केरल हाइकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: शराब की दुकानों के बाहर अव्यवस्थाओं पर कहा, खरीदारों को भेड़-बकरी न समझे आबकारी विभाग
शराब की दुकानों के बाहर अव्यवस्थाओं को लेकर 2017 में दिए हाईकोर्ट के आदेश की पालना न करने पर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई में जस्टिस देवन रामाचंद्रन ने कहा, आबकारी विभाग कानूनी संस्था है। उसे देखना चाहिए कि शराब खरीदने वालाें से मवेशियों जैसा व्यवहार न हो।
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केरल हाईकोर्ट ने आबकारी विभाग व सरकारी कंपनी बेवरेजेस कॉरपोरेशन (बेवको) से कहा है कि वह शराब खरीदने वालों को भेड़-बकरियां समझने और उनसे वैसा आचरण करने से बाज आएं। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी शराब की दुकानों के बाहर लंबी लाइनों और अव्यवस्थाओं के संदर्भ में की।
शराब की दुकानों के बाहर अव्यवस्थाओं को लेकर 2017 में दिए हाईकोर्ट के आदेश की पालना न करने पर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई में जस्टिस देवन रामाचंद्रन ने कहा, आबकारी विभाग कानूनी संस्था है। उसे देखना चाहिए कि शराब खरीदने वालाें से मवेशियों जैसा व्यवहार न हो। उन्होंने कहा-मुझे खुद शराब की दुकानों पर लंबी कतारें देख शर्म आती है। हालांकि कुछ लोग इस पर भी गर्व करते हैं कि यह अनुशासन का शानदार प्रदर्शन है। उन्होंने उठाए कदमों की जानकारी एक महीने में देने को कहा। बेवको की शराब की ज्यादा दुकानें खोलने के निर्देश देने की मौखिक मांग से इंकार करते हुए कोर्ट ने कहा, यह काम सरकार का है।
कभी-कभी कोविड भी अच्छा
हाईकोर्ट ने कटाक्ष किया, कभी-कभी कोविड भी अच्छा हो सकता है। दरअसल उसने ऐसा अपने पुराने आदेश के बाद भी व्यवस्थाएं ठीक न होने, लेकिन अब काेविड में कुछ सुधार आने पर यह टिप्पणी की। कहा- आदेश पर न सही, महामारी के कारण ही सुधार आए।
एक पत्र पढ़ा, उस पर भी आपत्ति
हाईकोर्ट ने एक गृहिणी व मां का लिखा खत पढ़ते हुए कहा- शराब की दुकान बैंक के पास शिफ्ट हो रही है। पहले ही वहां पार्किंग की काफी समस्याएं हैं, जगह संकरी है। शराब की दुकान की वजह से महिलाओं और लड़कियों का गुजरना लगभग असंभव हो जाएगा। हाईकोर्ट ने इस पर कार्रवाई करने के लिए आबकारी विभाग व बेवको को निर्देश दिए।
आबकारी विभाग को चेताया, अब शिकायत आई तो खुद कोर्ट कार्रवाई करेगी। इस पर बेवको के वकील ने हिमाकत दिखाई, कहा- हाईकोर्ट को सारे पत्र पढ़ने की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने कड़े स्वर में जवाब दिया- हमारे पास ऐसे 50 पत्र हैं, लेकिन एक ही पढ़ा है। लोग क्षेत्र में शराब की दुकानें खुलने पर डरे रहते हैं। महिलाएं और लड़कियां घरों में बंद रहने को मजबूर हो जाती हैं। यह सही नहीं है।