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खबरों के खिलाड़ी: महाराष्ट्र में एनडीए के अंदर क्या सब कुछ ठीक नहीं? विश्लेषकों से जानिए इसके अंदर की कहानी

Sat, 22 Nov 2025 05:17 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 22 Nov 2025 05:17 PM IST
सार

Is the political scenario in Maharashtra changing rapidly?: पिछले दिनों एकनाथ शिंदे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। वहीं, उद्धव ठाकरे की देवेंद्र फडणवीस से नजदीकी की चर्चा उठी। इससे यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि महाराष्ट्र में सियासत बदल रही है...

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khabron ke khiladi Is everything not well within NDA in Maharashtra
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र में एक बार फिर हलचल है। अटकलें हैं कि महाराष्ट्र एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं है। पिछले दिनों शिवसेना के मंत्री कैबिनेट बैठक में भी शामिल नहीं हुए। वहीं, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस सबके पीछे बड़ी वजह है महाराष्ट्र में होने वाले निकाय चुनाव। इसी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 'खबरों के खिलाड़ी' में इस बार राजनीतिक विश्लेषक विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार, अनुराग वर्मा और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। 
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क्या उद्धव की शिवसेना और भाजपा के बीच कोई गठबंधन होगा? 
समीर चौगांवकर: फिलहाल यह संभावना कम नजर आती है कि बीएमसी के चुनाव में भाजपा और उद्धव की शिवसेना के बीच गठबंधन होगा। फिलहाल उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास वोटों की ताकत ज्यादा बची नहीं है। उद्धव अपने भाई राज ठाकरे के साथ मिलकर जरूर गठबंधन कर सकते हैं। हालांकि, भाजपा और उद्धव के बीच संबंधों में सुधार होना जरूर शुरू हुआ है। देंवेंद्र फडणवीस सरकार ने बाला साहेब ठाकरे की स्मृति में बने न्यास का अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को बनाया है। एकनाथ शिंदे की नजर जरूर इस पद पर रही होगी। शिंदे और शाह के बीच मुलाकात के पीछे कई कारण हैं। महाराष्ट्र भाजपा बड़े नगर निगमों में बिना गठबंधन के चुनाव लड़ना चाहती है। शिंदे ने शाह से यही सवाल किया होगा कि अलग-अलग चुनाव लड़ने पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होगा। इसका अगले विधानसभा चुनाव पर भी असर पड़ेगा।
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उद्धव की शिवसेना की तरफ से, खासकर संजय राउत की तरफ से अब कोई बयान नहीं आ रहा? 
राकेश शुक्ल: गठबंधन तो चलेगा। हालांकि, देवेंद्र फडणवीस के लिए उद्धव ठाकरे ट्रंप कार्ड की तरह हैं। अगर एकनाथ शिंदे अपने रास्ते अलग कर लेते हैं तो भाजपा को उद्धव की जरूरत होगी। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच मिलाप कराने वाले कोई और नहीं, बल्कि फडणवीस ही हैं। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे, लेकिन उन्हें भी अपने पक्ष में करने वाले फडणवीस ही हैं। वे महाराष्ट्र की राजनीति में आज सबसे बड़े चाणक्य हैं। संजय राउत अब इसलिए कुछ नहीं बोल रहे क्योंकि अभी फडणवीस और उद्धव के बीच नजदीकी बढ़ी है। उधर, महाराष्ट्र में अब एकनाथ शिंदे का एकाधिकार कमजोर हुआ है क्योंकि अब फैसले पालक मंत्री करते हैं। इसलिए एकनाथ दिल्ली के चक्कर ज्यादा लगा रहे हैं। 

तो आखिर महाराष्ट्र में अटकलें क्यों हैं? 
अवधेश कुमार: अटकलें तीन वजहों से हैं। पहली- मंत्रिमंडल की बैठक में एकनाथ शिंदे को छोड़कर उनके गुट का कोई मंत्री नहीं पहुंचा। दूसरी- शिंदे और शाह की मुलाकात। तीसरी- बाल ठाकरे स्मृति न्यास का अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को बनाया जाना। सवाल यह है कि शिंदे शाह से मिलने गए या मिलने के लिए बुलाए गए। संभवत: वे नई सरकार बनने के बाद से अब तक शाह से 12 बार मिल चुके हैं। मौजूदा परिस्थितियों में एकनाथ शिंदे यह जानते हैं कि एनडीए से बाहर जाने पर उनकी स्थिति क्या होगी। भाजपा को उनकी ज्यादा जरूरत नहीं है। फडणवीस को अजीत पवार से भी कोई समस्या फिलहाल नहीं है। 


क्या उद्धव और राज ठाकरे साथ आएंगे? 
अनुराग वर्मा: एनडीए में घटक दलों की स्थिति यह है कि समझौता करने की ताकत उनके पास नहीं बची है। एनडीए की राजनीति बदल गई है। बिहार में नीतीश कुमार और महाराष्ट्र में शिंदे के पास अपने पक्ष में समझौते कराने की ताकत नहीं है। अब कोई भी ऐसा क्षेत्रीय दल नहीं है, जो एनडीए का हिस्सा बनना न चाहता हो। 

ये भी पढ़ें: JP Nadda: 'कांग्रेस ने सरदार पटेल के योगदान को जानबूझकर दबाया', जेपी नड्डा बोले- भाजपा ने दिलाया सम्मान

देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, उद्धव और राज ठाकरे... अब महाराष्ट्र की राजनीति को यही चेहरे चलाएंगे? 
विनोद अग्निहोत्री: महाराष्ट्र की राजनीति में कब, कौन, कहां, किधर जाएगा, यह कहना मुश्किल है। देवेंद्र फडणवीस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद हैं। वे आरएसएस की भी पसंद हैं। भाजपा में पीएम मोदी के बाद जिन बड़े नेताओं की गिनती होती है, उनमें अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बाद फडणवीस तीसरे सबसे बड़े चेहरे हैं। शिंदे हमेशा फडणवीस की राह में कांटा रहे हैं। इसी वजह से फडणवीस के पास प्लान बी के तौर पर उद्धव ठाकरे मौजूद हैं। हालांकि, उद्धव ठाकरे और अमित शाह के बीच रिश्ते भी सामान्य नहीं हैं। उद्धव भी महाविकास आघाड़ी के घटक दलों पर यह दबाव बनाना चाहते हैं। जहां तक राज ठाकरे की बात है, तो हिंदी और उत्तर भारतीयों के प्रति उनके मुखर विरोध को न कांग्रेस झेल सकती है और न भाजपा झेल सकती है।
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