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केरल : भरतनाट्यम की मुस्लिम कलाकार को मंदिर में प्रस्तुति से रोका, थरूर का सवाल- कहां है 'वसुधैव कुटुंबकम'?

Tue, 29 Mar 2022 02:55 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 29 Mar 2022 02:55 PM IST
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Kerala: Muslim artist of Bharatanatyam barred from performing in temple, Tharoor asks where is Vasudhaiva Kutumbakam?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर । - फोटो : PTI

केरल के एक हिंदू मंदिर में भरतनाट्यम की मुस्लिम कलाकार वीपी मानसिया को रोकने पर विवाद खड़ा हो गया है। मानसिया ने फेसबुक पोस्ट लिखकर यह जानकारी दी। इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हैरानी जताते हुए सवाल किया है कि 'कहां है वसुधैव कुटुंबकम'। 

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केरल से सांसद थरूर ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि मानसिया को रोके जाने से वह 'हैरान' हैं। दूसरे धर्म जहां अपने धर्म का सम्मान करने वाले दूसरे लोगों को आकर्षित करने के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं। मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारा और सिनेगाग के दरवाजे सब के लिए खोल दिए जाते हैं, लेकिन मेरे कुछ हिंदू साथी हमारे मंदिरों को बाहरी लोगों के लिए बंद करना पसंद करते हैं। कहां है वसुधैव कुटुंबकम।'
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हिंदू से हुई है मानसिया की शादी
मानसिया ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा कि वह 21 अप्रैल को मंदिर में प्रस्तुति देने वाली थीं, लेकिन अब वह यह प्रस्तुति नहीं दे पाएगी। यह कार्यक्रम केरल के त्रिशूर के कूडलमानिक्यम मंदिर में होने वाला है। मानसिया केरल के मलप्पुरम जिले के एक मुस्लिम परिवार की हैं। उसकी शादी एक हिंदू व्यक्ति से हुई है और उसका कहना है कि उसका कोई धर्म नहीं है। 
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सिर्फ हिंदुओं को मंदिर के अंदर प्रस्तुति की इजाजत
कूडलमानिक्यम मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष प्रदीप मेनन ने कहा कि मानसिया एक प्रसिद्ध नर्तकी हैं, लेकिन नियमानुसार सिर्फ हिंदुओं को मंदिर के अंदर प्रस्तुति की इजाजत है। इस पर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि उन्हें कुछ मंदिरों के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर कुछ प्रतिबंधों की जानकारी है, लेकिन यह मंदिर परिसर में अन्य नर्तकियों के साथ एक नृत्य प्रदर्शन का मामला है। 


मानसिया ने कहा कि क्या धर्म के बगैर देश में रहना मुश्किल है? मेरे साथ ऐसा सलूक पूर्व में भी कई बार हो चुका है। गुरवयुर के श्रीकृष्ण मंदिर में भी प्रस्तुति नहीं देने दी गई थी। केरल की पूर्व मंत्री केके शैलजा ने भी मंदिर बोर्ड के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है। हमें इस मानसिकता को छोड़ना पड़ेगा, अन्यथा देश में सांप्रदायिकता बढ़ेगी। 

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