केरल हाईकोर्ट: महिलाओं को रात में काम करने से नहीं रोका जा सकता, कंपनियां रोजगार से नहीं कर सकती वंचित
केरल की हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक फैसले में कहा, ‘किसी योग्य उम्मीदवार को सिर्फ इस आधार पर नियुक्त करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह एक महिला है और रोजगार की प्रकृति के अनुसार उसे रात में काम करना होगा। जबकि महिला का योग्य होना ही उसकी नौकरी के लिए सुरक्षात्मक प्रावधान है।’
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देश में आज भी कई संस्थान ऐसे हैं जो रात के समय महिलाओं से काम नहीं कराते हैं। वे रात के समय काम करने के लिए महिलाओं की जगह पुरुषों को नौकरी देने में वरीयता देते हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में रात की नौकरी के लिए योग्य महिलाएं रोजगार से वंचित हो जाती हैं। हालांकि, अब केरल में ऐसा नहीं होगा। दरअसल, केरल की हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक फैसले में कहा, ‘किसी योग्य उम्मीदवार को सिर्फ इस आधार पर नियुक्त करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह एक महिला है और रोजगार की प्रकृति के अनुसार उसे रात में काम करना होगा। जबकि महिला का योग्य होना ही उसकी नौकरी के लिए सुरक्षात्मक प्रावधान है।’
बता दें, जस्टिस अनु शिवरामन की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड द्वारा सिर्फ पुरुष उम्मीदवारों को ही आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। कंपनी के इस प्रावधान को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ट्रेजा जोसफीन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वह कंपनी में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी (सेफ्टी) हैं। उन्होंने अदातल से कहा कि यह अधिसूचना भेदभावपूर्ण है।
कंपनी द्वारा जारी अधिसूचना को पलटा
ऐसे में हाई कोर्ट ने कहा कि हमें कार्यस्थल को बेहतर और समानता वाला बनाना है न कि परिस्थितियों का हवाला देकर महिलाओं को रोजगार के मौकों से वंचित करना है। हमें आधी आबादी को हर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा अवसर देना है। इसके साथ ही कोर्ट ने कंपनी द्वारा नौकरी के लिए जारी अधिसूचना को पलट दिया। हाईकोर्ट ने कहा, ‘इस तरह की अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है। जबकि फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के प्रावधान महिलाओं को कार्यस्थल पर शोषण से बचाने के लिए हैं।’
कोर्ट की तरफ से कहा गया, ‘दुनिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में महिलाओं को केवल घर के काम में ही क्यों लगाए रखें। हम ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां आर्थिक विकास के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा, उड्डयन और सूचना प्रौद्योगिकी सहित कई उद्योगों में सभी समय पर काम करने के लिए लगाया जा रहा है। इस तरह की चुनौतियों का सामना कर महिलाओं ने साबित किया है कि वे हर समय किसी भी तरह का कार्य करने में सक्षम हैं।’