{"_id":"6308f68676956a75c162db54","slug":"kerala-high-court-said-cannot-give-permission-for-any-new-religious-place-except-in-rare-cases","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kerala High Court: कोर्ट ने कहा- दुर्लभ मामलों को छोड़कर किसी नए धार्मिक स्थल के लिए अनुमति नहीं दे सकते","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Kerala High Court: कोर्ट ने कहा- दुर्लभ मामलों को छोड़कर किसी नए धार्मिक स्थल के लिए अनुमति नहीं दे सकते
Fri, 26 Aug 2022 10:06 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 26 Aug 2022 10:06 PM IST
सार
हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें मलप्पुरम जिले में अमरबालम ग्राम पंचायत में एक वाणिज्यिक भवन को मुस्लिम धार्मिक स्थल में तब्दील करने की अनुमति मांगी गई थी। इसी मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह आदेश दिया।
विज्ञापन
केरल उच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अवैध धार्मिक स्थलों को बंद करने का आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यदि जरूरी मंजूरी या गैरकानूनी तरीके से कोई धार्मिक स्थल या प्रार्थना गृह चलाया जा रहा है तो उसे बंद करने के लिए आदेश जारी किया जाए। कोर्ट ने मामले में अपरिहार्य परस्थितियों व दुर्लभ मामलों को रियायत देने को भी कहा। कोर्ट ने किसी भवन को धार्मिक स्थल या उपासना गृह में तब्दील करने से रोकने के लिए भी एक अलग आदेश जारी करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
दरअसल, हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें मलप्पुरम जिले में अमरबालम ग्राम पंचायत में एक वाणिज्यिक भवन को मुस्लिम धार्मिक स्थल में तब्दील करने की अनुमति मांगी गई थी। इसी मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह आदेश दिया।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि धार्मिक स्थल के लिए अर्जी पर विचार करने के दौरान नजदीकी धार्मिक स्थल की दूरी का जिक्र भी आदेश या परिपत्र में स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिए। अपनी विशेष भोगौलिक स्थिति की वजह से केरल ईश्वर का स्थान कहा जाता है, लेकिन हम धार्मिक स्थलों और उपासना गृहों से तंग आ चुके हैं। हम दुर्लभ मामलों को छोड़कर किसी नए धार्मिक स्थल के लिए अनुमति देने की स्थिति में नहीं हैं।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि यदि हर हिंदू, ईसाई, मुस्लिम, यहूदी और पारसी सहित अन्य धर्मों के लोगों अपने आवास के नजदीक धार्मिक स्थल बनाना चाहेंगे, तो राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।