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इसरो साजिश: मामले में केरल पुलिस के दो अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी से अंतरिम राहत
Tue, 27 Jul 2021 03:22 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, कोच्चि।
एजेंसी, कोच्चि।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 27 Jul 2021 03:22 AM IST
सार
- पूर्व पुलिस अधिकारियों एस विजयन और थंपी एस दुर्गा दत्त की संयुक्त अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई को अगले हफ्ते तक स्थगित करने की सीबीआई के आग्रह के बाद जस्टिस अशोक मेनन ने दोनों अधिकारियों को राहत प्रदान की
- अंतरिम राहत का आदेश मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त तक प्रभावी रहेगा
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kerala high court
- फोटो : PTI
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विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को इसरो जासूसी मामले में दो पूर्व पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। सीबीआई ने इन दोनों के खिलाफ 1994 इसरो जासूसी मामले में वैज्ञानिक नंबी नारायण को हिरासत और फिर गिरफ्तार करने, अपहरण, फर्जी सुबूतों को निर्माण करने, आपराधिक साजिश समेत विभिन्न अपराधों में मामला दर्ज किया है।
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पूर्व पुलिस अधिकारियों एस विजयन और थंपी एस दुर्गा दत्त की संयुक्त अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई को अगले हफ्ते तक स्थगित करने की सीबीआई के आग्रह के बाद जस्टिस अशोक मेनन ने दोनों अधिकारियों को राहत प्रदान की।
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सीबीआई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सुवीन आर मेनन ने भी आदेश की पुष्टि की और कहा कि कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किए जा रहे हैं तो उन्हें 50,000 रुपये के बॉन्ड और इतनी ही रकम की दो जमानत पर रिहा किया जाए। अंतरिम राहत का आदेश मामले की अगली सुनवाई दो अगस्त तक प्रभावी रहेगा। ये दोनों पूर्व पुलिस अधिकारी वैज्ञानिक नंबी नारायण और दो मालदीव के नागरिकों को गिरफ्तार करने वाली विशेष जांच दल का हिस्सा थे।
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दूसरी तरफ इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन को झूठे जासूसी मामले में फंसाने और प्रताड़ना मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) डीके जैन के नेतृत्व में बनाई गई कमेटी द्वारा दर्ज रिपोर्ट को मुकदमे का आधार नहीं बनाया जा सकता।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर चुकी सीबीआई को और भी तथ्य जुटाने की जरूरत है। न्यायाधीश एएम खानविलकर और संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि सिर्फ रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। उन्हें जांच करने के साथ-साथ कागजात जमा करने होंगे और तब जाकर कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। आखिरकार यह जांच का विषय है जिसे पूरा किया जाना है। बेंच ने कहा कि सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त ने निवेदन किया था कि कमेटी की रिपोर्ट को उनके साथ साझा की जाए क्योंकि सीबीआई को उन पर काफी अधिक भरोसा है।
बेंच ने कहा कि इस रिपोर्ट से कुछ नहीं बदला जा सकेगा। रिपोर्ट सिर्फ प्रारंभिक सूचना है। आखिरकार सीबीआई ही इसकी जांच करेगी, जिसके परिणाम सामने आएंगे। वहीं इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर इस रिपोर्ट का अंश है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पहले ही कहा था कि सिर्फ कमेटी की रिपोर्ट को लोगों के सामने नहीं लाए जा सकते और कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए अधिकारी स्वतंत्र हैं।
क्या है मामला?
यह मामला वर्ष 1994 का है। इसमें आरोप है कि कुछ गोपनीय दस्तावेज अन्य देश के लोगों को सौंपा गया था। इस मामले में वैज्ञानिक नंबी नारायणन को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि नारायणन की गिरफ्तारी अवैध थी और केरल के तत्कालीन आला पुलिस अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं। इस मामले ने राजनीति जगत में भी विवाद खड़ा कर दिया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।