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Kerala High Court: अरलम फार्म में हाथी के हमले से आदिवासी की मौत, केरल हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार

Sat, 28 Feb 2026 12:22 AM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: Shivam Garg Updated Sat, 28 Feb 2026 12:22 AM IST
सार

केरल हाईकोर्ट ने कन्नूर के अरलम फार्म में हाथी के हमले से आदिवासी युवक की मौत पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सुरक्षा इंतजामों को अपर्याप्त बताते हुए मुख्य सचिव समेत अधिकारियों को तलब किया।

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Kerala High Court Slams State Govt Over Tribal Man Death in Elephant Attack at Aralam Farm
केरल उच्च न्यायालय (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

कन्नूर जिले के अरलम फार्म क्षेत्र में हाथी के हमले में 44 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति की मौत के मामले में केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने सुरक्षा इंतजामों को बेहद नाकाफी बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। न्यायमूर्ति ए.के. जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन की खंडपीठ ने कहा कि अरलम फार्म और ट्राइबल रिहैबिलिटेशन एंड डेवलपमेंट मिशन (TRDM) क्षेत्र के आसपास की स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

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घने कोहरे में नहीं मिल सका हाथी, गई एक और जान
मृतक अनीश की जान उस समय चली गई जब जंगली हाथी ने उन पर हमला कर दिया। बताया गया कि अरलम वाइल्डलाइफ रेंज की नाइट पेट्रोलिंग रैपिड रिस्पॉन्स टीम भारी कोहरे के कारण हाथी का पता नहीं लगा सकी। इस चूक ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आदिवासी कॉलोनी के निवासियों में भरोसा जगाने के लिए जो कदम उठाए गए, वे पूरी तरह से अपर्याप्त हैं।
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‘हर जान की हानि प्रशासन की विफलता’
खंडपीठ ने सख्त लहजे में कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में हर मानव जीवन की हानि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की विफलता को दर्शाती है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी को प्रशासनिक लापरवाही से कमजोर नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट की निगरानी के बावजूद यह स्थिति है, तो उन क्षेत्रों का क्या हाल होगा जो न्यायिक निगरानी में नहीं हैं।

शीर्ष अधिकारियों को किया तलब
अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें अरलम फार्म क्षेत्र के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, अनुसूचित जाति/जनजाति विभाग के सचिव और मुख्य वन्यजीव संरक्षक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, ताकि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों की जानकारी दे सकें।

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