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Khabron Ke Khiladi: एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव में क्या होगा, कौन मजबूत? जानें विश्लेषकों की राय
Sat, 15 Jul 2023 06:07 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sat, 15 Jul 2023 06:07 PM IST
सार
Khabron Ke Khiladi: सबसे ज्यादा चर्चा हिंदी बेल्ट वाले राज्यों यानी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की। 'अमर उजाला' के विशेष शो खबरों के खिलाड़ी में इन्हीं राज्यों के सियासी समीकरण पर चर्चा हुई। आइए जानते हैं इन तीनों राज्यों में क्या स्थिति बन रही है?
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विस्तार
इस साल अब तक चार राज्यों के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। दिसंबर तक पांच अन्य राज्यों में भी चुनाव होने हैं। इनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम शामिल हैं। इनमें से सिर्फ मध्य प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है। बाकी छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस, तेलंगाना में बीआरएस और मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट की सरकार है। राजनीतिक दलों ने इन राज्यों के चुनाव को लेकर जोरशोर से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा हिंदी बेल्ट वाले राज्यों यानी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की। 'अमर उजाला' के विशेष शो खबरों के खिलाड़ी में वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विनोद अग्निहोत्री, वरिष्ठ पत्रकार शुभव्रता भट्टाचार्य, रास बिहारी, जयशंकर गुप्त, अवधेश कुमार ने इन्हीं राज्यों में चुनाव की स्थिति और समीकरण को लेकर चर्चा की। यह चर्चा अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर लाइव हो चुकी है। जानिए विश्लेषकों की राय...
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सबसे ज्यादा चर्चा हिंदी बेल्ट वाले राज्यों यानी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की। 'अमर उजाला' के विशेष शो खबरों के खिलाड़ी में वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विनोद अग्निहोत्री, वरिष्ठ पत्रकार शुभव्रता भट्टाचार्य, रास बिहारी, जयशंकर गुप्त, अवधेश कुमार ने इन्हीं राज्यों में चुनाव की स्थिति और समीकरण को लेकर चर्चा की। यह चर्चा अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर लाइव हो चुकी है। जानिए विश्लेषकों की राय...
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जयशंकर गुप्ता
'विधानसभा चुनाव की स्थिति अब साफ होने लगी है। इस बार चुनाव में मुद्दों की बात करें तो महंगाई और बेरोजगारी हावी रहेगी। जनता इससे त्रस्त है। लोग खुलकर इसे स्वीकार कर रहे हैं। वहीं, समीकरण की बात करें तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सीधा मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस है। यहां किसी तीसरे दल की कोई गुंजाइश नहीं है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा की स्थिति काफी कमजोर है। इन दोनों ही राज्यों में भाजपा नहीं दिखेगी। राजस्थान में भी स्थिति लड़ाई वाली है।'
'विधानसभा चुनाव की स्थिति अब साफ होने लगी है। इस बार चुनाव में मुद्दों की बात करें तो महंगाई और बेरोजगारी हावी रहेगी। जनता इससे त्रस्त है। लोग खुलकर इसे स्वीकार कर रहे हैं। वहीं, समीकरण की बात करें तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सीधा मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस है। यहां किसी तीसरे दल की कोई गुंजाइश नहीं है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा की स्थिति काफी कमजोर है। इन दोनों ही राज्यों में भाजपा नहीं दिखेगी। राजस्थान में भी स्थिति लड़ाई वाली है।'
अवधेश कुमार
'2018 में मध्य प्रदेश के अंदर भाजपा की जो हार हुई थी, उसके पीछे सिर्फ एक कारण था। सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला था। उसको लेकर ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे कि वह फैसला सरकार ने लिया हो। इससे पिछड़े वर्ग के वोटर्स नाराज हो गए। ये भाजपा के खिलाफ चला गया। इसके बावजूद अगर आंकड़े देखें तो भाजपा ज्यादा सीटों से नहीं हारी थी। इस बार की स्थिति अलग है। हालांकि, कमलनाथ ने काफी मेहनत की है। उन्होंने हिंदुत्व पर टारगेट करने की बजाय सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड खेला है। इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। वहीं, इस बार सीधी कांड को लेकर आादिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग से नाराजगी की जो बात कही जा रही है, उसे काफी हद तक शिवराज सिंह चौहान ने कंट्रोल कर लिया है। अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी भाजपा जनता के विरोध का सामना नहीं कर रही है, बल्कि खुद के कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी झेल रही है। ये एक बैकड्रॉप है। राजस्थान की बात करें तो यहां भाजपा अभी की स्थिति में कांग्रेस से मजबूत दिख रही है। छत्तीसगढ़ की राह जरूर भाजपा के लिए कठिन दिखाई पड़ रही है।'
'2018 में मध्य प्रदेश के अंदर भाजपा की जो हार हुई थी, उसके पीछे सिर्फ एक कारण था। सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला था। उसको लेकर ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे कि वह फैसला सरकार ने लिया हो। इससे पिछड़े वर्ग के वोटर्स नाराज हो गए। ये भाजपा के खिलाफ चला गया। इसके बावजूद अगर आंकड़े देखें तो भाजपा ज्यादा सीटों से नहीं हारी थी। इस बार की स्थिति अलग है। हालांकि, कमलनाथ ने काफी मेहनत की है। उन्होंने हिंदुत्व पर टारगेट करने की बजाय सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड खेला है। इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। वहीं, इस बार सीधी कांड को लेकर आादिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग से नाराजगी की जो बात कही जा रही है, उसे काफी हद तक शिवराज सिंह चौहान ने कंट्रोल कर लिया है। अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी भाजपा जनता के विरोध का सामना नहीं कर रही है, बल्कि खुद के कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी झेल रही है। ये एक बैकड्रॉप है। राजस्थान की बात करें तो यहां भाजपा अभी की स्थिति में कांग्रेस से मजबूत दिख रही है। छत्तीसगढ़ की राह जरूर भाजपा के लिए कठिन दिखाई पड़ रही है।'
शुभव्रता भट्टाचार्य
'इन विधानसभा चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल कहना गलत होगा। ये एक नया टूर्नामेंट है। समीकरण की बात करें तो इस वक्त छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा की स्थिति खराब है। कांग्रेस दोनों राज्यों में मजबूत है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ की अगुआई में जिस तरह से कांग्रेस ने काम किया, वो उनकी बड़ी ताकत बनकर उभरेगी। राजस्थान की बात करें तो वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आंतरिक लड़ाई से जूझ रहे हैं। हालांकि, अभी की स्थिति में भाजपा जरूर थोड़ी मजबूत दिखाई पड़ रही है।'
'इन चुनावों में आदिवासी फैक्टर भी देखना चाहिए। तीनों ही राज्यों में आदिवासी आबादी है। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नतीजे बताते हैं कि आदिवासी बेल्ट में भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा। अब इसका अन्य राज्यों में कितना असर पड़ता है, ये देखने वाली बात है।'
'इन विधानसभा चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल कहना गलत होगा। ये एक नया टूर्नामेंट है। समीकरण की बात करें तो इस वक्त छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा की स्थिति खराब है। कांग्रेस दोनों राज्यों में मजबूत है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ की अगुआई में जिस तरह से कांग्रेस ने काम किया, वो उनकी बड़ी ताकत बनकर उभरेगी। राजस्थान की बात करें तो वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आंतरिक लड़ाई से जूझ रहे हैं। हालांकि, अभी की स्थिति में भाजपा जरूर थोड़ी मजबूत दिखाई पड़ रही है।'
'इन चुनावों में आदिवासी फैक्टर भी देखना चाहिए। तीनों ही राज्यों में आदिवासी आबादी है। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नतीजे बताते हैं कि आदिवासी बेल्ट में भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा। अब इसका अन्य राज्यों में कितना असर पड़ता है, ये देखने वाली बात है।'
विनोद अग्निहोत्री
'भाजपा हर चुनाव मोदी के चेहरे पर ही लड़ती है। विधानसभा चुनावों में मोदी का चेहरा ही सबसे बड़ा होता है। हां, वो बात अलग है कि हारने के बाद स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। अब रही हिंदी बेल्ट वाले राज्यों के चुनाव की तो ये सही है कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा की स्थिति खराब है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर-चंबल संभाग पर ही भाजपा का फोकस है। नरोत्तम मिश्रा, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता इसी संभाग से आते हैं। भाजपा की कोशिश है कि इस संभाग से अच्छी सीटें मिले। सीधी कांड का भी एक गलत मैसेज आदिवासी वोटर्स के बीच गया है। हालांकि, शिवराज ने डैमेज कंट्रोल करने की जरूर कोशिश की है। उधर, राजस्थान में सरकार की बजाय विधायकों से लोगों की नाराजगी है। अगर गहलोत विधायकों के टिकट काटते हैं तो संभव है कि कांग्रेस को फायदा हो जाएगा। वहीं, भाजपा भी कई गुटों में बंटी हुई है। हालांकि, अगर सरकार के खिलाफ भाजपा माहौल बना सकती है तो जरूर उसे फायदा मिल जाता। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। भाजपा के पास छत्तीसगढ़ में कोई बड़ा चेहरा नहीं है।'
'भाजपा हर चुनाव मोदी के चेहरे पर ही लड़ती है। विधानसभा चुनावों में मोदी का चेहरा ही सबसे बड़ा होता है। हां, वो बात अलग है कि हारने के बाद स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। अब रही हिंदी बेल्ट वाले राज्यों के चुनाव की तो ये सही है कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा की स्थिति खराब है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर-चंबल संभाग पर ही भाजपा का फोकस है। नरोत्तम मिश्रा, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता इसी संभाग से आते हैं। भाजपा की कोशिश है कि इस संभाग से अच्छी सीटें मिले। सीधी कांड का भी एक गलत मैसेज आदिवासी वोटर्स के बीच गया है। हालांकि, शिवराज ने डैमेज कंट्रोल करने की जरूर कोशिश की है। उधर, राजस्थान में सरकार की बजाय विधायकों से लोगों की नाराजगी है। अगर गहलोत विधायकों के टिकट काटते हैं तो संभव है कि कांग्रेस को फायदा हो जाएगा। वहीं, भाजपा भी कई गुटों में बंटी हुई है। हालांकि, अगर सरकार के खिलाफ भाजपा माहौल बना सकती है तो जरूर उसे फायदा मिल जाता। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। भाजपा के पास छत्तीसगढ़ में कोई बड़ा चेहरा नहीं है।'
रासबिहारी
'राजस्थान में भाजपा ताकतवर स्थिति में है। वहां सरकार बदलने का रिवाज भी है। अशोक गहलोत कमजोर मुख्यमंत्री हैं। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। छत्तीसगढ़ की स्थिति जरूर अलग है। यहां कांग्रेस की स्थिति अच्छी है। मध्य प्रदेश में भाजपा को कमजोर कहना ठीक नहीं है। ग्वालियर-चंबल के क्षेत्र में भाजपा जरूर कमजोर है, लेकिन महाकौशल, मालवा जैसे इलाकों में भाजपा मजबूत भी है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की टक्कर होगी।'
'राजस्थान में भाजपा ताकतवर स्थिति में है। वहां सरकार बदलने का रिवाज भी है। अशोक गहलोत कमजोर मुख्यमंत्री हैं। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। छत्तीसगढ़ की स्थिति जरूर अलग है। यहां कांग्रेस की स्थिति अच्छी है। मध्य प्रदेश में भाजपा को कमजोर कहना ठीक नहीं है। ग्वालियर-चंबल के क्षेत्र में भाजपा जरूर कमजोर है, लेकिन महाकौशल, मालवा जैसे इलाकों में भाजपा मजबूत भी है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की टक्कर होगी।'