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चिंता: केरल हाईकोर्ट ने कहा- सिर पर भारी बोझ ढोना अमानवीय, खत्म हो एक्ट, सुधरनी चाहिए श्रमिकों की दशा

Wed, 15 Dec 2021 06:09 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, कोच्चि।
एजेंसी, कोच्चि। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 15 Dec 2021 06:09 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा श्रमिकों की दशा सुधारने का संशोधन कब लागू होगा, इस बारे में सरकार 21 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर बताए। 

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Kerala High Court said carrying heavy burden on the head is inhumane activity conditions of workers should be improved
केरल उच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने सिर या शरीर पर भारी बोझ (हेडलोड) ढोने को ‘अमानवीय गतिविधि’ करार देते हुए राज्य सरकार को ऐसे श्रमिकों की दशा सुधारने का निर्देश दिया है।

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मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, इस काम की इजाजत देने वाला हेडलोड वर्क्स एक्ट अतीत की निशानी है। हेडलोड एक अमानवीय गतिविधि है, जिसे खत्म होना चाहिए। हम हमारे नागरिकों को इस यातना के अधीन कैसे कर सकते हैं।
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जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा, हेडलोड श्रमिकों को मशीनों के जरिए भार ढोने का काम करने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। मशीनों की पैरवी करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका ऐसे लोगों की आजीविका खत्म करने का कोई इरादा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कानून से हेडलोड शब्द हटाकर लोडिंग का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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सरकार ने कोर्ट को बताया कि हेडलोड वर्क्स एक्ट में संशोधन होने वाला है, जिसका मसौदा तैयार है। इस पर कोर्ट ने कहा यह संशोधन कब लागू होगा, इस बारे में सरकार 21 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर बताए। 

जबरन जेंडर बदलने पर हो कठोर कार्रवाई
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि समलैंगिक (एलजीबीटीक्यूआई) समुदाय के लोगों के यौन आकर्षण या लिंग पहचान व अभिव्यक्ति के जबरन चिकित्सकीय रूपांतरण के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसी प्रक्रियाओं के लिए राज्य सरकार को दिशानिर्देश बनाने चाहिए।


हाईकोर्ट ने केरल सरकार को निर्देश देते हुए कहा, अगर चिकित्सकीय रूप से रूपांतरण चिकित्सा संभव है, तो इसके लिए दिशानिर्देश भी अनिवार्य हैं। सरकार ऐसे मामलों की जांच करे और जरूरी हो तो इनका अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई जाए।

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