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आह्वान: राज्यपाल आरिफ बोले- बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक मानने की जरूरत नहीं, पाक के उलट भारत में सबको समान अधिकार
Sat, 09 Oct 2021 05:08 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 09 Oct 2021 05:08 PM IST
सार
खान ने कहा कि वह लंबे समय से लोगों से कह रहे हैं कि वे भारत के संविधान का एक प्रावधान बता दें, जिसमें धार्मिक संदर्भ में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का जिक्र हो।
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आरिफ मोहम्मद खान, राज्यपाल, केरल
- फोटो : Amar ujala
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विस्तार
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा है कि भारत में बहुसंख्यक व अल्पसंख्यक जैसी संज्ञाओं के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है। यहां पाकिस्तान से उलट सभी को समान अधिकार हैं। पाकिस्तान में जो लोग मुस्लिम नहीं हैं, उनके अधिकारों की सीमा तय है। भारत में ऐसा नहीं है।
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दिल्ली में एक मीडिया संस्थान के कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता और हमारी सांस्कृतिक विरासत में धर्म के आधार पर भेदभाव का कोई विचार नहीं है। खान ने कहा कि वह लंबे समय से लोगों से कह रहे हैं कि वे भारत के संविधान का एक प्रावधान बता दें, जिसमें धार्मिक संदर्भ में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का जिक्र हो।
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इस वर्गीकरण का क्या मतलब है?
उन्होंने सवाल किया, 'बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक नाम से वर्गीकरण का मतलब क्या है? मैं कभी अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल नहीं करता। आप इसका क्या अर्थ निकालते हैं, क्या मैं बराबर का अधिकार नहीं रखता हूं, मैं गौरवशाली भारतीय नागरिक हूं, जो समान अधिकारों का आनंद लेता है।'
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उन्होंने देश में 'अल्पसंख्यक मुस्लिमों के प्रश्न पर पुनर्विचार कैसे करें' विषय पर अपनी बेबाक राय रखी। खान ने कहा कि अल्पसंख्यक अधिकारों की जरूरत धार्मिक देशों में है, भारत में नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट यह परिभाषित करने में सक्षम नहीं है कि भारत में कौन अल्पसंख्यक है। अगर राजनीतिक वर्ग बुरी तरह से विफल हो गया है तो ये मीडिया का कर्तव्य है कि वो हमसे सवाल करे कि क्या हम संविधान की भावना को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं?
'हिंदू' शब्द हमारे किसी शास्त्र में इस्तेमाल नहीं हुआ
खान ने कहा कि भारतीय सभ्यता धर्म से कभी परिभाषित नहीं हुई। अन्य सभी या अधिकांश सभ्यताएं या तो धर्म से या नस्ल या भाषा से परिभाषित हुई हैं। अपनी इस दलील को पुख्ता बनाने के लिए उन्होंने कुछ श्लोक भी पढ़े और यह दावा किया। यह पूछने पर कि क्या भारतीय राजनीति बीते कुछ दशकों में मुस्लिम तुष्टिकरण से हटकर बहुसंख्यकवाद की ओर नहीं बढ़ी है? खान ने दावा किया कि 'हिंदू' शब्द हमारे किसी शास्त्र में इस्तेमाल नहीं हुआ है।
केरल के राज्यपाल ने कहा कि ‘हिंदू’ शब्द किसी धार्मिक विश्वास या पूजा पद्धति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने वालों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। हमें यह भावना पैदा करने की जरूरत है कि हमारी पहचान भारतीय है।