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Khabaron Ke Khiladi: महाराष्ट्र में क्यों तय नहीं हो पा रहा CM? राजनीतिक विश्लेषकों से जानिए अंदर की कहानी
Sat, 30 Nov 2024 06:41 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 30 Nov 2024 06:41 PM IST
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महाराष्ट्र की राजनीति
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे आने के बाद देवेंद्र फडणवीस के नाम की चर्चा हर ओर रही, लेकिन अब कहा जा रहा है कि भाजपा के अंदर कोई खिचड़ी पक रही है, जिसकी वजह से अगला मुख्यमंत्री तय करने में देरी हो रही है। आखिर इस देरी की वजह क्या है? क्या एकनाथ शिंदे इस देरी की वजह हैं या फिर भाजपा की आपसी खींचतान की वजह से फैसला नहीं हो पा रहा है? इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद थे।
हर्षवर्धन त्रिपाठी: महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार और बाला साहेब ठाकरे दो बड़े नेता रहे। अब महाराष्ट्र में एक मात्र बड़ा नेता कोई है तो वो देवेंद्र फडणवीस हैं। भाजपा में बैठे एक वर्ग को यह ठीक नहीं लग रहा। मेरा मानना है कि अमित शाह को इस मामले में तुरंत दखल देकर चीजों को ठीक करना चाहिए। शिंदे हों या अजित पवार, दोनों पार्टी में पांच से छह नेता ऐसे हैं, जो भाजपा के हैं और इन दलों से जीतकर आए हैं। अभी जो हो रहा है वो भाजपा के लिए ठीक नहीं है।
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अनुराग वर्मा: अगर आप भाजपा की शैली की बात करें तो अगर देवेंद्र फडणवीस नहीं तो कौन पर? इस सवाल पर आप चर्चा नहीं कर सकते हैं। वो कोई भी हो सकता है। इस बार पहली बार केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव है। मौजूदा स्थिति में अजित पवार या एकनाथ शिंदे इस तरह की स्थिति में हैं कि वो भाजपा की 'आर्म ट्विस्टिंग' कर सकें। बिहार में स्थिति अलग है। महाराष्ट्र और बिहार की तुलना नहीं की जा सकती है। वहां भाजपा के पास देवेंद्र फडणवीस जैसे कद का कोई नेता नहीं है।
समीर चौगांवकर: भाजपा का एक ही मालिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो तय करेंगे, वही महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री होगा। भाजपा के अंदर किसी की इतनी ताकत नहीं है कि उनके फैसले के खिलाफ जाए। एकनाथ शिंदे के सामने जरूर यह चुनौती है कि वो उपमुख्यमंत्री बनेंगे तो उन्हें वो सब मिल सके जो उपमुख्यमंत्री रहते देवेंद्र फडणवीस के पास था। इसके साथ ही वो चाहते हैं कि जितने मंत्री भाजपा के हों, उतने ही शिवसेना के हों। इसके साथ ही मुंबई नगर निगम में चाहे किसी की सीटें ज्यादा आएं, ढाई साल मेयर शिवसेना का रहे, ढाई साल भाजपा का। इसके साथ ही कल्याण और ठाणे में उनका मेयर बने और कोई ओबीसी चेहरा मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 36 में से 12 जिलों के पालक मंत्री शिवसेना के मांगे हैं। जब इन सब बातों पर चीजें तय हो जाएंगी, तब मुख्यमंत्री की घोषणा होगी।
विनोद अग्निहोत्री: गठबंधन की जो सरकार होती है, उसमें इस तरह की चीजें आती हैं। ये बात जरूर है कि भाजपा के पास जो नंबर है, उस स्थिति में अजित पवार और एकनाथ शिंदे किसी बार्गेनिंग की स्थिति में नहीं हैं। ऐसी स्थिति में सारी चीजें तय करके ही आगे बढ़ना चाहिए। मुझे लगता है कि यह ठीक भी है। यह जरूर है कि मुख्यमंत्री कौन होगा, यह भले न तय हो, लेकिन यह तो तय है कि अजित पवार उपमुख्यमंत्री जरूर बनेंगे। अब तक नाम की घोषणा नहीं होने का मतलब है कि देवेंद्र फडणवीस का नाम खटाई में पड़ गया है। पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री पर कोई दबाव या मजबूरी नहीं होगी।
राकेश शुक्ल: महाराष्ट्र की तुलना मध्य प्रदेश और राजस्थान से नहीं की जा सकती। वहां केंद्रीय नेतत्व चाहता था कि नया नेतृत्व लाना है। महाराष्ट्र में ऐसी स्थिति नहीं है। एकनाथ शिंदे को सामने किया गया। एकनाथ शिंदे में इतनी ताकत न तो कल थी, न आज है, न ही कल होगी कि वो देवेंद्र फडणवीस को रोक सकें। यह सब कुछ भाजपा के अंदर का मामला है। जो व्यक्ति उन्हें रोकना चाहता है, उनके सामने भी चुनौती है कि फडणवीस को महाराष्ट्र में रोकें या राष्ट्रीय राजनीति में रोकें।
पूर्णिमा त्रिपाठी: इतना बड़ा नंबर होने के बाद भी मुख्यमंत्री की घोषणा नहीं होना, यह बताता है कि भाजपा के अंदर कोई खिचड़ी पक रही है। अब इससे क्या निकलेगा ये देखना होगा।
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हर्षवर्धन त्रिपाठी: महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार और बाला साहेब ठाकरे दो बड़े नेता रहे। अब महाराष्ट्र में एक मात्र बड़ा नेता कोई है तो वो देवेंद्र फडणवीस हैं। भाजपा में बैठे एक वर्ग को यह ठीक नहीं लग रहा। मेरा मानना है कि अमित शाह को इस मामले में तुरंत दखल देकर चीजों को ठीक करना चाहिए। शिंदे हों या अजित पवार, दोनों पार्टी में पांच से छह नेता ऐसे हैं, जो भाजपा के हैं और इन दलों से जीतकर आए हैं। अभी जो हो रहा है वो भाजपा के लिए ठीक नहीं है।
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अनुराग वर्मा: अगर आप भाजपा की शैली की बात करें तो अगर देवेंद्र फडणवीस नहीं तो कौन पर? इस सवाल पर आप चर्चा नहीं कर सकते हैं। वो कोई भी हो सकता है। इस बार पहली बार केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव है। मौजूदा स्थिति में अजित पवार या एकनाथ शिंदे इस तरह की स्थिति में हैं कि वो भाजपा की 'आर्म ट्विस्टिंग' कर सकें। बिहार में स्थिति अलग है। महाराष्ट्र और बिहार की तुलना नहीं की जा सकती है। वहां भाजपा के पास देवेंद्र फडणवीस जैसे कद का कोई नेता नहीं है।
समीर चौगांवकर: भाजपा का एक ही मालिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो तय करेंगे, वही महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री होगा। भाजपा के अंदर किसी की इतनी ताकत नहीं है कि उनके फैसले के खिलाफ जाए। एकनाथ शिंदे के सामने जरूर यह चुनौती है कि वो उपमुख्यमंत्री बनेंगे तो उन्हें वो सब मिल सके जो उपमुख्यमंत्री रहते देवेंद्र फडणवीस के पास था। इसके साथ ही वो चाहते हैं कि जितने मंत्री भाजपा के हों, उतने ही शिवसेना के हों। इसके साथ ही मुंबई नगर निगम में चाहे किसी की सीटें ज्यादा आएं, ढाई साल मेयर शिवसेना का रहे, ढाई साल भाजपा का। इसके साथ ही कल्याण और ठाणे में उनका मेयर बने और कोई ओबीसी चेहरा मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 36 में से 12 जिलों के पालक मंत्री शिवसेना के मांगे हैं। जब इन सब बातों पर चीजें तय हो जाएंगी, तब मुख्यमंत्री की घोषणा होगी।
विनोद अग्निहोत्री: गठबंधन की जो सरकार होती है, उसमें इस तरह की चीजें आती हैं। ये बात जरूर है कि भाजपा के पास जो नंबर है, उस स्थिति में अजित पवार और एकनाथ शिंदे किसी बार्गेनिंग की स्थिति में नहीं हैं। ऐसी स्थिति में सारी चीजें तय करके ही आगे बढ़ना चाहिए। मुझे लगता है कि यह ठीक भी है। यह जरूर है कि मुख्यमंत्री कौन होगा, यह भले न तय हो, लेकिन यह तो तय है कि अजित पवार उपमुख्यमंत्री जरूर बनेंगे। अब तक नाम की घोषणा नहीं होने का मतलब है कि देवेंद्र फडणवीस का नाम खटाई में पड़ गया है। पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री पर कोई दबाव या मजबूरी नहीं होगी।
राकेश शुक्ल: महाराष्ट्र की तुलना मध्य प्रदेश और राजस्थान से नहीं की जा सकती। वहां केंद्रीय नेतत्व चाहता था कि नया नेतृत्व लाना है। महाराष्ट्र में ऐसी स्थिति नहीं है। एकनाथ शिंदे को सामने किया गया। एकनाथ शिंदे में इतनी ताकत न तो कल थी, न आज है, न ही कल होगी कि वो देवेंद्र फडणवीस को रोक सकें। यह सब कुछ भाजपा के अंदर का मामला है। जो व्यक्ति उन्हें रोकना चाहता है, उनके सामने भी चुनौती है कि फडणवीस को महाराष्ट्र में रोकें या राष्ट्रीय राजनीति में रोकें।
पूर्णिमा त्रिपाठी: इतना बड़ा नंबर होने के बाद भी मुख्यमंत्री की घोषणा नहीं होना, यह बताता है कि भाजपा के अंदर कोई खिचड़ी पक रही है। अब इससे क्या निकलेगा ये देखना होगा।