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Khabaron Ke Khiladi: किसकी अनदेखी से हुई चढ़ावे की चोरी, विश्लेषकों ने बताया आस्था पर कैसे पहुंचाई गई चोट

Sat, 27 Jun 2026 09:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 27 Jun 2026 09:01 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi Ram Mandir Donation Issue Analysis on How Theft affected Faith news and updates
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एफआईआर आखिरकार हो गई है। ट्रस्ट के दो लोगों के इस्तीफे की चर्चा भी चल रही है। हालांकि इसे सार्वजनिक तौर पर किसी ने स्वीकार नहीं किया है। पूरे हफ्ते चढ़ावे की चोरी का ये मामला सुर्खियों में है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, समीर चौगांवकर और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: राम मंदिर में चढ़ावे पर जो कुछ हो रहा है वो बहुत दुखद है। खुलासा अब जाकर हुआ है, लेकिन जब मंदिर बन रहा था तब भी जमीन खरीद को लेकर शोर शराबा हुआ था। उस वक्त बात आई-गई हो गई। शक की सूई का निदान पहले किसी भी स्तर पर नहीं किया गया। अब सवाल ये उठता है कि उस वक्त इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। या ये माना जाए कि ध्यान गया भी तो पब्लिक में चीजें नहीं आई तो उसे दबा दिया गया। 
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रामकृपाल सिंह: जो होता है वही हुआ है। एक ड्राइवर इतनी जल्दी करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर लेता है। जब वो अपने 60 कमरे का हॉस्टल बनवा लेता है। जब वो उसका उद्घाटन करता है तो ट्रस्ट से जुड़े लोग भी जाते हैं। जब आपके सामने दिखाई दे रहा है कि एक आदमी जो साइकिल से चलता था वो बड़ी-बड़ी गाड़िया खरीद रहा है फिर भी आप भोले बने रहे। ये आपराधिक अनदेखी है। 

अनुराग वर्मा: ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पता चलता है कि हमारे धर्म के ठेकेदार किस स्तर तक भ्रष्ट हैं। जिसके देखरेख में ये सब काम हो रहा था, जिम्मेदारी उसकी है। भले ही उसने एक भी रुपया नहीं लिया हो। दुर्भाग्य ये है कि ऐसा शायद हर संस्था में हो रहा है और हम आंख मूंदकर आगे चल रहे हैं। जो लोग कर्ताधर्ता बने हुए थे शायद वो खुद को इंसान से ऊपर भगवान से थोड़ा ही नीचे समझते थे। 

समीर चौगांवकर: इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत चुप क्यों हैं। जिन लोगों ने किया है क्या योगी आदित्यनाथ बुलडोजर चलाएंगे। रही बात चंपत राय कि तो जब उन्हें ये लगने लगा था कि वो यहां के सेवक नहीं है बल्कि वो इसके मालिक बन गए हैं। मुझे लगता है कि ट्रस्ट के लोगों को इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर इस्तीफा नहीं देते तो पूरे ट्रस्ट को बर्खास्त कर देना चाहिए। जिस बात की चर्चा अयोध्या की गली-गली में थी क्या वो बात चंपत राय को नहीं मालूम थी?

विनोद अग्निहोत्री: राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मामला तब आया था जब दो करोड़ की जमीन 18 करोड़ में खरीदी गई थी। वहीं, अंकुश लगना चाहिए था। लोगों के रोष को देखते हुए इस्तीफे की खबर चलाई गई है। अब इसका न खंडन हो रहा है न ही पुष्टि हो रही है। जिन पर एफआईआर हुई है वो सिर्फ प्यादे हैं। सीसीटीवी अगर बंद हो गए तो ये कोई टिन्नू तो अकेले नहीं करा सकता है। ट्रस्ट जो बना उस ट्रस्ट का ही ट्रस्ट खत्म हो गया है। इसलिए मुझे लगता है ट्रस्ट को भंग किया जाना चाहिए।
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