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Anti-UCC: केरल की मुस्लिम संस्था ने यूसीसी के विरोध का दिया संकेत, कहा- सार्वजनिक आंदोलन शुरू हो सकता है

Sun, 02 Jul 2023 01:31 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, मलप्पुरम/कोच्चि।
पीटीआई, मलप्पुरम/कोच्चि। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 02 Jul 2023 01:31 PM IST
सार

केरल में विपक्षी कांग्रेस ने भी कहा कि यूसीसी की आवश्यकता नहीं है और पार्टी ने 2018 से ही इसके विरोध का संकेत दिया था। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने 2018 में कहा था कि यूसीसी की आवश्यकता नहीं है।

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Kerala Muslim body indicates opposition to Uniform Civil Code
समान नागरिक संहिता (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाने के एलान के बाद से ही इसे लेकर राजनीति शुरू हो गई है। वहीं, ऐसा प्रतीत होता है कि मुस्लिम संगठन देश में समान नागरिक संहिता के लिए केंद्र के दबाव के सख्त खिलाफ हैं। केरल की एक सुन्नी शफीई स्कॉलर संस्था 'समस्त केरल जेम-इयाथुल उलमा' ने रविवार को प्रस्तावित कानून के विरोध का संकेत दिया है। 

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यूसीसी की आवश्यकता नहीं: केरल कांग्रेस
केरल में विपक्षी कांग्रेस ने भी कहा कि यूसीसी की आवश्यकता नहीं है और पार्टी ने 2018 से ही इसके विरोध का संकेत दिया था। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने 2018 में कहा था कि यूसीसी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भी हमारा यही रुख है। उन्होंने कहा कि जहां भाजपा शासित केंद्र ऐसे कदमों से लोगों को बांटने की कोशिश कर रहा है, वहीं कांग्रेस देश के लोगों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।
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सतीसन ने कहा, वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी ही हैं, जो हिंसा प्रभावित मणिपुर के लोगों से मिलने गए थे। वहां क्या हो रहा है, इस पर पीएम मोदी अभी भी चुप हैं। इस बीच, 'समस्त केरल जेम-इयाथुल उलमा' का यह रुख कांग्रेस की सहयोगी और केरल में विपक्षी यूडीएफ के सदस्य इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और पलायम जुमा मस्जिद के इमाम के यूसीसी के खिलाफ बोलने के मद्देनजर आया है।
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समस्त केरल जेम-इयाथुल उलमा के अध्यक्ष मुहम्मद जिफरी मुथुक्कोया ने रविवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि न केवल मुस्लिम, बल्कि अन्य धर्म - ईसाई, बौद्ध, जैन आदि भी यूसीसी को स्वीकार नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि जहां तक मुसलमानों का सवाल है, विवाह, तलाक, विरासत या उत्तराधिकार सभी उनके धर्म का हिस्सा हैं और इन्हें वैध बनाने के लिए कुछ नियम और कानून हैं जिनका पालन करना होगा। इसलिए जब उन्हें सार्वजनिक कानून का हिस्सा बनाया जाएगा, तो धर्म का एक हिस्सा खत्म हो जाएगा। मुसलमान इस पर सहमत नहीं हो सकते। वे ऐसे किसी भी कानून को स्वीकार नहीं कर सकते जो उनके धर्म का एक हिस्सा छीन लेता है क्योंकि विवाह, विरासत और उत्तराधिकार उनके विश्वास का हिस्सा हैं।

यूसीसी के खिलाफ एक बड़ा सार्वजनिक आंदोलन शुरू हो सकता है: मुहम्मद जिफरी मुथुक्कोया
उन्होंने तर्क दिया, सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, मेरा मानना है कि अन्य धर्मों - ईसाई, बौद्ध, जैन आदि को भी यूसीसी को स्वीकार करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, यहां तक कि आदिवासियों के भी विवाह और विरासत के संबंध में अपने कानून और नियम हैं। उन्होंने कहा, इन परिस्थितियों में किसी भी धर्म के लिए इसे स्वीकार करना मुश्किल होगा और ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जहां यूसीसी के पक्ष में नहीं होने वाले सभी लोगों सहित, इसके खिलाफ एक बड़ा सार्वजनिक आंदोलन शुरू करना पड़ सकता है।


इस सप्ताह की शुरुआत में, आईयूएमएल ने देश में यूसीसी को लागू करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एक चुनावी एजेंडा करार दिया था। आईयूएमएल ने कहा था कि उनके पास अपने नौ साल के शासन के दौरान दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है। आईयूएमएल नेताओं ने कहा कि यूसीसी "मुस्लिम मुद्दा नहीं" था, लेकिन मोदी इसे एक मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। उसके कुछ दिनों बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी यूसीसी को "चुनावी एजेंडा" करार दिया और केंद्र से इसे लागू करने के अपने कदम से पीछे हटने का आग्रह किया।

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