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HC: डॉ. वंदना दास की हत्या मामले में नहीं होगी CBI जांच, केरल हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
Tue, 06 Feb 2024 02:30 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Tue, 06 Feb 2024 02:30 PM IST
सार
डॉ. वंदना दास के पिता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि कोट्टारक्करा पुलिस ने अपना पल्ला झाड़ने की जल्दबाजी में मृतका के मित्र द्वारा दिए प्राथमिक बयान में कथित तौर पर छेड़छाड़ की।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल उच्च न्यायालय ने पिछले साल मई में कोल्लम जिले के एक तालुक अस्पताल में एक मरीज द्वारा डॉ. वंदना दास की हत्या किए जाने के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मंगलवार को कहा कि पुलिस जांच की ईमानदारी या विश्वसनीयता पर शक करने की कोई वजह नहीं है।
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पिता ने दी थी याचिका
बता दें, दास के पिता के. जी. मोहनदास ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि कोट्टारक्करा पुलिस ने अपना पल्ला झाड़ने की जल्दबाजी में मृतका के मित्र द्वारा दिए प्राथमिक बयान में कथित तौर पर छेड़छाड़ की। याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस अपनी सुरक्षा खामियों को छिपाने के लिए इस अपराध की बहुत उदासीन तरीके से जांच कर रही है।
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अदालत ने कही ये बात
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने यचिका खारिज कर कहा कि जिन मामलों में पुलिस शक के घेरे में होती है और उनके खिलाफ अंगुली उठाई जा सकती है और उनमें जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है। हालांकि, इस सिद्धांत कोई अटल नियम नहीं है। इस मामले में जैसा कि पहले देखा गया है कि किसी भी पुलिस अधिकारी पर किसी आपराधिक इरादे या कृत्य का कोई आरोप नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस पर केवल कायरतापूर्ण कृत्य का आरोप लगाया है।
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उन्होंने कहा, ‘याचिकाकर्ता ने पुलिस की ओर से चूक के सिवाय जांच के तरीके में कोई गंभीर खामी नहीं बताई है।’
यह है मामला
डॉक्टर दास की पिछले साल मई में कोल्लम जिले के एक तालुक अस्पताल में एक मरीज जी. संदीप ने हत्या कर दी थी, जो पेशे से एक स्कूल शिक्षक है। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। पुलिस संदीप को इलाज के लिए अस्पताल लाई थी, तभी 10 मई की सुबह उसने पैर की चोट के इलाज के दौरान शुरुआत में सर्जिकल कैंची से पुलिस अधिकारियों और एक व्यक्ति पर हमला किया और फिर डॉ. दास पर हमला कर दिया। उसने डॉ. दास पर कैंची से कई वार किए। डॉ. दास को इलाज के लिए तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।
अदालत ने कहा कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी को अस्पताल लाने वाले पुलिस अधिकारियों का घटनास्थल से कथित तौर पर भागते वक्त कोई आपराधिक इरादा था।