केरल: समुद्री कथाओं के नायक बदलेंगे या लहरें किनारे छूकर वापस लौटेंगी, रोमांचक मोड़ पर खड़ी है राजनीति
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विस्तार
तिरुवनंतपुरम की राजनीति 2014 के बाद फिर से रोमांचक मोड़ पर खड़ी है। इस लोकसभा सीट का परिणाम फोटो-फिनिश जैसा रहने के आसार हैं...यानी बेहद नजदीकी। शहर जबरदस्त ढंग से बदलाव चाह रहे हैं, जबकि मनुहार की लहरें समुद्री तटों से टकराकर वापस लौट रही हैं। तटीय क्षेत्र हैं कि अटल-अडिग खड़े हैं, कांग्रेस के मौजूदा प्रत्याशी शशि थरूर के पक्ष में, जो 15 सालों से यहां के सांसद हैं। हालांकि, इस बार कुछ ऐसा है जो संभवतः पहले नहीं हुआ। वह है शहरों में बहुसंख्यक, चार लाख से ज्यादा संख्या वाले, नायर समुदाय की लामबंदी। इस बार इनका वोट लगभग पूरी तरह केंद्रीय राज्य मंत्री, भाजपा के राजीव चंद्रशेखर की ओर शिफ्ट होने के आसार हैं। राजीव और थरूर दोनों इसी बिरादरी से हैं, लिहाजा यह वोट हमेशा दोनों में बंटता रहा है।
दरअसल, शहरी विधानसभाओं में भाजपा पहले, कांग्रेस दूसरे स्थान पर नजर आ रही है, लेकिन जैसे ही आप तटीय इलाकों वाली तीन ग्रामीण विधानसभाओं-कोवलम, नियतिंकारा और परसाला की ओर देखते हैं, वहां पहले नंबर पर कांग्रेस और दूसरे नंबर पर सीपीआई के पन्नयन रवींद्रन नजर आते हैं। राजधानी स्थित सचिवालय के सामने होटल कारोबारी 38 वर्षीय निर्मल कहते हैं कि थरूर ने कहा था कि तिरुवनंतपुरम को बार्सिलोना की तर्ज पर विकसित करेंगे। यूएन का अनुभव था, इसलिए भरोसा किया, पर कुछ नहीं हुआ। एलडीएफ के कैंपेन ऑफिस के चारों ओर विमल, पवित्र और राजश्री के मनोभाव भी इसी प्रकार थे। लेकिन, अतंरराष्ट्रीय बीच कोवलम में तट पर स्टाल लगाने वाले इमैन्युल कहते हैं कि हम तो थरूर को ही वोट देंगे। भाजपा ऊंचे वर्ग की पार्टी है, जिन्होंने हमारे साथ सही बर्ताव नहीं किया। पिछड़ी नाडार जाति के हिंदुओं से ईसाई बने लोगों का ऐसा ही सोचना है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत आर्य का मानना है कि तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत का सारा दारोमदार शहरी नायर या भाजपा के कैडर वोटों से है। शहर में कुछ हद तक उच्च वर्ग के ईसाइयों का वोट पार्टी को मिल सकता है।
त्रिशूर में गोपी का ग्लैमर
केरल की सांस्कृतिक राजधानी त्रिशूर में भाजपा को अपने तीन लाख काडर वोट के अलावा, अभिनेता सुरेश गोपी की सक्रियता और लोकप्रियता से कुल 4 लाख से अधिक वोट जुटा लेने की उम्मीद है। गोपी ने बतौर राज्यसभा सांसद कई काम कराए हैं। यहां उच्च वर्ग के ईसाई वोट भाजपा को नहीं, गोपी को पड़ सकते हैं।
बैक वाटर में फ्रंट पर महिला
अल्लपुझा बैक वाटर टूरिज्म के लिए विख्यात है। यहां भाजपा की शोभा सुरेंद्रन ने लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है। लेफ्ट सरकार के ध्यान न देने से डीसिल्टिंग नहीं हो पा रही और झीलें धीरे-धीरे मर रही हैं। शोभा ने ऐसे मुद्दों को उठाकर पैठ बनाई है, जिससे उनके वोट बढ़ेंगे, हालांकि जीत की उम्मीद नहीं है। कांग्रेस उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल की बहन पद्मजा के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को कुछ नुकसान हो सकता है।
पलक्कड़, अटि्ंटगल और पत्तनमथिट्टा
अटि्ंटगल से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन खड़े हैं। भाजपा उम्मीदवार शोभा सुरेंद्रन पिछली बार एलडीएफ के खिलाफ एंटी इन्कमबेंसी के बीच ढाई लाख वोट जुटाकर तीसरे स्थान पर रही थीं। लिहाजा, मुरलीधरन वोट जुटा सकते हैं। इसी तरह पत्तनमथिट्टा से एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी वोट बढ़ाएंगे। वहीं, पलक्कड़ इकलौती जगह है जहां नगर निकाय की शीर्ष कुर्सी पर भाजपा काबिज है, इसलिए पिछली बार 21% वोट पाकर लोकसभा में तीसरे स्थान पर रहने वाले सी कृष्णकुमार से भी उम्मीदें हैं।
मिशन केरल
सभी 20 सीटों पर लड़ रही भाजपा का लक्ष्य वोट प्रतिशत 13 से बढ़ाकर 25% तक करना है। इससे वह सीपीएम के समकक्ष खड़ी हो जाएगी।