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केरल हाईकोर्ट: भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को राहत, 10 साल पहले जारी गैर जमानती वारंट निरस्त

Wed, 23 Feb 2022 02:22 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, कोच्चि
पीटीआई, कोच्चि Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 23 Feb 2022 02:22 PM IST
सार

सुब्रमण्यम स्वामी 'द एक्सप्रेस मलयालम प्रा.लि. के चेयरमैन थे। इस कंपनी में एक निवेशक ने 1986 में पैसा निवेश किया था। यह उसे नहीं वापस नहीं मिला तो उसने उपभोक्ता फोरम में केस लगाया था।

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Kerala HC quashes NBW against Subramanian Swamy over non-payment of investors deposits in publication
सुब्रमण्यम स्वामी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को गिरफ्तार करने के लिए 2012 में जारी गैर जमानती वारंट NBW केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया। यह आदेश के एक उपभोक्ता फोरम ने जारी किया था। 

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सुब्रमण्यम स्वामी 'द एक्सप्रेस मलयालम प्रा.लि. के चेयरमैन थे। इस कंपनी में एक निवेशक ने 1986 में पैसा निवेश किया था। यह उसे नहीं वापस नहीं मिला तो उसने उपभोक्ता फोरम में केस लगाया था।हाईकोर्ट के जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने इसे मामले में 24 अप्रैल 1996 के उपभोक्ता फोरम के आदेश व कार्रवाई को भी निरस्त कर दिया। फोरम ने स्वामी को निवेशक के पैसों के भुगतान के लिए जिम्मेदार बताया था। इसे स्वामी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 
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स्वामी ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में उपभोक्ता फोरम के 1996 के आदेश व उसके बाद 2012 में जारी गैर जमानती वारंट निरस्त करने का आग्रह किया था। सुनवाई के दौरान स्वामी ने दलील दी कि उन्हें फोरम ने अपना पक्ष रखने का कोई मौका नहीं दिया। उन्हें नोटिस भी नहीं दिया गया, इसलिए फोरम का आदेश लागू नहीं किया जा सकता। 
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उन्होंने यह भी कहा कि फोरम के आदेश में कहा गया है कि एक वकील ने उनका पक्ष रखा था, लेकिन उन्होंने कोई वकालातनामा नहीं किया था। आरटीआई अर्जी के जवाब में उन्हें यह जानकारी दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रकाशन कंपनी 2003 हाईकोर्ट के आदेश से बंद हो गई। इसके काफी बाद उनके खिलाफ वारंट जारी किए गए, इसलिए फोरम के आदेश मानने योग्य नहीं हैं। 

इस कंपनी को बंद करने की अर्जी एक बैंक ने 1994 में हाईकोर्ट में दायर की थी, जबकि फोरम में 1996 में केस दायर हुआ। फोरम हाईकोर्ट की मंजूरी के बगैर इस केस की सुनवाई नहीं कर सकती थी, क्योंकि उसने कंपनी के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। 


हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता (सुब्रमण्यम स्वामी) भारत के पूर्व कानून और न्याय मंत्री हैं। यह सब जानते हैं कि वे एक राजनेता हैं और संसद सदस्य भी। इसलिए कोर्ट को याचिकाकर्ता के इस कथन पर अविश्वास करने की जरूरत नहीं है कि उन्हें उपभोक्ता फोरम का कोई नोटिस नहीं मिला। वकालातनामे को लेकर भी उनका कथन सही प्रतीत होता है। इसलिए यह माना जा सकता है कि उन्हें सुनवाई का मौका दिए बगैर फोरम ने आदेश दिए। इसलिए फोरम के सभी आदेशों को खारिज किया जाता है। 

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