयरपोर्ट में फंसे उनकी पीड़ा का क्या होगा? इस मुद्दे को कायदे से काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा करनी चाहिए थी। विपक्ष को भी मैं इस मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करूंगा। इससे विपक्ष की भी संवेदनशीलता का पता चलता है। दरअसल, राजनीति, कारपोरेट और ब्यूरोक्रेसी का जो गठजोड़ है ये उसी का नतीजा है।
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समीर चौगांवकर: ये दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति तब बनी जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर थे। जब किसी एयरलाइन के पास देश के कुल ऑपरेशन का 65 से 70 फीसदी तक हिस्सेदारी रहेगी तो इस तरह की स्थिति आएगी ही। मुझे लगता है कि डीजीसीए को इसे देखना चाहिए था। आपने जो नियम बनाया क्या उसकी मॉनीटरिंग की गई थी। ये सवाल है। सबसे ज्यादा तो इंडिगो को ही देखना चाहिए था जिसकी इतनी बड़ी हिस्सेदारी है। मुझे लगता है कि इसमें केंद्र सरकार कि जिम्मेदार हो जो इस पूरे मामले को सही तरीके से हैंडल नहीं कर पाई। नागरिक उड्डयन मंत्रलाय की इसमें बड़ी विफलता रही है।
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रामकृपाल सिंह: ये सारी चीजें सबको पता थीं। हमारे यहां होता क्या है कि जब तक दूध उबलकर गिरने लगता है तब तक कोई नहीं देखता है। जिसने भी ये किया है वो अक्षम्य है। मुझे लगता है कि सरकार और इंडिगो दोनों ही इसके जिम्मेदार हैं। इंडिगो की मोनोपॉली कैसी है वो सब सरकार को मालूम थी। कोई कानून बनाइये और उसमें कोई कमी दिखे तो उसे तुरंत सुधार करना चाहिए।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: जहां इतने लाख यात्री पांच-छह दिन तक परेशान रहे हैं। ऐसे में तो कहीं नक कहीं तो जिम्मेदारी तय करनी ही पड़ेगी। पायलट्स की भर्ती पिछले दो साल से इंडिगो में नहीं हो रही थी। पायलट्स पर डबल लोड डाला जा रहा था। ऐसे में पहली जिम्मेदारी तो इंडिगो की ही है। लेकिन असल में इसके जिम्मेदार डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय हैं। यहां तक कि क्राइसिस के पहले तीन दिन तक तो नागरिक उड्डयन मंत्रालय तो पूरी तरह से गायब था।
राकेश शुक्ल: जब आत्मनिर्भर भारत इंडिगो जैसी किसी कंपनी पर निर्भर हो जाएगा तो इसी तरह कर्म फल मिलेंगे। दो साल पहले डीजीसीए की ओर से नोट जारी किया गया। जनवरी 2024 में दूसरा नोट जारी होता है। और मई 2024 में इसका नोटिफिकेशन जारी हो जाता है। नवंबर तक नियम लागू करने को कहा जाता है। इसके बाद दो साल तक आंख मूंदकर बैठा रहता है। अचानक वह जागता है तो ये सब होता है। मेरा वक्तिगत तौर पर मानना है कि इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार डीजीसीए है।
विनोद अग्निहोत्री: ये सारी क्राइसेस क्रिएटेड है। देश के एक बड़े नेता का इंडिगो में पैसा लगा है और वो पाला बदलने में भी उस्ताद हैं। इसलिए इंडिगो की मोनोपॉली बढ़ती चली गई। वो चार-पांच लोग एयरपोर्ट में फंसे उनकी पीड़ा का क्या होगा? इस मुद्दे को कायदे से काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा करनी चाहिए थी। विपक्ष को भी मैं इस मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करूंगा। इससे विपक्ष की भी संवेदनशीलता का पता चलता है। दरअसल, राजनीति, कारपोरेट और ब्यूरोक्रेसी का जो गठजोड़ है ये उसी का नतीजा है।
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