खाड़ी में तेल सप्लाई पर खतरा: सऊदी और कतर में अमेरिका ने भेजीं खतरनाक मिसाइलें, क्या ईरान से युद्ध का डर बढ़ा
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब और कतर में दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की हैं। इनका मकसद खाड़ी की अहम तेल और गैस सुविधाओं की सुरक्षा करना है। आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ा तो ईरान इन ठिकानों को निशाना बना सकता है। ऐसे में क्या खाड़ी की ऊर्जा व्यवस्था खतरे में है? क्या इसका असर तेल की कीमतों और भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर भी पड़ सकता है?
विस्तार
ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र की तेल और गैस सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने सऊदी अरब और कतर में दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की हैं। एक बैटरी सऊदी अरब की एक अहम तेल सुविधा की सुरक्षा के लिए भेजी गई है। दूसरी कतर की एक प्रमुख गैस सुविधा की रक्षा के लिए तैनात की गई है। यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बड़े सैन्य अभियान की आशंका बनी हुई है। सऊदी अरब और कतर को डर है कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े हमले शुरू किए तो जवाबी कार्रवाई में उनकी ऊर्जा सुविधाएं निशाने पर आ सकती हैं।
अमेरिका ने सऊदी अरब और कतर में पैट्रियट मिसाइलें क्यों भेजीं?
- अमेरिकी सेना की इस तैनाती का सीधा संबंध खाड़ी की महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा से है। सऊदी अरब दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है। कतर प्राकृतिक गैस का बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इन देशों की तेल और गैस सुविधाओं पर बड़ा हमला केवल स्थानीय नुकसान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
- समुद्री रास्तों में भी रुकावट आ सकती है। इसका असर कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की अहम ऊर्जा सुविधाओं के आसपास हवाई और मिसाइल सुरक्षा मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में सऊदी अरब और कतर के नेताओं ने ट्रंप से ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर बड़े हमले से बचने की अपील भी की थी। उन्हें डर था कि इसके जवाब में ईरान उनके तेल और गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है।
अगर खाड़ी की तेल-गैस सुविधाओं पर हमला हुआ तो क्या होगा?
खाड़ी की ऊर्जा व्यवस्था में किसी बड़े व्यवधान का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का कारोबार होता है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री रास्ते वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर किसी संघर्ष के कारण इन रास्तों से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन और उद्योगों पर पड़ सकता है। भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए खाड़ी में लंबे समय तक तनाव रहने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। मौजूदा तनाव के बीच खाड़ी के शेयर बाजारों और ऊर्जा बाजारों पर भी अनिश्चितता का असर दिखाई दे रहा है।
अमेरिका के पास पैट्रियट मिसाइलों का कितना भंडार बचा है?
अमेरिका के लिए यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब उसके मिसाइल रक्षा भंडार पर भी दबाव है। एक अमेरिकी रणनीतिक अध्ययन के मुताबिक ईरान के साथ संघर्ष के दौरान पैट्रियट इंटरसेप्टर का इस्तेमाल काफी बढ़ा है। जुलाई के आकलन में अमेरिका के पास 1,000 से कम पैट्रियट इंटरसेप्टर बचने का अनुमान लगाया गया था। इस कारण नए संघर्ष की स्थिति में अमेरिका और उसके सहयोगियों के सामने मिसाइल रक्षा क्षमता बनाए रखने की चुनौती है।