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DGHS Physiotherapist Directive: क्या फिजियोथेरेपिस्ट नाम के साथ डॉक्टर लिख सकेंगे? डीजीएचएस के नए निर्देश जारी

Thu, 11 Sep 2025 11:44 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 11 Sep 2025 11:44 PM IST
सार

DGHS Physiotherapist Directive:  क्या फिजियोथेरेपिस्ट अब अपने नाम के साथ डॉक्टर लिख सकेंगे? इस सवाल पर स्पष्टता आनी बाकी है। दरअसल, डीजीएचएस ने अपना निर्देश 24 घंटे से भी कम समय में वापस ले लिया है। महानिदेशालय ने अपने फैसले का कारण भी बताया है। जानिए पूरा मामला

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DGHS Physiotherapist Directive Withdrawn now can write doctor along names know details in hindi
फिजियोथेरेपी (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक (DGHS) ने फिजियोथेरेपिस्टों को अपने नाम के साथ 'डॉक्टर' के प्रयोग से रोकने वाले हालिया आदेश को वापस ले लिया है। महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा ने एक पत्र लिखकर कहा, इस विषय पर कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। मामले की गहन जांच और इस विषय पर विचार-विमर्श की जरूरत है। इसलिए 9 सितंबर को जारी किया गया पत्र निरस्त किया जाता है।

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दरअसल, 9 सितंबर को शर्मा ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के प्रमुख डॉ दिलीप भानुशाली को पत्र लिखकर कहा था कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के साथ 'डॉ.' का प्रयोग नहीं कर सकते, क्योंकि यह केवल पंजीकृत चिकित्सा चिकित्सकों के लिए आरक्षित है। उन्होंने दलील दी थी कि फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि 'डॉ.' लिखने से मरीजों को गुमराह होने का खतरा है, जिससे झोलाछाप प्रथा बढ़ सकती है।
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गौरतलब है कि नाम के साथ डॉक्टर लिखने का यह विवाद 'कम्पिटेंसी बेस्ड करिकुलम फॉर फिजियोथेरेपी' से जुड़ा है। राष्ट्रीय सहयोगी एवं स्वास्थ्य देखभाल पेशे आयोग (NCAHP) की तरफ से मार्च 2025 में प्रकाशित इस दस्तावेज में 'फिजियोथेरेपिस्ट' के लिए उपसर्ग (नाम से पहले) 'Dr' और प्रत्यय (नाम के बाद) 'PT' लिखे जाने का उल्लेख था। इस दस्तावेज के सामने आने के बाद भारतीय फिजिकल मेडिसिन एवं पुनर्वास संघ (IAPMR) समेत कई संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई थी।
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स्वास्थ्य सेवाओं की महानिदेशक डॉ सुनीता शर्मा ने अपने पत्र में करीब 22 साल पहले पारित आदेश का उल्लेख किया। उन्होंने पटना हाई कोर्ट के 2003 के  निर्णय का हवाला देकर कहा अगर फिजियोथेरेपिस्ट राज्य मेडिकल रजिस्टर में पंजीकृत नहीं हैं तो वे न आधुनिक चिकित्सा का अभ्यास कर सकते हैं और न ही नाम के साथ डॉक्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी प्रकार, पैरामेडिकल और फिजियोथेरेपी सेंट्रल काउंसिल बिल, 2007 की एथिक्स कमेटी ने भी स्पष्ट किया था कि नाम के साथ 'डॉ.' की उपाधि केवल आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी के पंजीकृत चिकित्सकों को ही जोड़नी चाहिए।

इसका कानूनी पहलू ये है कि फिजियोथेरेपिस्ट नाम के साथ अगर 'डॉ.' का इस्तेमाल करते हैं तो इसे इंडियन मेडिकल डिग्री अधिनियम, 1916 का उल्लंघन माना जाता है। इसके तहत दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है। हालांकि, DGHS ने अब इस आदेश को वापस लेते हुए कहा है कि फिजियोथेरेपिस्टों के लिए एक उपयुक्त और सम्मानजनक शीर्षक पर विचार किया जाएगा, जिससे जनता में भ्रम न फैले।


ये भी पढ़ें- DGHS: फिजियोथेरेपिस्ट को 'डॉक्टर' लिखने की अनुमति नहीं, स्वास्थ्य महानिदेशालय ने जारी किया निर्देश

बता दें कि बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने आईएमए को भेजे पत्र में कहा था कि फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं हैं। इसलिए उन्हें यह उपाधि इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। महानिदेशालय के मुताबिक भारतीय चिकित्सा डिग्री अधिनियम 1916 के तहत कोई भी व्यक्ति अगर बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के डॉक्टर की उपाधि इस्तेमाल करता है तो यह अवैध है और उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। महानिदेशालय ने कहा कि फिजियोथेरेपी की नई पाठ्यक्रम पुस्तिका से तुरंत इसे हटाया जाए। 

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