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Kerala: संतान सुख पाने के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी को मिली पेरोल, पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला
Thu, 05 Oct 2023 02:49 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 05 Oct 2023 02:49 AM IST
सार
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि और सजा मुख्य रूप से अपराधियों के सुधार और पुनर्वास के लिए है। आपराधिक मामले में सजा काट चुके व्यक्ति को बाहर आने पर अलग-थलग व्यवहार करने की जरूरत नहीं है।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को पेरोल दे दी है। दोषी की पत्नी की याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है, जिसमें महिला ने संतान सुख के लिए अनुमति मांगी थी। अदालत ने युवक को बच्चे को जन्म देने के लिए इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) उपचार कराने के लिए 15 दिन की पेरोल दी है।
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न्यायमूर्ति पीवी कुन्हिकृष्णन ने दंपति की सहायता करने पर कहा कि जब एक पत्नी इस तरह के अनुरोध के साथ अदालत में आती है, तो वह तकनीकी पहलुओं पर इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती।
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सभ्य जीवन जीने का है पूरा अधिकार
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि और सजा मुख्य रूप से अपराधियों के सुधार और पुनर्वास के लिए है। आपराधिक मामले में सजा काट चुके व्यक्ति को बाहर आने पर अलग व्यक्ति की तरह व्यवहार करने की जरूरत नहीं है। उसे किसी भी अन्य नागरिक की तरह एक सभ्य जीवन जीने का पूरा अधिकार है।
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न्यायाधीश ने हाल ही में दिए गए आदेश में कहा कि इसलिए, मेरी राय है कि अधिकारियों को याचिकाकर्ता के पति को आईवीएफ उपचार जारी रखने के लिए कम से कम 15 दिन की पेरोल देनी चाहिए।
किसी भी कीमत पर दी जाए पेरोल
अदालत ने जेल और सुधार सेवाओं के महानिदेशक को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो सप्ताह के भीतर, यथासंभव शीघ्र और किसी भी कीमत पर, कानून के अनुसार, आईवीएफ उपचार से गुजरने के लिए व्यक्ति को पेरोल देने का निर्देश दिया।
दंपति को राहत देते हुए अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि तत्काल आदेश को सभी मामलों में एक मिसाल के रूप में लेने की जरूरत नहीं है।
इसमें कहा गया कि प्रत्येक मामले पर उसकी योग्यता के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। दावे की वास्तविकता महत्वपूर्ण है। दोषी जेल से बाहर निकलने के लिए इसका उपयोग नहीं कर सकते। प्रत्येक मामले पर दावे की वास्तविकता के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
शादी के बाद से नहीं थी संतान
गणित में स्नातकोत्तर और शिक्षक के रूप में कार्यरत 31 वर्षीय महिला का पति वर्तमान में विय्यूर में केंद्रीय कारागार में बंद है। अदालत के समक्ष अपनी याचिका में महिला ने कहा था कि 2012 में उनकी शादी के बाद से उनकी कोई संतान नहीं है और संतान का सुख उनका सपना था।
उसने अदालत को यह भी बताया था कि वह और उसके पति चिकित्सा की विभिन्न शाखाओं के तहत इलाज करा रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
महिला ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि दंपति का मुवत्तुपुझा के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था और डॉक्टर ने उन्हें आईवीएफ प्रक्रिया से गुजरने का सुझाव दिया था। उसने अदालत को बताया था कि इलाज के लिए यह जरूरी है कि उसका पति तीन महीने तक उसके साथ मौजूद रहे।