Kerala: 'इमरजेंसी में इलाज से इंकार नहीं कर सकते अस्पताल', अदालत का सख्त आदेश; मरीज को स्थिर करना अनिवार्य
पीठ ने आदेश दिया कि अस्पतालों में एक शिकायत डेस्क होनी चाहिए, रेफरेंस नंबर जारी करने के साथ सात दिनों के अंदर शिकायतों का समाधान करना चाहिए।
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केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कोई भी अस्पताल आपात स्थिति में आने वाले मरीजों को पहले भुगतान न करने पर इलाज मुहैया कराने से इन्कार नहीं कर सकता। संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार पर जोर देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा और पारदर्शिता से जुड़े प्रावधानों का उद्देश्य जनहित हैं। कोर्ट ने कहा राज्य का कोई भी अस्पताल या क्लिनिकल प्रतिष्ठान किसी आपातकालीन मरीज को पैसे न होने या दस्तावेजों की कमी के आधार पर प्राथमिक जीवन रक्षक इलाज देने से इन्कार नहीं कर सकता।
हर अस्पताल को अपनी क्षमता के मुताबिक मरीज को स्थिर स्थिति में लाने के जरूरी उपाय करने होंगे। जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी व जस्टिस श्याम कुमार वीएम की खंडपीठ ने राज्य क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट की वैधता बरकरार रखते हुए मरीजों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट ने कहा अस्पतालों को अपने रिसेप्शन व वेबसाइट पर मरीजों को दी जाने वाली सेवाओं और उनके लिए तय शुल्क स्पष्ट तौर पर दर्शाने होंगे।
खंडपीठ बुधवार को केरल प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन (केपीएचए) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केरल क्लिनिकल एस्टॅब्लिशमेंट (पंजीकरण एवं विनियमन) एक्ट, 2018 को बहाल रखने के लिए एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी गई थी। याचिका में मुख्यतः अधिनियम धारा 47 (आपातकालीन उपचार) व धारा 39 (शुल्कों का प्रदर्शन) को चुनौती दी गई थी।
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दिशा-निर्देशों का पालन नहीं तो निरस्त होगा पंजीकरण
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर केरल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट के तहत नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है। इसमें पंजीकरण निलंबन या रद्द करना शामिल है। इसके अलावा जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मरीजों को कोई परेशानी होने पर नागरिक, आपराधिक या सांविधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
रिसेप्शन व वेबसाइट पर सेवाएं व उनके निर्धारित शुल्क दर्शाने होंगे
पीठ ने आदेश दिया कि अस्पतालों में एक शिकायत डेस्क होनी चाहिए, रेफरेंस नंबर जारी करने के साथ सात दिनों के अंदर शिकायतों का समाधान करना चाहिए। गंभीर मामले डीएमओ की निगरानी में लाने चाहिए और हर महीने एक शिकायत रजिस्टर रखना चाहिए। अस्पताल में जरूरी सुविधाओं की जानकारी, बेड कैटगरी आईसीयू ओटी की उपलब्धता, इमेजिंग और लैबोरेटरी की सुविधाएं व एम्बुलेंस/संपर्क नंबर का ब्योरा स्पष्ट दर्शाया जाना चाहिए। अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं, उन पर लगने वाले शुल्क के बारे में जानकारी अंग्रेजी और मलयालम दोनों भाषाओं में होनी चाहिए।
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