सुप्रीम कोर्ट में केरल सरकार ने कहा-जंगली जानवरों से कहीं ज्यादा इंसानी अधिकार
- सरकार ने कहा-इंसानों का अधिकार जंगली जानवरों से कहीं ऊपर है
- नौ बजे से सुबह छह बजे तक इस रिजर्व से होते हुए आवाजाही पर रोक
- बुधवार को हाथियों के पक्ष में हुआ था फैसला
विस्तार
केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इंसानों का अधिकार जंगली जानवरों से कहीं ऊपर है। सरकार ने हलफनामा दाखिल करते हुए रात में बांदीपुर टाइगर रिजर्व से होते हुए ट्रैफिक गुजरने पर लगे प्रतिबंध को बेहद भेदभावपूर्ण बताया है। साथ ही इस प्रतिबंध के कारण रिजर्व के आसपास बसे लोगों के विचरण के अधिकार का हनन होने और उन्हें कई तरह की परेशानी होने का भी मुद्दा उठाया है।
बता दें कि रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक इस रिजर्व से होते हुए आवाजाही पर रोक लगी हुई है। केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से इस प्रतिबंध को हटाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करने वाला प्रस्ताव पारित किया था। साथ ही इस प्रतिबंध के खिलाफ कई संगठनों की तरफ से जताये जा रहे विरोध का वायनाड के कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी समर्थन किया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबंध को हटाने से साफ इनकार कर दिया है।
इसके बावजूद केरल सरकार ने शीर्ष अदालत में अपने हलफनामे में कहा है कि बांदीपुर टाइगर रिजर्व का वर्तमान रास्ता दशकों पुराना है। इस पर प्रतिबंध लगाना रिजर्व के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों के साथ भेदभाव है। इससे रिजर्व के आसपास रहने वाले लोगों के कहीं भी आने-जाने व विचरण करने का अधिकार प्रभावित हो रहा है।
केरल सरकार ने कहा है कि यह प्रतिबंध बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन या निष्कर्षों के लगा दिया है। हलफनामे में केरल सरकार ने कहा है कि असम के काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क, मध्य प्रदेश के कान्हा व पेंच टाइगर रिजर्व के रास्ते से भी आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
बांदीपुर रिजर्व में बनने हैं पांच एलिवेटिड रोड
केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्रीय संड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिशों को अमल कराने की गुहार लगाई। इस कमेटी ने बांदीपुर रिजर्व के इलाके से होकर गुजरने वाले पांच एलिवेटिड रोड बनाने की सिफारिश की थी। राज्य सरकार ने बताया कि वर्ष 2019-20 के बजट में इसके लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
बुधवार को हाथियों के पक्ष में हुआ था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नीलगिरी वन क्षेत्र के एक मामले की सुनवाई के दौरान हाथियों के पक्ष में फैसला दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि हाथी सज्जन होते हैं और इंसानों को उन्हें रास्ता देना ही होगा। इतना ही नहीं अदालत ने यह भी कहा था कि वह हाथियों के रास्ते में कोई बाधा नहीं आने देगी।