{"_id":"5b83ed5042c79246300f655b","slug":"kerala-floods-damage-45000-hectares-of-farmland-paddy-banana-spices-waste","type":"story","status":"publish","title_hn":"केरल बाढ़ : खेती की 45,000 हेक्टेयर जमीन तबाह- धान, केला, मसाले की फसल सबसे ज्यादा हुई बर्बाद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
केरल बाढ़ : खेती की 45,000 हेक्टेयर जमीन तबाह- धान, केला, मसाले की फसल सबसे ज्यादा हुई बर्बाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरूवनंतपूरम
Updated Mon, 27 Aug 2018 05:53 PM IST
विज्ञापन
केरल में बाढ़ से खेती की 45000 हेक्टेयर जमीन को नुकसान
केरल में बाढ़ ने 45,000 हेक्टेयर कृषि भूमि में धान, केले, मसालों और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कृषि सचिव शोभाना के पट्टनायक ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि, उत्पादकों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्रीय निधि मांगने के लिए राज्य सरकार से एक विस्तृत प्रस्ताव पेश करने को कहा गया है।
पटनायक ने पीटीआई को बताया, "राज्य का अनुमान है कि में खेती के 45,000 हेक्टेयर जमीन को नुकसान पहुंचा है। हमें भी ऐसी ही रिपोर्ट मिली है। फसलों से ज्यादा, केरल में घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान ज्यादा हुआ है।"
उन्होंने कहा कि 20,000 हेक्टेयर में धान की खेती प्रभावित हुई है और केला बागानों को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचा है। 2,000 हेक्टेयर जमीन में इलायची जैसे मसाले प्रभावित हुए हैं।
विज्ञापन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केरल में धान की फसल के लिए बोया गया क्षेत्र इस मौसम में पिछले सप्ताह तक 57,000 हेक्टेयर था, जो कि पिछले साल इसी अवधि में 62,000 हेक्टेयर था।
मुख्य खरीफ फसल धान की बुवाई दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के बाद जुलाई से शुरू होती है और अक्टूबर से इसकी कटाई की जाती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि, उत्पादकों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्रीय निधि मांगने के लिए राज्य सरकार से एक विस्तृत प्रस्ताव पेश करने को कहा गया है।
पटनायक ने पीटीआई को बताया, "राज्य का अनुमान है कि में खेती के 45,000 हेक्टेयर जमीन को नुकसान पहुंचा है। हमें भी ऐसी ही रिपोर्ट मिली है। फसलों से ज्यादा, केरल में घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान ज्यादा हुआ है।"
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि 20,000 हेक्टेयर में धान की खेती प्रभावित हुई है और केला बागानों को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचा है। 2,000 हेक्टेयर जमीन में इलायची जैसे मसाले प्रभावित हुए हैं।
विज्ञापन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केरल में धान की फसल के लिए बोया गया क्षेत्र इस मौसम में पिछले सप्ताह तक 57,000 हेक्टेयर था, जो कि पिछले साल इसी अवधि में 62,000 हेक्टेयर था।
मुख्य खरीफ फसल धान की बुवाई दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के बाद जुलाई से शुरू होती है और अक्टूबर से इसकी कटाई की जाती है।