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Kerala: केरल हाईकोर्ट- गृहिणी भी होती है राष्ट्र निर्माता, वर्किंग वूमेन की तरह मिले मुआवजा
Sun, 19 Feb 2023 04:49 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
एएनआई, कोच्चि
एएनआई, कोच्चि
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sun, 19 Feb 2023 04:49 AM IST
सार
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि केएसआरटीसी का तर्क कि गृहिणी कोई आय नहीं कमाती है इसलिए, विकलांगता और अन्य सुविधाओं के लिए दिए जाने वाला मुआवजे के लिए पात्र नहीं है, अपमानजनक और समझ से परे है।
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केरल उच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
केरल उच्च न्यायालय ने केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) को हादसे में पीड़िता को इस आधार पर मुआवजा देने से इनकार करने के लिए फटकार लगाई कि वह एक गृहिणी है और कोई पैसा नहीं कमाती है। कोर्ट ने इसे अपमानजनक और समझे के परे बताया है। कोर्ट ने गृहिणी की भूमिका को राष्ट्र निर्माता बताते हुए बेहतर मुआवजा देने का आदेश दिया है।
सीट से गिरने के बाद महिला को आई थी चोट
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन की पीठ ने कहा कि केएसआरटीसी का यह रुख अपमानजनक था और कहा कि हादसे के लिए मुआवजा एक गृहिणी और वर्किंग वूमेन के लिए समान होना चाहिए। एक गृहिणी भी अपने परिवार को पूरा समय देती है। बता दें कि, 24 अगस्त 2006 को केएसआरटीसी के स्वामित्व वाली एक बस में यात्रा के दौरान एक महिला घायल हो गई थी। ड्राईवर ने जल्दबाजी में बस के ब्रेक लगा दिए। जिसके चलते महिला अपनी सीट से नीचे गिर गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। अपीलकर्ता का दावा है कि गंभीर चोटें आने की वजह से उसे लंबे समय तक उपचार से गुजरना पड़ा और वह बिस्तर पर पड़ी रही। वह मानसिक तनाव में भी रही।
महिला सच्ची राष्ट्र निर्माता
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि केएसआरटीसी का तर्क कि गृहिणी कोई आय नहीं कमाती है इसलिए, विकलांगता और अन्य सुविधाओं के लिए दिए जाने वाला मुआवजे के लिए पात्र नहीं है, अपमानजनक और समझ से परे है। घर में एक मां और पत्नी की भूमिका तुलना से परे है, और वह एक सच्ची राष्ट्र निर्माता है। वह अपना पूरा समय परिवार को देती है। साथ ही अगली पीढ़ी को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास करती है। गृहिणी की भूमिका पर न्यायाधीश ने कहा कि एक मां और पत्नी के रूप में उनका योगदान अमूल्य है।
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महिला ने मांगे थे दो लाख रुपये
अदालत ने मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के उस आदेश को चुनौती देने वाली गृहिणी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया, उसे केएसआरटीसी बस चालक द्वारा जल्दबाजी में ब्रेक लगाने के कारण लगी गंभीर चोटों के लिए मुआवजे के रूप में केवल 40,214 रुपये दिए, इसके बजाय महिला ने 2 लाख रुपये मांगे, क्योंकि उसे घटना के बाद लंबे समय तक इलाज से गुजरना पड़ा।
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सीट से गिरने के बाद महिला को आई थी चोट
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन की पीठ ने कहा कि केएसआरटीसी का यह रुख अपमानजनक था और कहा कि हादसे के लिए मुआवजा एक गृहिणी और वर्किंग वूमेन के लिए समान होना चाहिए। एक गृहिणी भी अपने परिवार को पूरा समय देती है। बता दें कि, 24 अगस्त 2006 को केएसआरटीसी के स्वामित्व वाली एक बस में यात्रा के दौरान एक महिला घायल हो गई थी। ड्राईवर ने जल्दबाजी में बस के ब्रेक लगा दिए। जिसके चलते महिला अपनी सीट से नीचे गिर गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। अपीलकर्ता का दावा है कि गंभीर चोटें आने की वजह से उसे लंबे समय तक उपचार से गुजरना पड़ा और वह बिस्तर पर पड़ी रही। वह मानसिक तनाव में भी रही।
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महिला सच्ची राष्ट्र निर्माता
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि केएसआरटीसी का तर्क कि गृहिणी कोई आय नहीं कमाती है इसलिए, विकलांगता और अन्य सुविधाओं के लिए दिए जाने वाला मुआवजे के लिए पात्र नहीं है, अपमानजनक और समझ से परे है। घर में एक मां और पत्नी की भूमिका तुलना से परे है, और वह एक सच्ची राष्ट्र निर्माता है। वह अपना पूरा समय परिवार को देती है। साथ ही अगली पीढ़ी को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास करती है। गृहिणी की भूमिका पर न्यायाधीश ने कहा कि एक मां और पत्नी के रूप में उनका योगदान अमूल्य है।
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महिला ने मांगे थे दो लाख रुपये
अदालत ने मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के उस आदेश को चुनौती देने वाली गृहिणी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया, उसे केएसआरटीसी बस चालक द्वारा जल्दबाजी में ब्रेक लगाने के कारण लगी गंभीर चोटों के लिए मुआवजे के रूप में केवल 40,214 रुपये दिए, इसके बजाय महिला ने 2 लाख रुपये मांगे, क्योंकि उसे घटना के बाद लंबे समय तक इलाज से गुजरना पड़ा।