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केरलम: नौ साल की बच्ची के पेट में रहता था दर्द, सर्जरी के बाद जो निकला उसे देख डॉक्टर भी रह गए हैरान

Sat, 03 Oct 2026 12:35 PM IST
अमन मौर्या पीटीआई, तिरुवनंतपुरम, केरलम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम, केरलम Published by: अमन मौर्या Updated Sat, 03 Oct 2026 12:35 PM IST
सार

केरलम में नौ साल की बच्ची के पेट से एक किलो बालों का गुच्छा निकाला गया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची 'रैपुन्जेल सिंड्रोम' से पीड़ित थी। सफल सर्जरी के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। दुनिया भर में इसके 100 से भी कम मामले सामने आए हैं।

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रैपुन्जेल सिंड्रोम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केरलम के तिरुवनंतपुरम से चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक प्राइवेट हॉस्पिटल में सर्जरी करके नौ साल की एक लड़की के पेट और छोटी आंत से एक किलो बालों का गुच्छा निकाला गया। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि लड़की को 'रैपुन्जेल सिंड्रोम' था। यह सर्जरी पास के नेय्याट्टिनकारा स्थित निम्स मेडिसिटी में हुई। हॉस्पिटल के बयान के मुताबिक, लड़की को लगातार पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
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डॉक्टर ने क्या बताया?
अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन से लड़की की आंत में गंभीर रुकावट का पता चला और बाद में एंडोस्कोपी से पेट और छोटी आंत में बालों का एक बड़ा गुच्छा जमा होने की पुष्टि हुई थी। हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. बीजू आई जी नायर की देखरेख में एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया के जरिए लड़की के पेट से बालों के इस गुच्छे को निकाला गया। डॉक्टर ने बताया कि अब लड़की ठीक है, उसने सामान्य रूप से खाना-पीना शुरू कर दिया है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
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क्या है 'रैपुन्जेल सिंड्रोम'?
'रैपुन्जेल सिंड्रोम' एक बहुत ही दुर्लभ स्थिति है जिसमें ट्राइकोबेजोअर पेट से छोटी आंत तक फैल जाता है। मेडिकल लिटरेचर के अनुसार, यह आमतौर पर किशोर लड़कियों में देखा जाता है। हॉस्पिटल के अधिकारियों ने बताया कि दुनिया भर में इसके 100 से भी कम मामले सामने आए हैं। डॉ. नायर ने बताया कि ट्राइकोबेजोअर, या बालों का गुच्छा, तब बनता है जब कोई व्यक्ति बार-बार बाल खींचता है और निगलता है। निगले गए बाल पच नहीं पाते और धीरे-धीरे पेट में जमा होकर एक सख्त गुच्छा बना लेते हैं, जिससे समय के साथ आंत में रुकावट आ सकती है।

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सर्जिकल टीम में सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राजेंद्रन एस, मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. निहार, एनेस्थेटिस्ट डॉ. इजास, पीडियाट्रिक्स और नियोनेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. हसीना और नर्सिंग स्टाफ सदस्य श्रीकुट्टी शामिल थे।
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