Kerala: हाईकोर्ट ने दिया केंद्र सरकार को झटका, रद्द हुई पर्यावरण मंत्रालय की ईआईए अधिसूचना
केरल हाईकोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी ईआईए अधिसूचना को रद्द करने का फैसला लिया है। ये अधिसूचना साल 2014 में जारी की गई थी।
विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने 2014 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी ईआईए अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें 20,000 वर्ग मीटर से ज्यादा निर्मित क्षेत्र वाले शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक शेडों को पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्राप्त करने से छूट दी गई थी। उच्च न्यायालय ने 2014 पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना को रद्द कर दिया क्योंकि यह इसके मसौदा संस्करण से अलग थी। दरअसल इस मसौदा संस्करण के तहत 20,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाले शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक शेडों को पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करनी थी। अदालत का 6 मार्च का आदेश एक एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर आया था।
याचिका में दी गई थी यह दलील
याचिका में दलील दी गई थी कि मसौदा अधिसूचना में यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। इसके अंतर्गत आने वाली परियोजना या गतिविधियों में आवासीय भवन, वाणिज्यिक भवन, होटल, अस्पताल, छात्रावास, कार्यालय ब्लॉक, सूचना प्रौद्योगिकी या सॉफ्टवेयर विकास इकाइयाँ या पार्क इसमें शामिल होंगे। हालाँकि, अंतिम अधिसूचना में औद्योगिक शेड, स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों के लिए छात्रावास जैसी कुछ इमारतों को बाहर रखा गया था। एनजीओ ने कहा था कि 2014 की अंतिम अधिसूचना के तहत ऐसे प्रतिष्ठानों को केवल दो महीने की अवधि के लिए पर्यावरण प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन, वर्षा जल संचयन का वैकल्पिक उपयोग सुनिश्चित करना था। परिणामस्वरूप, अधिसूचना की आड़ में, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम और साल 2006 में जारी मूल ईआईए अधिसूचना का पूर्ण उल्लंघन करते हुए परमिट दिए जा रहे थे। यह सारा दावा दलील में किया गया था।
केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने क्या तर्क दिया
अपने फैसले का बचाव करते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने तर्क दिया था कि पहले एक निर्मित क्षेत्र वाली लगभग सभी इमारतों को पर्यावरण मंजूरी प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक था। बाद में, अंतिम अधिसूचना में औद्योगिक शेड, स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों के छात्रावास जैसी इमारतों को छूट दी गई थी। इसमें तर्क यह था कि यह बदलाव इन इमारतों में की जाने वाली गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए लाया गया था। इसलिए, जहां तक पर्यावरण का सवाल है, जनता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। केंद्र के रुख से असहमति जताते हुए अदालत ने कहा कि उसकी राय है कि रिट याचिका पर विचार की जरूरत है। इसलिए इसकी अनुमति दी जाती है। 22 दिसंबर 2014 की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया है और अलग रखा गया है।