{"_id":"640c468ddc9d52d3be08e5e5","slug":"khabron-ke-khiladi-rahul-gandhi-comparision-rss-muslim-brotherhood-democracy-in-modi-government-ed-cbi-misuse-2023-03-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"खबरों के खिलाड़ीः क्या राहुल गांधी का RSS की मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना कर देना सही है? जानें विश्लेषकों की राय","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
खबरों के खिलाड़ीः क्या राहुल गांधी का RSS की मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना कर देना सही है? जानें विश्लेषकों की राय
Sat, 11 Mar 2023 09:19 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 11 Mar 2023 09:19 PM IST
सार
Khabron Ke Khiladi Episode 3: राहुल गांधी को लग रहा है कि देश में लोकतंत्र खतरे में है, लेकिन उनके इस बयान पर राजनीतिक विश्लेषकों की राय क्या है, जानिए खबरों के खिलाड़ी में...
विज्ञापन
अमर उजाला की विशेष पेशकश खबरों के खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नमस्कार! अमर उजाला अपनी विशेष प्रस्तुति 'खबरों के खिलाड़ी' की तीसरी कड़ी के साथ एक बार फिर आपके बीच मौजूद है। इस राजनीतिक और चुनावी चर्चा को आप अमर उजाला के यू-ट्यूब चैनल पर आज रात और रविवार सुबह 9 बजे देख सकते हैं।
विज्ञापन
पिछले दिनों से देश में छापेमारी का दौर चल रहा है। विपक्ष का आरोप है कि जांच एजेंसियों को हथियार बनाकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उधर, राहुल गांधी पिछले दिनों ब्रिटेन में थे। वहां दिए गए उनके बयान की खूब चर्चा हुई। राहुल गांधी को लग रहा है कि देश में लोकतंत्र खतरे में है।
विज्ञापन
...आइए जानते हैं खबरों के खिलाड़ी की इस कड़ी में हमारे राजनीतिक विश्लेषकों का इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कहना है। इस बार चर्चा में विनोद शर्मा, सुमित अवस्थी, अवधेश कुमार, संगीत रागी, शुभ्रांश राय और गुंजा कपूर मौजूद थे। पढ़ें, इस चर्चा के कुछ अंश...
विज्ञापन
सुमित अवस्थी
राहुल गांधी ने आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की। अगर उन्हें आरएसएस से इतनी परेशानी है तो कांग्रेस सरकार के दौरान आरएसएस पर बंदिश क्यों नहीं लगाई गई थी? आज जब वे विपक्ष में हैं, तब ही क्यों आरएसएस पर निशाना साधा जा रहा है? विपक्ष केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है और भाजपा क्यों लगातार चुनाव जीत रही है! बेवजह के आरोप-प्रत्यारोप की जगह उन मुद्दों पर मंथन होना चाहिए, जिनसे देश की आम जनता की भलाई जुड़ी हो।
ये भी पढ़ें- खबरों के खिलाड़ीः पूर्वोत्तर में तो जीत गई भाजपा, पर असल मुकाबला राजस्थान-एमपी में; जानें विश्लेषकों की राय
गुंजा कपूर
'राहुल गांधी ने आरएसएस की मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना विदेश में की और इसके लिए उन्हें खूब आलोचना झेलनी पड़ रही है। आरएसएस के साथ आपका वैचारिक मतभेद हो सकता है, लेकिन आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से करना गलत है। राहुल गांधी कह रहे हैं कि देश में लोकतंत्र नहीं है, लेकिन आप साल दर साल चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं! प्रधानमंत्री भी विदेश दौरे पर गए तो उन्होंने देश के मुद्दों पर विदेशों में बात नहीं की। प्रधानमंत्री या सरकार का कोई भी व्यक्ति विदेश जाकर हिंदू-मुस्लिम नहीं करता, लेकिन विपक्ष इसी पर ज्यादा जोर देता है। लोगों के जीवन पर मोदी सरकार की योजनाओं का प्रभाव पड़ा है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। विदेशी नेता भारत का दौरा कर रहे हैं। भारत वैश्विक केंद्र बन रहा है। भारत की डिजिटल क्रांति पर पूरी दुनिया में बात हो रही है।'
विनोद शर्मा
'तुलना कभी नहीं करनी चाहिए। मैं आरएसएस की आलोचना खुद करने में सक्षम हूं। मुझे किसी और से उसकी तुलना करके आलोचना करने की जरूरत नहीं है। मैंने वो समय देखा है कि आरएसएस को शाखाओं में लोगों को शामिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। यहां चुनाव हो रहे हैं, लेकिन सही मायने में लोकतंत्र सिर्फ प्रतिनिधि स्तर पर नहीं होता। चुनावों के बीच क्या हुआ, उस पर भी गौर करना चाहिए। जो लोग सवाल उठा रहे हैं, क्या उन्हें इसका पूरा मौका मिल रहा है? देश में लोकतंत्र का मापदंड सिर्फ चुनाव नहीं होना चाहिए। हम एक वैश्विक दुनिया में रह रहे हैं।'
'इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी, लेकिन उन्हीं इंदिरा गांधी ने दोबारा चुनाव कराए और चुनाव हारने के बाद जब वे विदेश गईं तो उनसे पूछा कि इमरजेंसी से क्या मिला तो उन्होंने कहा कि इमरजेंसी से हमारी पार्टी की छवि धूमिल हुई। आज इंटरनेट के जमाने में यह बात बेमानी है कि हम कहां बात कर रहे हैं। सरकारें आती-जाती रहेंगी, लोकतंत्र रहना चाहिए। नेहरू इस देश में लोकतंत्र लेकर आए। हम लोग अपने पूर्वजों को बदनाम ना करें, लेकिन आरएसएस की मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना बिल्कुल गलत है। ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल होता रहा है और ये हथकंडे पहले भी सरकारें अपनाती रही हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संस्थाओं को पाक-साफ रखने की कोशिश करे। एक राजनीतिक पार्टी कहती है कि हम एक तबके के लोगों को टिकट नहीं देते। सरकार का नारा है कि सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास लेकिन देश में 18-20 फीसदी जनता को भागीदारी नहीं दी जाती, यह एक गंभीर मुद्दा है।'
ये भी पढ़ें- खबरों के खिलाड़ी: 2024 में क्या सियासी नजारा दिखेगा? इसका जवाब अमर उजाला पर राजनीतिक विश्लेषकों से जानिए
अवधेश कुमार
'संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलना था, लेकिन राहुल गांधी ने अदाणी को लेकर इतना कुछ कहा। यह पूरे देश ने देखा। जो वे कह रहे हैं कि उनका माइक बंद कर दिया, ऐसा कभी किसी ने नहीं कहा। मुस्लिम ब्रदरहुड का नाता हिंसा और आतंकवाद से रहा है, लेकिन आरएसएस पर ऐसे आरोप कोई नहीं लगा सकता। इस समय देश और विदेश की कई शक्तियां ऐसी हैं, जो देश की उभरती तस्वीर से परेशान हैं। राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा निकाली। उससे पहले उन्होंने कई विदेशी संगठन के लोगों से मुलाकात की। राहुल गांधी ने आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से करके बौद्धिक, राजनीतिक अपराध किया है।'
'कोई भी सरकार देश को स्वर्ग नहीं बना देती। हर किसी की अपनी कमियां हैं और अपनी खूबिया हैं। सरसंघचालक ने खुद कहा है कि हमें हर मस्जिद में मंदिर नहीं तलाशना है। पिछले आठ सालों में संघ के किसी पदाधिकारी ने मुसलमानों पर कोई टिप्पणी नहीं की। एक दो नेताओं के खिलाफ ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल हो सकता है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में जो कार्रवाई हो रही है वो सब क्या गलत है? एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल नहीं हो रहा है।'
शुभ्रांश राय
'2014 से पहले भी आरएसएस की तस्वीरें दिखती थीं। अब ज्यादा दिखती है, इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन हम महंगाई, रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि ऐसा माहौल बनाया गया है कि ये मुद्दे ही नहीं हैं, लेकिन क्या पूरे साल हिंदू-मुसलमान के बारे में बात करने के अलावा कुछ नहीं है! कश्मीर में पूरी फौज तैनात है, लेकिन इसके बावजूद वहां लोगों की हत्याएं हो रही हैं। जिन जगहों पर आमतौर पर बुर्का पहने बहुत महिलाएं नहीं दिखती थीं, जहां फिल्मों की शूटिंग होती थी। वहां आप राजनीतिक पार्टी के रूप में आए और आपने राम और रहीम के रूप में बांट दिया। जब आप तंत्र को इतना शक्तिशाली कर देंगे तो यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। प्रधानमंत्री जितनी बार विदेश गए तो वह इंडियन डायस्पोरा के साथ मिल रहे थे और अपने मन की बात कर रहे थे तो राहुल गांधी क्यों नहीं कर सकते? जब प्रधानमंत्री अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए प्रचार करते हैं तो उसमें कुछ गलत नहीं है?'
ये भी पढ़ें- Kiren Rijiju: 'राहुल गांधी देश के लिए खतरा, विदेशी नहीं जानते कि वे..', कांग्रेस नेता पर भड़के केंद्रीय मंत्री
संगीत रागी
'कोई भी लोकतंत्र परफेक्ट नहीं होता, जब नेहरू के समय लोकतंत्र था, वह भी लोकतंत्र नहीं था। तब देश में लोकतांत्रिक समझ नहीं थी और तब कांग्रेस भी बूथ कैप्चरिंग करके चुनाव जीतती थी। नेहरू अगर लोकतांत्रिक होते तो कांग्रेस का अध्यक्ष कोई और होता। नेहरू भी थोपे हुए प्रधानमंत्री थे। तो हमे लोकतंत्र को उसी नजरिए से देखना चाहिए। कांग्रेस ने देश की संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट किया। नेहरू के समय में ही राष्ट्रपति शासन लगा। लेकिन अब राहुल गांधी बाहर जाकर आरोप लगा रहे हैं कि सारी संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा है।'
'जब गांधी कहते थे कि ईसाई मिशनरी धर्म का व्यवसाय करती हैं तो वह आरएसएस का प्रोडक्ट नहीं थे। जब कहते थे कि देश की राष्ट्रभाषा हिंदी होनी चाहिए, या स्वदेशी और हिंदू धर्म के बारे में जो बातें कहीं तब वह आरएसएस के नहीं थे। गांधी जब भारत के प्रतीक पुरुषों, छोटे छोटे त्योहारों का समर्थन करते थे तो वह आरएसएस के प्रोडक्ट नहीं थे। गांधी ने कहा था कि भारत की सभ्यता एक है। वही बात तो संघ करता है। इस तरह तो गांधी और संघ एक मंच पर हैं। राहुल गांधी अपरिपक्व, अशिक्षित और अज्ञानता से भरे हैं। उनकी कोई बौद्धिकता नहीं है। राहुल गांधी कहते हैं कि उन्हें देश के विश्वविद्यालयों में बोलने नहीं दिया जाता, लेकिन क्या वह छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विश्वविद्यालयों में भी नहीं बोलने दिया जाता?'
'मुस्लिम ब्रदरहुड तालिबान की विचारधारा का समर्थक है। लोकतंत्र ने गांधी परिवार के दबदबे को खत्म कर दिया है। कांग्रेस पार्टी को एक क्षेत्रीय पार्टी के रूप में खड़ा कर दिया है, उसी के चलते ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। पहले एक वर्ग सार्वजनिक संसाधनों पर अय्याशी करता था, उस वर्ग को आज परेशानी हो रही है। राहुल गांधी विदेश में जाकर इसलिए आलोचना करते हैं क्योंकि वहां कोई उनसे काउंटर सवाल नहीं करेगा। देश में अगर वो ऐसी बातें कहेंगे तो यहां उनसे सवाल होंगे।'
'एक धर्म का आदमी अगर धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण करेगा तो दूसरा धर्म का भी ध्रुवीकरण होगा। इस देश के अंदर कांग्रेस पार्टी ने कट्टरपंथी इस्लामी नेताओं को पोषित किया है। किसी सेक्युलर देश में वक्फ बोर्ड जैसी चीज है क्या? इस देश में मौलानाओं को सैलरी दी जाती है। यही नेहरू का सेक्युलरिज्म है। जिस बाबर ने देश के मंदिरों को बर्बाद किया, उसको भी देश का बुद्धिजीवी वर्ग सम्मानित करता है?'