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HC: 'महिला के शरीर पर टिप्पणी भी यौन उत्पीड़न', केरल हाईकोर्ट का सहकर्मी के खिलाफ दर्ज केस रद्द करने से इनकार
Thu, 09 Jan 2025 05:27 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
एजेंसी, कोच्चि
एजेंसी, कोच्चि
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 09 Jan 2025 05:27 AM IST
सार
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ए बदरुद्दीन ने केरल राज्य बिजली बोर्ड (केएसईबी) के एक पूर्व कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी। याचिका में पूर्व कर्मचारी ने अपने खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी महिला के शरीर की बनावट पर की गई टिप्पणी यौन उत्पीड़न के तहत आती है और इसे एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को भी रद्द करने से इन्कार कर दिया।
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मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ए बदरुद्दीन ने केरल राज्य बिजली बोर्ड (केएसईबी) के एक पूर्व कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी। याचिका में पूर्व कर्मचारी ने अपने खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी। अपने फैसले में जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा, ऐसी टिप्पणी को यौन उत्पीड़न का अपराध मानते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपी के संदेशों और टिप्पणियों में यौन उत्पीड़न के सभी तत्व मौजूद थे। महिला के सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाने का इरादा स्पष्ट था और यह अपराध की श्रेणी में आता है।
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आरोपी की दलील- गलत उद्देश्य से नहीं की टिप्पणी
आरोपी ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसने कभी किसी गलत उद्देश्य से टिप्पणी नहीं की थी। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि आरोपी के कॉल और संदेशों में यौन उत्पीड़न के स्पष्ट तत्व थे, जिसका उद्देश्य महिला को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करना था।
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