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Khabaron Ke Khiladi: लेह में कैसे भड़की हिंसा? विश्लेषकों ने बताया क्या समय पर एक्शन लेने से चूक गई सरकार

Sat, 27 Sep 2025 09:01 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 27 Sep 2025 09:01 PM IST
सार

लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर उन पर एनएसए लगा दिया गया। इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ पर इसी विषय पर चर्चा। 

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Khabaron Ke Khiladi How violence erupted in Leh, Sonam Wangchuk arrested under NSA
खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के हिंसक होने की खबर इस हफ्ते चर्चा में रही। सरकार ने इस हिंसा के लिए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया। वांगचुक पर एनएसए लगाया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार, विजय त्रिवेदी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 

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रामकृपाल सिंह: इस तरह की चीजों में कुछ बेगुनाह लोग भी फंस जाते हैं। हो सकता है इस मामले में भी कई लोग निर्दोष हों। इतनी बड़ी हिंसा से बचा जा सकता था। अभी मैं किसी पर आरोप प्रत्यारोप से बचना चाहूंगा। क्योंकि पूरा सच अभी सामने नहीं आया है। लेकिन ये असंतोष एक दिन में नहीं फैला। हमारी खूफिया एजेंसियों को भी पहले से सतर्क रहने की जरूरत थी। 

अवधेश कुमार: इस समय देश में जो भी आंदोलनकारी हैं। उन्हें किसी भी मुद्दे पर ज्यादा सतर्क, ज्यादा जागरुक होने की जरूरत है। सुबह कोई प्रदर्शन शुरू होते है, शाम तक सबकुछ खत्म करने की तैयारी हो जाती है। इस समय इस तरह की चीजें बढ़ीं है। इसलिए किसी भी आंदोलन को करने वाले को सतर्क रहने की जरूरत है। इस मामले में सरकार की ओर से ज्यादातर मांगे मान ली हैं। सिर्फ छठी अनुसूची और स्वतंत्र राज्य के दर्जे पर गतिरोध था। इसके बाद भी अगर हिंसा हो रही है तो इस हिंसा को कैसे न्याय संगत ठहराया जा सकता है। 


 
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विजय त्रिवेदी: सरकार अगर जाग रही होती तो ये हिंसा नहीं होती। मैं हिंसा के समर्थन में नहीं हूं, लेकिन हैरानी की बात है कि आंदोलनकारियों की हम आतंकवादियों से तुलना कर रहे हैं। सरकारों का ये चरित्र है कि वो किसी आंदोलन को विदेशी ताकतों का हाथ बता देती हैं। चाहे वो जेपी का आंदलोन रहा हो, चाहे वीपी सिंह का बोफोर्स को लेकर हुआ आंदोलन हो या फिर अन्ना का आंदोलन रहा हो सब के वक्त की सरकारों ने इन्हें विदेशी ताकतों का हाथ बताया। यही अब हो रहा है। यही सरकारों का चरित्र रहा है। 

अनुराग वर्मा: इतना बड़ा आंदोलन और इतनी बड़ी हिंसा एक रात में नहीं हुई। सोनम वांगचुक के पास रातोंरात इतनी विदेशी फंडिंग नहीं आई। ये सब लम्बे समय से हो रहा था, लेकिन हमारी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। क्या आप विदेशी फंडिंग से देश को डि स्टेब्लाइज करना चाहते हैं। आंदोलन करने का अधिकार हम सबको है, पहले के आंदोलन आंतरिक थे। आज हमारे यहां के आंदोलन की तुलना उस समय से नहीं की जा सकती है। 


 

समीर चौंगावकर: मुझे लगता है कि केंद्र सरकार बेहोशी की हालत में थी। इतना महत्वपूर्ण क्षेत्र है वहां एक व्यक्ति के पास विदेशों से पैसा आ रहा है सरकार को पता ही नहीं है। मुझे लगता है कि ये केंद्र सरकार की गलती है। एफसीआरए पर सरकार ने जरूर बेहतर काम किया है। एफसीआरए के नाम पर जिन संस्थाओं के पास पैसा आ रहा है उसे देखना केंद्र सरकार का काम है। इस पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिस तरह से हिंसा हुई उसके बाद सोनम वांगचुक पर एनएसए लगा दिया गया मैं इससे सहमत नहीं हूं।


 
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