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खबरों के खिलाड़ी: पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग के क्या हैं मायने, जानें वरिष्ठ पत्रकारों का खास विश्लेषण

Sat, 08 Nov 2025 09:49 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 08 Nov 2025 09:49 PM IST
सार

बिहार में पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान हुआ। इस बार वोटिंग को लेकर बिहार ने अपने 25 वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 60 फीसदी से ज्यादा वोटिंग की। इस बढ़ी हुई वोटिंग के क्या मायने है इस हफ्ते में खबरों के खिलाड़ी में इसी विषय पर चर्चा… 

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khabron ke khiladi What do the high voter turnout in the first phase of the elections signify
खबरों का खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बिहार में पहले चरण बंपर मतदान की चर्चा हर ओर है। हर सियासी दल इस बढ़ी हुई वोटिंग को अपने पक्ष में बता रहा है। 25 साल बाद ऐसा हुआ है जब बिहार में 60 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और अभिषेक कुमार मौजूद रहे। 

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अवधेश कुमार: जो कुछ मैंने बिहार जाकर देखा है, उसमें दो चीजें साफ दिख रही हैं। पहली ये कि एनडीए गठबंधन के विपक्ष में पूरी तरह मानस हो ऐसा नहीं है। और ऐसा भी नहीं है विपक्षी गठबंधन को नहीं आने देना है ऐसा भी पूरी तरह से नहीं है। भाजपा उम्मीदवारों को लेकर स्थानीय लोगों में थोड़ी निराशा जरूर दिखाई दी है। इस दौराना मैंने देखा कि जदयू और भाजपा के उम्मीदवारों में कहीं कोई मतभेद नहीं दिखा। जो दिखा वो हम और लोजपा के उम्मीदवारों को लेकर जरूर दिखा। सबसे बड़ा असर मुझे महिलाओं में दिखा है। 

रामकृपाल सिंह: मैं ये नहीं जानता कि 14 नवंबर को क्या फैसला आएगा, लेकिन बिहार चुनाव के जो निहितार्थ सामने आएंगे वो लंबे समय तक असर डालने वाले होंगे। आप मध्य प्रदेश को देखिए, महाराष्ट्र को देखिए, उत्तर प्रदेश को देखिए तो आप को अंदाजा हो जाएगा। मैं हमेशा कहता हूं कि मतदाता की अपनी पार्टी से असंतुष्टि का मतलब ये नहीं होता है वो वोट दूसरी तरफ देने चला जाएगा।

 

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अभिषेक कुमार: बिहार में महिला वोटर पिछले कई चुनाव से कमाल करती रही हैं। इस बार भी पहले चरण में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले करीब आठ फीसदी ज्यादा रहा है। मेरा मानना है कि इस बार का जनादेश राजद और जदयू के पक्ष या विपक्ष के लिए है। न कि एनडीए या महागठबंधन के लिए। 

 

पूर्णिमा त्रिपाठी: सरकार के खिलाफ बहुत गुस्से वाला मूड नहीं दिखता है, लेकिन एक बड़ा तबका बदलाव की आकांक्षा भी दिखा रहा है। ये बहुत से लोगों ने कहा है। लोग बदलाव की बात कर रहे हैं तो ये बदलाव क्या होगा ये देखना होगा। 65 फीसदी से ज्यादा वोटिंग बहुत अच्छी बात है। ये सुखद दृश्य था। लेकिन, जिस तरह से दिल्ली हरियाणा और उत्तर प्रदेश से प्रवासी लोगों को ट्रेनों से ले जाकर वोट दिलाया गया। जिस तरह के कुछ उदाहरण सामने आए। वो और दुखद है।

 

विनोद अग्निहोत्री: ज्यादा वोटिंग या कम वोटिंग से आप ये अंदाजा नहीं लगा सकते हैं कि किस तरह का नतीजा आने वाला है। ये सही है कि नीतीश कुमार को लेकर कोई खास नाराजगी नहीं है, लेकिन ये भी देखना होगा क्या उन्हें दसवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के लिए उतना उत्साह है ये भी देखना होगा। युवाओं में निश्चित रूप से पलायन और रोजगार बड़ा मुद्दा रहा है। युवाओं बड़ी संख्या में वोट दिया है, ये वोट किधर गया ये देखना होगा। प्रशांत किशोर ने किसका वोट कहां काटा ये भी देखना होगा।

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