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Mohan Bhagwat: मोहन भागवत बोले- भारत को अब सोने की चिड़िया नहीं, शेर बनना चाहिए

Sun, 27 Jul 2025 06:38 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 27 Jul 2025 06:38 PM IST
सार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने केरल में कहा कि भारतीय शिक्षा सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीना और त्याग सिखाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी नहीं, आत्मनिर्भरता और समाज सेवा होनी चाहिए। साथ ही युवाओं को शिक्षा को करियर से ऊपर उठाकर समाज कल्याण का माध्यम बनाना चाहिए।

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Kerala Mohan Bhagwat Said Bharatiya education teaches sacrifice and living for others News In Hindi
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, भारत को अब सोने की चिड़िया बनने की जरूरत नहीं है, बल्कि अब शेर बनने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, यह जरूरी है क्योंकि दुनिया ताकत को समझती है। इसलिए भारत को शक्तिशाली बनना होगा। उसे आर्थिक दृष्टि से भी समृद्ध बनना होगा। संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है जिसका अनुवाद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संविधान में वर्णित 'इंडिया जो कि भारत है' के बारे में कहा, यह ठीक है लेकिन भारत, भारत है और इसलिए लिखते या बोलते समय हमें सिर्फ भारत नाम ही इस्तेमाल करना चाहिए। भारत की पहचान का सम्मान इसलिए है क्योंकि यह भारत है। यदि आप अपनी पहचान ही खो देंगे तो भले ही आपमें अन्य कितने भी अच्छे गुण हों, दुनिया में आपका सम्मान नहीं होगा।

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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय शिक्षा की विशेषताओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली सिर्फ ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में दूसरों के लिए जीने और त्याग करने की भावना भी सिखाती है। केरल में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन ज्ञान सभा में लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो इंसान को कहीं भी अपने दम पर जीने की क्षमता दे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह ऐसी होनी चाहिए कि व्यक्ति अपने आत्मबल और कौशल के आधार पर जीवन यापन कर सके।

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भारतीय शिक्षा पद्धति समाज सेवा को प्राथमिकता देती है- भागवत
मोहन भागवत ने आगे कहा कि पारंपरिक भारतीय शिक्षा पद्धति जीवन मूल्यों, नैतिकता और समाज सेवा को प्राथमिकता देती है। शिक्षा का मकसद केवल पैसे कमाना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना होना चाहिए। कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल करियर का साधन न मानें, बल्कि इसे आत्मनिर्भरता और समाज कल्याण का माध्यम बनाएं।


भागवत ने भारत की ज्ञान परंपरा पर दिया जोर
भागवत ने भारत की ज्ञान परंपरा और विश्व के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत और विश्व गुरु भारत कभी भी युद्ध का कारण नहीं बनेगा और न ही किसी का शोषण करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने सदियों पहले मैक्सिको से लेकर साइबेरिया तक यात्रा की, वो भी पैदल या छोटी नावों से। लेकिन हमने कभी किसी की ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया, न किसी का राज्य छीना। बल्कि भारत ने दुनियाभर को सभ्यता और संस्कृति सिखाई।

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भारतीय शिक्षा लोगों को त्याग सिखाती है- भागवत
भागवत ने ये भी कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो किसी भी इंसान को कहीं भी अपने दम पर जीवन जीने की क्षमता दे। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा लोगों को त्याग और दूसरों के लिए जीना सिखाती है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अगर कोई चीज इंसान को केवल स्वार्थी बनाना सिखाती है, तो वह शिक्षा नहीं हो सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना और उसमें सेवा, संस्कार व त्याग की भावना भरना होना चाहिए।


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राज्यपाल आर्लेकर ने एनईपी 2020 की खासियत पर दिया जोर
वहीं इसी कार्यक्रम के दौरान केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) की खासियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 भारत की शिक्षा प्रणाली को उपनिवेशिक सोच से मुक्त करने की पहली गंभीर कोशिश है। आर्लेकर ने कहा कि विकसित भारत केवल एक आर्थिक विचार नहीं है, बल्कि इसका मतलब समाज का समग्र विकास है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि भारतीय सोच और मूल्यों पर आधारित विकास को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नई शिक्षा नीति भारत के सांस्कृतिक और आत्मनिर्भर स्वरूप को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है।

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