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Kerala: सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोच्चि में यौन शोषण का लगा है आरोप
Fri, 12 Sep 2025 12:10 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 12 Sep 2025 12:10 AM IST
सार
केरल हाईकोर्ट ने कोच्चि स्थित सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक वेणु गोपालकृष्णन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन पर एक महिला कर्मचारी से यौन शोषण करने और उसे व उसके पति को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश करने का आरोप है।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उस पर एक महिला कर्मचारी से यौन शोषण करने और उसे व उसके पति को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश करने का आरोप है।
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न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने कोच्चि स्थित सॉफ्टवेयर कंपनी चलाने वाले कक्कनाड निवासी वेणु गोपालकृष्णन (50) द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। गोपालकृष्णन पहले भी सुर्खियों में आ चुके हैं, जब उन्होंने अपनी लेम्बोर्गिनी उरुस कार का रजिस्ट्रेशन नंबर खरीदने के लिए 45.99 लाख रुपये का भुगतान किया था।
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पीड़िता-पति को हनीट्रैप में फंसाने के आरोप में किया गया था गिरफ्तार
यह मामला जुलाई का है, जब पीड़िता और उसके पति को पुलिस ने गोपालकृष्णन को हनी-ट्रैप में फंसाने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बाद में जमानत मिलने के बाद पीड़िता ने अदालत का रुख किया और दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है।
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जांच में नए तथ्य सामने आने पर दर्ज किया गया नया केस
इसके बाद अदालत ने पुलिस को मामले की जांच करने का आदेश दिया। जांच में नए तथ्य सामने आने पर पिछले महीने गोपालकृष्णन और उनके तीन कर्मचारियों- जैकब थम्पी, एबी पॉल और बिमलराज हरिदास के खिलाफ नया केस दर्ज किया गया। उन पर यौन शोषण, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोप लगे।
अदालत ने कहा- गोपालकृष्णन ने गंभीर अपराध किया है
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गोपालकृष्णन ने एक गंभीर अपराध किया है। इस बात की संभावना जताई कि वह सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकते हैं। अदालत ने कहा, 'जब किसी प्रतिष्ठान के मालिक पर ही दुष्कर्म समेत गंभीर अपराध करने का आरोप हो और ऐसे सबूत मौजूद हों जो यह साबित करते हों कि अपराध प्रथम दृष्टया उचित हैं, तो अग्रिम जमानत के आदेश से उसे संरक्षण देने से जांच अप्रभावी हो जाएगी। इसलिए, पहले आरोपी की अग्रिम जमानत अस्वीकार की जानी चाहिए।'
बाकी तीन आरोपियों को दी अग्रिम जमानत
हालांकि, अदालत ने बाकी तीन आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी, क्योंकि उनके खिलाफ यौन शोषण का कोई विशेष आरोप नहीं था। आदेश में कहा गया है, 'उनके खिलाफ आरोप वास्तविक शिकायतकर्ता को हनीट्रैप मामले में फंसाने की धमकियों से संबंधित हैं। उन याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, इस अदालत का मानना है कि उन्हें कुछ शर्तों के अधीन अग्रिम जमानत दी जा सकती है।'
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अदालत ने पुलिस जांच पर भी उठाए सवाल
अदालत ने पुलिस जांच में विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया, जिनमें प्राथमिकी में चूक और पीड़िता का बयान दर्ज करने में देरी शामिल है। अदालत ने कहा, 'यौन उत्पीड़न के आरोप की जिस तरह से जांच की जा रही है, उससे इस अदालत को भरोसा नहीं होता।' अदालत ने पाया कि पीड़िता का मोबाइल और लैपटॉप 29 जुलाई, 2025 को जब्त तो कर लिया गया था, लेकिन उसका कोई जप्ती पंचनामा तैयार नहीं किया गया। न ही तुरंत उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। अदालत ने कहा कि इस मामले में मोबाइल फोन और लैपटॉप का जब्ती आदेश 8 अगस्त, 2025 को ही तैयार किया गया था। अदालत ने आगे कहा, 'इस अवधि तक, वास्तविक शिकायतकर्ता के अलावा किसी और के पास फोन रहे होंगे।'